Rajasthan | Hockey Association को हाईकोर्ट से झटका, नाम हटेगा पोर्टल से, खिलाड़ी राष्ट्रीय खेल सकेंगे
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राजस्थान हाईकोर्ट ने हॉकी इंडिया पोर्टल से राजस्थान Hockey Association का नाम हटाने का आदेश दिया। कोर्ट ने याचिकाकर्ता खिलाड़ियों को राष्ट्रीय स्तर पर खेलने की अनुमति बरकरार रखी। 2009 में रद्द हुई मान्यता और 2010 के जयपुर पीठ के आदेश को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने संशोधन किया।
Hockey Association : हाईकोर्ट ने संशोधित किया आदेश
राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर मुख्यपीठ ने नौ हॉकी खिलाड़ियों द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए अपने 24 मार्च के अंतरिम आदेश में संशोधन किया। जस्टिस कुलदीप माथुर की एकल पीठ ने 1 अप्रैल को आदेश जारी करते हुए हॉकी इंडिया को आधिकारिक पोर्टल पर ‘राजस्थान हॉकी एसोसिएशन’ का नाम दिखाने से पहले दिए निर्देश वापस ले लिए।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर के टूर्नामेंट में खेलने के पात्र हैं, बशर्ते वे निर्धारित आयु और सर्टिफिकेशन संबंधी शर्तें पूरी करें।
2009 में रद्द हो चुकी थी मान्यता
हॉकी इंडिया (प्रतिवादी नंबर 3) की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजेश जोशी ने कोर्ट को बताया कि 24 मार्च का आदेश एक अहम तथ्य की अनदेखी में पारित हुआ था। उन्होंने तर्क दिया कि राजस्थान ओलंपिक एसोसिएशन ने 19 जून 2009 को ही राजस्थान हॉकी एसोसिएशन को डी-रिकग्नाइज और डी-एफिलिएट कर दिया था।
यह निर्णय जयपुर पीठ में चुनौती के तहत आया था, लेकिन बाद में कोर्ट ने सुनवाई के दौरान इस मामले को विस्तृत रूप से देखा।

जयपुर पीठ ने 2010 में हटाई थी अंतरिम रोक
हॉकी इंडिया की ओर से कोर्ट को बताया गया कि 22 जनवरी 2010 को जयपुर पीठ ने डी-रिकग्निशन पर अंतरिम रोक लगाई थी। लेकिन सभी पक्षों की विस्तृत सुनवाई के बाद, 2 अप्रैल 2010 को विस्तृत आदेश पारित कर उस अंतरिम रोक को हटा दिया गया।
इसके साथ ही कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अरुण सारस्वत और मित्रानंद पूनिया ‘हॉकी राजस्थान (अन-रजिस्टर्ड)’ का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, जो राजस्थान हॉकी एसोसिएशन से अलग इकाई है।
खिलाड़ियों के राष्ट्रीय खेल खेलने पर कोई रोक नहीं
वरिष्ठ अधिवक्ता ने कोर्ट में कहा कि यदि याचिकाकर्ता खिलाड़ी राष्ट्रीय टूर्नामेंट्स में भाग लेना चाहते हैं, तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। हालांकि, खिलाड़ियों को सभी आवश्यक पात्रता मापदंड जैसे आयु, मेडिकल परीक्षण और प्रमाणपत्र पूरा करना अनिवार्य होगा।
याचिकाकर्ताओं के वकील गौरव रांका ने सुनवाई स्थगित करने का आग्रह किया, लेकिन जयपुर पीठ के 2010 के आदेश को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने इसे अस्वीकार कर दिया।
कोर्ट का स्पष्ट आदेश

जस्टिस कुलदीप माथुर ने अपने पूर्व आदेश में संशोधन करते हुए कहा:
- आधिकारिक प्लेयर रजिस्ट्रेशन पोर्टल पर ‘राजस्थान हॉकी एसोसिएशन’ का नाम प्रदर्शित करने का आदेश वापस लिया गया।
- याचिकाकर्ता लक्ष्मी और अन्य 8 खिलाड़ियों को राष्ट्रीय हॉकी टूर्नामेंट में खेलने की अनुमति बरकरार रखी गई।
- खिलाड़ी सक्षम प्राधिकारी द्वारा निर्धारित सभी शर्तों और मापदंडों को पूरा करेंगे।
विवाद का ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य
- 2009 में राजस्थान हॉकी एसोसिएशन की मान्यता रद्द हो चुकी थी।
- 2010 में जयपुर पीठ ने डी-रिकग्निशन पर अंतरिम रोक को हटाया।
- कोर्ट ने यह सुनिश्चित किया कि याचिकाकर्ता खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर पर खेलने में बाधित न हों।
इस निर्णय से स्पष्ट हुआ कि कोर्ट ने खेल और खिलाड़ियों के हितों को प्राथमिकता दी, जबकि संगठनात्मक नाम और मान्यता विवाद को अलग रखा।
निष्कर्ष
हाईकोर्ट का यह आदेश राजस्थान हॉकी संगठन और खिलाड़ियों के बीच लंबे समय से चल रहे विवाद में महत्वपूर्ण मोड़ है।
- खिलाड़ियों को अब राष्ट्रीय टूर्नामेंट में भाग लेने का अधिकार सुरक्षित है।
- हॉकी इंडिया पोर्टल पर संगठन के नाम को लेकर विवाद समाप्त हुआ।
- कोर्ट ने स्पष्ट किया कि खेल और खिलाड़ियों की योग्यता सर्वोपरि है, जबकि संगठनात्मक विवाद अलग रखा गया।
यह फैसला राजस्थान और भारत में हॉकी खिलाड़ियों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

