Sensex Nifty Fall : सेंसेक्स 1690 अंक लुढ़का, निफ्टी 486 टूटा; ऑटो और बैंकिंग शेयरों में भारी बिकवाली
Sensex Nifty Fall : शेयर बाजार में 27 मार्च को बड़ी गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स 1690 अंक और निफ्टी 486 अंक टूटकर बंद हुए। ऑटो और बैंकिंग शेयरों में बिकवाली, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक तनाव के कारण बाजार दबाव में रहा। जानिए गिरावट की मुख्य वजह और बाजार का पूरा विश्लेषण।
Sensex Nifty Fall : सेंसेक्स 1690 अंक गिरकर 73,583 पर आया, निफ्टी 486 अंक टूटा
शेयर बाजार में 27 मार्च को भारी गिरावट देखने को मिली। भारतीय शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक BSE Sensex 1690 अंक यानी 2.25% की गिरावट के साथ 73,583 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक Nifty 50 486 अंक यानी 2.09% टूटकर 22,820 पर आ गया।
दिनभर बाजार में दबाव बना रहा और निवेशकों ने खासतौर पर ऑटो और बैंकिंग सेक्टर के शेयरों में जमकर बिकवाली की। इस गिरावट से निवेशकों की संपत्ति में बड़ी कमी दर्ज की गई और बाजार का माहौल नकारात्मक बना रहा।
ऑटो और बैंकिंग शेयरों में बिकवाली से बढ़ा दबाव

आज के कारोबार में सबसे ज्यादा दबाव ऑटो और बैंकिंग सेक्टर पर देखने को मिला। इन सेक्टरों में निवेशकों ने मुनाफावसूली और जोखिम कम करने के लिए शेयरों की बिक्री की, जिससे बाजार में गिरावट और तेज हो गई।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब बाजार में अनिश्चितता बढ़ती है, तो निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख करते हैं और जोखिम वाले सेक्टरों से दूरी बना लेते हैं। यही कारण है कि ऑटो और बैंकिंग शेयरों में आज ज्यादा गिरावट दर्ज की गई।
वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की कीमतें बनीं बड़ी वजह
शेयर बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ता तनाव माना जा रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव ने वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ा दी है।
अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने संघर्ष थमने के संकेत दिए थे, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है। इस वजह से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी बनी हुई है।
आज अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल करीब 2% बढ़कर 110 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है। वहीं भारतीय बास्केट में भी लगभग 5% की तेजी दर्ज की गई है और कीमत 157 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है।
कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से महंगाई बढ़ने का खतरा बढ़ जाता है, जिससे निवेशकों का भरोसा कमजोर होता है और शेयर बाजार में गिरावट आ सकती है।
एशियाई बाजारों में मिला-जुला कारोबार
एशियाई बाजारों में आज मिला-जुला रुख देखने को मिला। कुछ बाजारों में गिरावट रही, जबकि कुछ में हल्की बढ़त दर्ज की गई।
जापान का निक्केई इंडेक्स 0.43% गिरकर 53,373 के स्तर पर बंद हुआ।
दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स 0.40% गिरकर 5,438 पर बंद हुआ।
हॉन्गकॉन्ग का हैंगसेंग इंडेक्स 0.38% चढ़कर 24,952 पर बंद हुआ।
चीन का शंघाई कंपोजिट इंडेक्स 0.63% चढ़कर 3,913 के स्तर पर बंद हुआ।
इन वैश्विक संकेतों का असर भारतीय बाजार पर भी देखने को मिला और निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया।
अमेरिकी बाजारों में भी गिरावट का असर

अमेरिकी शेयर बाजारों में 26 मार्च को गिरावट दर्ज की गई, जिसका असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा।
अमेरिका का प्रमुख सूचकांक Dow Jones Industrial Average 469 अंक यानी 1.01% गिरकर 45,960 के स्तर पर बंद हुआ।
टेक्नोलॉजी आधारित इंडेक्स Nasdaq Composite 2.38% गिरकर 21,408 पर बंद हुआ।
वहीं, S&P 500 114 अंक यानी 1.74% गिरकर 6,477 के स्तर पर बंद हुआ।
अमेरिकी बाजारों में गिरावट का सीधा असर वैश्विक निवेशकों के भरोसे पर पड़ता है, जिससे अन्य देशों के बाजार भी प्रभावित होते हैं।
राम नवमी के बाद बाजार खुलने पर दिखा असर
गुरुवार को राम नवमी के अवसर पर भारतीय शेयर बाजार बंद थे, जबकि इस दौरान वैश्विक बाजारों में उतार-चढ़ाव जारी रहा।
जब 27 मार्च को बाजार दोबारा खुले, तो उन्हें अंतरराष्ट्रीय बाजारों में हुए बदलावों के साथ तालमेल बिठाना पड़ा। यही वजह रही कि बाजार खुलते ही निवेशकों ने सतर्कता दिखाई और बिकवाली बढ़ गई।
इससे पहले बाजार में रही थी तेजी
26 मार्च को राम नवमी के कारण बाजार बंद रहा था। इससे पहले 25 मार्च को बाजार में अच्छी तेजी दर्ज की गई थी।
उस दिन BSE Sensex 1,205 अंक की तेजी के साथ 75,273 पर बंद हुआ था, जबकि Nifty 50 394 अंक बढ़कर 23,306 के स्तर पर पहुंच गया था।
ऑटो और बैंकिंग सेक्टर के शेयरों में उस दिन अच्छी खरीदारी देखने को मिली थी, लेकिन मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों के कारण बाजार का रुख बदल गया।
आगे बाजार का रुख कैसा रह सकता है
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव कम नहीं होता और कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता नहीं आती, तब तक शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
निवेशकों को फिलहाल सतर्क रहने और दीर्घकालिक निवेश रणनीति अपनाने की सलाह दी जा रही है। बाजार में आने वाले दिनों में वैश्विक घटनाओं, महंगाई और ब्याज दरों के फैसलों का असर देखने को मिल सकता है।

