Bomb Threat : राजस्थान हाईकोर्ट जयपुर बेंच को फिर बम धमकी, CJI दौरा रद्द कराने की मांग
Bomb Threat : राजस्थान हाईकोर्ट जयपुर बेंच को ईमेल के जरिए बम से उड़ाने की धमकी मिली। मेल में CJI का दौरा रद्द कराने और 12 बजे तक परिसर खाली करने की चेतावनी दी गई। सघन तलाशी में कुछ नहीं मिला। चार महीनों में यह 10वीं धमकी है।
Bomb Threat :राजस्थान हाईकोर्ट जयपुर बेंच को फिर बम धमकी

सघन तलाशी अभियान, कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिली
धमकी मिलते ही हाईकोर्ट प्रशासन और पुलिस अलर्ट हो गई। बम निरोधक दस्ते और सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे परिसर में सघन तलाशी अभियान चलाया। हालांकि जांच के दौरान कोई भी संदिग्ध वस्तु नहीं मिली।
एहतियात के तौर पर कोर्ट की कार्यवाही कुछ समय के लिए रोकी गई। करीब आधे घंटे की दे

री से सुबह 11 बजे सुनवाई दोबारा शुरू की गई।
एक दिन पहले भी मिली थी धमकी
यह पहली बार नहीं है जब जयपुर बेंच को इस तरह की धमकी मिली हो। इससे एक दिन पहले भी ईमेल के जरिए बम से उड़ाने की धमकी दी गई थी। उस समय भी पूरे परिसर की तलाशी ली गई थी, लेकिन कोई संदिग्ध सामग्री बरामद नहीं हुई।
लगातार मिल रही धमकियों से सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं और साइबर ट्रैकिंग पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
CJI के जयपुर दौरे से पहले बढ़ी सतर्कता
सूत्रों के अनुसार, शुक्रवार को CJI जस्टिस सूर्यकांत जयपुर आने वाले हैं। वे यहां साइबर सिक्योरिटी से जुड़े एक सेमिनार का उद्घाटन करेंगे। इसी संदर्भ में धमकी भरे मेल में CJI का दौरा रद्द कराने की बात लिखी गई थी।
CJI के कार्यक्रम को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था पहले से ही कड़ी की गई थी, लेकिन ताजा धमकी के बाद अतिरिक्त पुलिस बल और खुफिया निगरानी बढ़ा दी गई है।
साढ़े तीन-चार महीनों में 10वीं धमकी
राजस्थान हाईकोर्ट जयपुर बेंच को 31 अक्टूबर 2025 के बाद से लगातार धमकी भरे ईमेल मिल रहे हैं। 31 अक्टूबर को पहली बार धमकी मिली थी। इसके बाद 5 दिसंबर, 8, 9, 10 और 11 दिसंबर को भी मेल भेजे गए।
वहीं वर्ष 2026 में 6 फरवरी, 17 फरवरी और 19 फरवरी को धमकियां मिल चुकी हैं। ताजा मेल के साथ यह कुल 10वीं धमकी बताई जा रही है। लगातार मिल रही इन धमकियों ने सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती खड़ी कर दी है।
साइबर ट्रैकिंग की चुनौती
साइबर लॉ विशेषज्ञ और अधिवक्ता आदर्श सिंघल के अनुसार, ऐसे मामलों में मेल भेजने वाले व्यक्ति तक पहुंचना मुश्किल जरूर होता है, लेकिन नामुमकिन नहीं। उन्होंने बताया कि आमतौर पर इस तरह के मामलों में वीपीएन (Virtual Private Network) का उपयोग किया जाता है, जिससे आईपी एड्रेस बार-बार बदलता रहता है।
इस वजह से जांच एजेंसियों को सीधे आईपी एड्रेस के जरिए आरोपी तक पहुंचने में कठिनाई होती है। हालांकि, वीपीएन सेवा प्रदाता कंपनियां अपने सर्वर का डेटा सुरक्षित रखती हैं। कानूनी प्रक्रिया के तहत उस डेटा को हासिल कर जांच एजेंसियां आरोपी तक पहुंच सकती हैं।
सुरक्षा एजेंसियों की जांच जारी
फिलहाल पुलिस और साइबर सेल मिलकर ईमेल की तकनीकी जांच कर रही हैं। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि मेल किस सर्वर से भेजा गया और उसमें किस तरह की तकनीक का इस्तेमाल किया गया।
साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि क्या सभी धमकी भरे मेल एक ही स्रोत से भेजे गए हैं या इसके पीछे अलग-अलग व्यक्ति या समूह शामिल हैं।
न्यायिक संस्थानों की सुरक्षा पर सवाल
लगातार मिल रही धमकियों ने न्यायिक संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि हर बार तलाशी में कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला है, फिर भी ऐसी धमकियां अदालत की कार्यवाही और आमजन में असुरक्षा की भावना पैदा करती हैं।
प्रशासन का कहना है कि सुरक्षा में कोई कोताही नहीं बरती जाएगी और दोषी को जल्द पकड़ने के लिए सभी तकनीकी और कानूनी उपाय किए जा रहे हैं।
निष्कर्ष
राजस्थान हाईकोर्ट जयपुर बेंच को मिली ताजा बम धमकी ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। हालांकि तलाशी में कुछ नहीं मिला, लेकिन लगातार मिल रहे धमकी भरे मेल गंभीरता से लिए जा रहे हैं। अब निगाहें जांच एजेंसियों पर टिकी हैं कि वे इस साइबर धमकी के पीछे छिपे शख्स या समूह तक कब पहुंच पाती हैं।

