Cheque Bounce Case : राजपाल यादव भावुक, दिल्ली हाईकोर्ट ने अतिरिक्त समय देने से साफ इनकार
Cheque Bounce Case : चेक बाउंस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने अभिनेता राजपाल यादव को बकाया रकम चुकाने के लिए अतिरिक्त समय देने से इनकार कर दिया। सुनवाई के दौरान वह भावुक हो गए और कहा कि उन्हें फिर जेल भेज दिया जाए। कोर्ट ने मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया है।
Cheque Bounce Case : चेक बाउंस केस में सुनवाई के दौरान भावुक हुए Rajpal Yadav
दिल्ली हाईकोर्ट में चल रहे चेक बाउंस मामले में अभिनेता राजपाल यादव की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने उन्हें बकाया रकम चुकाने के लिए अतिरिक्त समय देने से साफ इनकार कर दिया। वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए पेश हुए राजपाल यादव सुनवाई के दौरान भावुक हो गए और उन्होंने कहा कि जरूरत पड़े तो उन्हें फिर से जेल भेज दिया जाए।
मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट का रुख सख्त दिखाई दिया। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि भुगतान करने की इच्छा है, तो देरी क्यों हो रही है। कोर्ट ने यह भी कहा कि बार-बार समय मांगना न्यायिक प्रक्रिया में देरी का कारण बन सकता है।
कोर्ट ने 30 दिन का अतिरिक्त समय देने से किया इनकार
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, राजपाल यादव ने अदालत से 6 करोड़ रुपए की बकाया राशि चुकाने के लिए 30 दिन का अतिरिक्त समय मांगा था। हालांकि, कोर्ट ने इस मांग को ठुकराते हुए कहा कि अब और समय नहीं दिया जाएगा।
अदालत ने कहा, “नहीं मतलब नहीं। फैसला सुरक्षित रखा जा रहा है और समय नहीं मिलेगा।” इस बयान से स्पष्ट हो गया कि कोर्ट मामले को गंभीरता से देख रहा है और जल्द निर्णय लेने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
सुनवाई के दौरान न्यायाधीश ने यह भी कहा कि यदि कोई व्यक्ति भुगतान करना चाहता है, तो उसे समय पर जिम्मेदारी निभानी चाहिए। बार-बार समय मांगने से न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित होती है।
शिकायतकर्ता पक्ष ने बताया- 7.75 करोड़ रुपए अभी भी बकाया
मामले में शिकायतकर्ता पक्ष ने अदालत को बताया कि सजा पूरी करने से वित्तीय देनदारी समाप्त नहीं होती। शिकायतकर्ता के वकील ने दलील दी कि राजपाल यादव पहले ही 10 करोड़ रुपए का भुगतान नहीं करने की बात स्वीकार कर चुके हैं।
वकील के अनुसार, अब भी कुल 7.75 करोड़ रुपए की राशि बकाया है। हालांकि ट्रायल कोर्ट के आदेश से पहले करीब 2 करोड़ रुपए जमा किए जा चुके थे, लेकिन पूरी राशि का भुगतान नहीं होने के कारण मामला लंबित है।
शिकायतकर्ता पक्ष ने यह भी कहा कि भुगतान में लगातार देरी के कारण ब्याज की राशि बढ़ती जा रही है, जिससे कुल बकाया रकम और अधिक हो गई है।
वन-टाइम सेटलमेंट की संभावना पर भी हुई चर्चा
सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों पक्षों के बीच समझौते की संभावना भी तलाशने की कोशिश की। कोर्ट ने संकेत दिया कि यदि कम समय में 6 करोड़ रुपए का भुगतान कर दिया जाए, तो विवाद का समाधान संभव हो सकता है।
इस प्रस्ताव पर शिकायतकर्ता पक्ष भी सहमत नजर आया। हालांकि राजपाल यादव ने रकम जुटाने के लिए समय की मांग की, जिसे अदालत ने स्वीकार नहीं किया।
अदालत ने यह स्पष्ट कर दिया कि अब मामले में अंतिम निर्णय जल्द सुनाया जाएगा।
सुनवाई के दौरान भावुक हुए अभिनेता

सुनवाई के दौरान राजपाल यादव भावुक हो गए और उन्होंने अदालत में कहा कि उन्होंने पहले ही बड़ी राशि का भुगतान कर दिया है और आर्थिक स्थिति के कारण कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, “उन्होंने मुझसे 17 करोड़ रुपए ले लिए हैं। मेरे पांच फ्लैट बेचने पड़े हैं। मैं फिर से कोर्ट जाने के लिए तैयार हूं। मैं भावुक नहीं हूं, मुझे पांच बार और जेल भेज दो।”
उनके इस बयान से अदालत में भावनात्मक माहौल बन गया। हालांकि अदालत ने कानूनी प्रक्रिया के अनुसार सख्त रुख बनाए रखा और अतिरिक्त समय देने से इनकार कर दिया।
क्या है पूरा मामला: फिल्म के लिए लिया था कर्ज
यह मामला वर्ष 2010 का है, जब राजपाल यादव ने अपनी फिल्म
Ata Pata Lapata
बनाने के लिए एक निजी कंपनी से 5 करोड़ रुपए का कर्ज लिया था।
फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं हो सकी, जिसके कारण उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। समय पर कर्ज की राशि नहीं लौटाने के कारण कंपनी को दिए गए चेक बाउंस हो गए, जिसके बाद उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की गई।
दोनों पक्षों के बीच कई बार समझौते की कोशिशें हुईं, लेकिन पूरी रकम का भुगतान नहीं हो सका। समय के साथ ब्याज जुड़ने के कारण कुल बकाया राशि काफी बढ़ गई।
2018 में कोर्ट ने सुनाई थी जेल की सजा

वर्ष 2018 में दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने इस मामले में राजपाल यादव को दोषी ठहराते हुए छह महीने की जेल की सजा सुनाई थी। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट में अपील की, जहां उन्हें कई बार राहत मिली।
हालांकि फरवरी 2026 की शुरुआत में दिल्ली हाईकोर्ट ने पहले दी गई रियायतों और समय सीमा को बढ़ाने से इनकार कर दिया था। अदालत ने उन्हें 4 फरवरी तक आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया था।
इसके बाद उन्होंने 5 फरवरी को अदालत में आत्मसमर्पण किया और लगभग 12 दिन जेल में रहने के बाद 1.5 करोड़ रुपए जमा करने की शर्त पर 16 फरवरी को अंतरिम जमानत पर रिहा कर दिए गए थे।
अब कोर्ट के फैसले पर टिकी सबकी नजर
फिलहाल दिल्ली हाईकोर्ट ने मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब सभी की नजर अदालत के अंतिम निर्णय पर टिकी हुई है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले का फैसला आने वाले समय में वित्तीय विवाद और चेक बाउंस मामलों के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण साबित हो सकता है।

