Rajasthan में योग प्रशिक्षकों का धरना, फुल टाइम और संविदा कैडर शामिल करने की मांग जोर
जयपुर में अखिल Rajasthan योग प्रशिक्षक महासंघ के आह्वान पर 1300 आयुर्वेद योग प्रशिक्षकों ने धरना प्रदर्शन किया। प्रशिक्षकों ने फुल टाइम स्थायी पद और संविदा कैडर में शामिल करने की मांग की। कम मानदेय और आर्थिक कठिनाइयों के बीच सरकार से तत्काल समाधान की उम्मीद जताई गई।
Rajasthan में योग प्रशिक्षकों का धरना प्रदर्शन
जयपुर में शुक्रवार को अखिल राजस्थान योग प्रशिक्षक महासंघ (रजि.) के आह्वान पर लगभग 1300 आयुर्वेद योग प्रशिक्षक शहीद स्मारक पर सांकेतिक धरना देने के लिए एकत्र हुए। इस धरने में प्रदेशभर से आए प्रशिक्षकों ने अपनी मांगों और आर्थिक परेशानियों को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया।
योग प्रशिक्षकों ने आर्थिक बदहाली को बताया मुख्य कारण
महासंघ के प्रदेश संरक्षक डॉ. बी. एल. कुमावत ने कहा कि राजस्थान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर योग के क्षेत्र में पहचान दिलाने वाले प्रशिक्षक आज खुद आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय आयुष मिशन के अंतर्गत नियुक्त पार्ट टाइम योग प्रशिक्षक पिछले 4–5 वर्षों से मात्र 5,000 से 8,000 रुपये मासिक मानदेय पर कार्य कर रहे हैं।
महंगाई और बढ़ती जीवन लागत के इस दौर में इतने कम वेतन में परिवार का पालन-पोषण करना बेहद कठिन हो गया है। कई महिला योग प्रशिक्षकों को रोजाना 40–45 किलोमीटर तक आवागमन करना पड़ता है। बावजूद इसके उन्हें न तो स्थायी सेवा सुरक्षा मिली है और न ही फुल टाइम वेतनमान।
स्थायी पदों और संविदा कैडर की मांग
डॉ. कुमावत ने कहा कि प्रशिक्षकों ने अपनी मांगों को लेकर जिला कलेक्टर, विधायक, मंत्री, उपमुख्यमंत्री और मुख्यमंत्री तक सैकड़ों ज्ञापन सौंपे हैं। विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा नेताओं ने योग प्रशिक्षकों से वादा किया था कि यदि भाजपा की सरकार बनती है, तो आयुर्वेद योग प्रशिक्षकों के लिए फुल टाइम स्थायी पद सृजित किए जाएंगे।
लेकिन सरकार बनने के बाद भी यह वादा अब तक पूरा नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि योग दिवस पर सरकार योग की उपलब्धियों का श्रेय लेती है, लेकिन जन-जन तक योग पहुँचाने वाले प्रशिक्षकों के योगदान को नजरअंदाज किया जा रहा है। यह सरकार की दोहरी नीति का प्रतीक है।
महंगाई और कम वेतन से घर चलाना मुश्किल
महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष दिनेश नांगल ने कहा कि आज के महंगाई भरे दौर में अल्प मानदेय से घर का खर्च चलाना बेहद कठिन हो गया है। सरकार में योग प्रशिक्षकों के भविष्य को लेकर अभी भी स्पष्ट नीति नहीं है।
धरना प्रदर्शन में शामिल प्रशिक्षकों ने कहा कि वे लंबे समय से आर्थिक और पेशेवर असुरक्षा का सामना कर रहे हैं। उन्होंने सरकार से फुल टाइम वेतनमान और संविदा कैडर में समायोजन की मांग की।
धरना प्रदर्शन में किसने लिया भाग
इस धरना प्रदर्शन में आयुर्वेद विभाग के लगभग 1300 योग प्रशिक्षक शामिल हुए। प्रशिक्षकों ने शांतिपूर्ण ढंग से धरना प्रदर्शन किया और सरकार से तत्काल समाधान की गुहार लगाई।
योग प्रशिक्षकों का योगदान और उपेक्षा
महासंघ के नेताओं ने बताया कि राजस्थान में योग प्रशिक्षकों ने राज्य को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। लेकिन उनके योगदान के बावजूद उन्हें स्थायी नौकरी और उचित वेतन नहीं मिला।
प्रशिक्षकों का कहना है कि वे लगातार अपने स्वास्थ्य और योग शिक्षा के माध्यम से समाज को लाभ पहुंचा रहे हैं, फिर भी उनके अधिकारों और भविष्य को लेकर अंधकार छाया हुआ है।
सरकार से अपेक्षाएँ और अगला कदम
योग प्रशिक्षकों ने सरकार से अपील की है कि अल्प मानदेय, स्थायी नौकरी और संविदा कैडर में शामिल करने की मांगों पर तत्काल ध्यान दिया जाए।
अखिल Rajasthan योग प्रशिक्षक महासंघ ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लिया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा, जिसमें प्रदेशभर में और व्यापक धरने और प्रदर्शन शामिल हो सकते हैं।
निष्कर्ष
Rajasthan में योग प्रशिक्षकों का यह धरना प्रदेश में आयुर्वेद और योग शिक्षा के क्षेत्र में कार्यरत कर्मचारियों की स्थिति को उजागर करता है। उनके द्वारा उठाई गई मांगें न केवल उनकी आर्थिक सुरक्षा से जुड़ी हैं, बल्कि योग और स्वास्थ्य शिक्षा के क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए भी महत्वपूर्ण हैं।



