कार्रवाई का नेतृत्व DSO-1 मोनिका जाखड़ और DSO-2 नीरज जैन ने किया। टीम ने सबसे पहले देवनगर रोड स्थित एक मकान पर छापा मारा, जहां से 64 गैस सिलेंडर बरामद किए गए। इसके बाद जांच का दायरा बढ़ाते हुए बागोलाई क्षेत्र में दबिश दी गई, जहां एक बड़े गोदाम से 448 से अधिक सिलेंडर जब्त किए गए। अधिकारियों के अनुसार कार्रवाई अभी भी जारी है और जब्ती का आंकड़ा और बढ़ सकता है।
जांच में सामने आया है कि ये सिलेंडर निजी गैस कंपनियों के नाम पर संचालित एजेंसियों के जरिए अवैध रूप से जमा किए गए थे। इंदिरा गैस और प्योर गैस के नाम से चल रही इन एजेंसियों के पास मात्र 100 किलो गैस स्टोर करने का लाइसेंस था, लेकिन मौके पर हजारों किलो गैस का स्टॉक पाया गया। इससे साफ है कि नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही थीं।
सूत्रों के अनुसार इस पूरे अवैध नेटवर्क का मास्टरमाइंड रोहित कुमावत बताया जा रहा है, जो लंबे समय से गैस सिलेंडरों की अवैध सप्लाई चेन चला रहा था। उसके साथ शुभाष कुमावत का नाम भी सामने आया है। दोनों मिलकर घरेलू गैस सिलेंडरों को कमर्शियल उपयोग के लिए ऊंचे दामों पर सप्लाई कर रहे थे।
जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि घरेलू गैस, जो आम जनता के लिए सब्सिडी दरों पर उपलब्ध कराई जाती है, उसे दुकानदारों और होटलों को अधिक कीमत पर बेचा जा रहा था। इसके लिए अलग-अलग स्थानों पर अवैध गोदाम बनाए गए थे, जहां बड़ी मात्रा में सिलेंडर स्टोर कर सप्लाई की जाती थी। इस पूरे नेटवर्क से लाखों नहीं बल्कि करोड़ों रुपए का खेल चल रहा था।
जिला आपूर्ति विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि दोषियों के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही पूरे नेटवर्क की गहन जांच की जा रही है, ताकि इसमें शामिल अन्य लोगों को भी पकड़ा जा सके।
प्रशासन का कहना है कि यह अजमेर जिले में निजी गैस एजेंसियों के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई है। इस कार्रवाई के बाद अवैध गैस कारोबार पर प्रभावी अंकुश लगने की उम्मीद जताई जा रही है। वहीं आम लोगों ने भी प्रशासन की इस सख्ती का स्वागत किया है और भविष्य में ऐसी कार्रवाइयों की मांग की है।
निष्कर्ष
पुष्कर में हुई इस बड़ी कार्रवाई ने गैस माफियाओं के खिलाफ प्रशासन की सख्त मंशा को स्पष्ट कर दिया है। 500 से अधिक सिलेंडरों की जब्ती और करोड़ों के अवैध कारोबार का खुलासा इस बात का प्रमाण है कि संगठित रूप से कानून का उल्लंघन किया जा रहा था।
अब देखना यह होगा कि जांच में और कितने बड़े नाम सामने आते हैं और प्रशासन इस नेटवर्क को पूरी तरह खत्म करने में कितना सफल होता है।
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