बैंककर्मियों की सतर्कता से टली दो करोड़ की साइबर ठगी, रिटायर्ड शिक्षिका डिजिटल अरेस्ट में फंसी
बैंककर्मियों की सतर्कता से टली दो करोड़ की साइबर ठगी : प्रयागराज में साइबर अपराधियों ने मनी लॉन्ड्रिंग का डर दिखाकर रिटायर्ड शिक्षिका से दो करोड़ रुपये ठगने की कोशिश की। तीन दिन डिजिटल अरेस्ट में रखा गया। बैंककर्मियों और साइबर क्राइम पुलिस की सतर्कता से 2 करोड़ की ठगी टल गई।
बैंककर्मियों की सतर्कता से टली दो करोड़ की साइबर ठगी, रिटायर्ड शिक्षिका बाल-बाल बचीं
प्रयागराज में साइबर अपराधियों द्वारा की गई एक बड़ी ठगी की कोशिश बैंककर्मियों और साइबर क्राइम पुलिस की सतर्कता से नाकाम हो गई। साइबर ठगों ने मनी लॉन्ड्रिंग का डर दिखाकर एक सेवानिवृत्त शिक्षिका को तीन दिन तक डिजिटल अरेस्ट में रखा और उनसे दो करोड़ रुपये ऐंठने का प्रयास किया। हालांकि, समय रहते बैंक कर्मचारियों को संदेह हुआ और पुलिस को सूचना दी गई, जिससे शिक्षिका को भारी आर्थिक नुकसान से बचा लिया गया।
मनी लॉन्ड्रिंग का डर दिखाकर किया फोन

प्राप्त जानकारी के अनुसार, सिविल लाइंस क्षेत्र में अकेली रहने वाली एक सेवानिवृत्त शिक्षिका को 26 दिसंबर को साइबर अपराधियों का फोन आया। कॉल करने वालों ने पहले उनका नाम पूछा और फिर दावा किया कि उनके आधार कार्ड पर फर्जी बैंक खाता खोला गया है, जिसमें करोड़ों रुपये का लेन-देन हुआ है।
साइबर अपराधियों ने इसे सीधे मनी लॉन्ड्रिंग का मामला बताते हुए कहा कि इसमें ईडी और सीबीआई जैसी एजेंसियां जांच कर रही हैं।
गिरफ्तारी की धमकी देकर तीन दिन डिजिटल अरेस्ट
इसके बाद साइबर ठगों ने शिक्षिका को तत्काल गिरफ्तारी की धमकी दी। उन्हें कहा गया कि वे घर से बाहर न निकलें और किसी को भी इस बारे में न बताएं। ऐसा न करने पर तुरंत कार्रवाई की चेतावनी दी गई।
डर और तनाव में आकर सेवानिवृत्त शिक्षिका ने ठगों की बातों पर विश्वास कर लिया। 26 दिसंबर से 28 दिसंबर तक उन्हें मानसिक रूप से डिजिटल अरेस्ट में रखा गया।
दो करोड़ रुपये देने की मांग
साइबर अपराधियों ने शिक्षिका से कहा कि यदि वे इस पूरे मामले से बचना चाहती हैं तो दो करोड़ रुपये देने होंगे। इस दबाव में आकर शिक्षिका ने अपनी जमा पूंजी का इंतजाम करना शुरू कर दिया।
उन्होंने बैंक जाकर एफडी तुड़वाकर रुपये ट्रांसफर कराने की बात कही और इसी सिलसिले में वह सिविल लाइंस स्थित एक बैंक शाखा पहुंचीं।
बैंक पहुंचते ही खुलने लगी साजिश की परतें
बैंक में शिक्षिका ने अपनी 1.20 करोड़ रुपये की एफडी तुड़वाकर दूसरे खाते में ट्रांसफर कराने की बात कही। इसी दौरान बैंककर्मियों को यह भी जानकारी मिली कि वह पहले 90 लाख रुपये की आरटीजीएस के जरिए ट्रांसफर करने का प्रयास कर चुकी हैं।
बैंक स्टाफ ने उनकी घबराहट, असामान्य व्यवहार और बड़ी रकम के ट्रांजैक्शन को देखते हुए संदेह जताया।
बैंककर्मियों की सतर्कता से बची जान-माल की पूंजी
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बैंक मैनेजर और कर्मचारियों ने सजगता दिखाते हुए तुरंत साइबर क्राइम थाने की पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही साइबर पुलिस की टीम बैंक पहुंची और सेवानिवृत्त शिक्षिका से बातचीत की।
पूछताछ के दौरान पुलिस को पता चला कि यह पूरा मामला साइबर ठगी और डिजिटल अरेस्ट स्कैम से जुड़ा है।
पुलिस ने बेटे और पड़ोसियों से की बात
पुलिस ने सेवानिवृत्त शिक्षिका के बेटे से फोन पर संपर्क किया, जो बाहर नौकरी करते हैं। इसके अलावा पुलिस टीम ने उनके घर जाकर पड़ोसियों से भी जानकारी ली, ताकि स्थिति की पूरी सच्चाई सामने आ सके।
जांच में साफ हो गया कि साइबर अपराधियों ने डर और दबाव बनाकर उन्हें मानसिक रूप से बंधक बना रखा था।
बैंक खाता किया गया फ्रीज
साइबर ठगी की पुष्टि होने के बाद बैंक मैनेजर ने सेवानिवृत्त शिक्षिका का बैंक खाता फ्रीज कर दिया, ताकि किसी भी तरह का अनाधिकृत लेन-देन न हो सके और उनकी जमा पूंजी पूरी तरह सुरक्षित रहे।
एसीपी साइबर क्राइम ने क्या कहा?
एसीपी साइबर क्राइम राजकुमार मीना ने बताया कि साइबर अपराधियों ने सेवानिवृत्त शिक्षिका से दो करोड़ रुपये की ठगी का प्रयास किया था, लेकिन बैंककर्मियों और साइबर पुलिस की सतर्कता से यह साजिश नाकाम हो गई।
उन्होंने कहा कि यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि डिजिटल अरेस्ट और मनी लॉन्ड्रिंग कॉल जैसे साइबर फ्रॉड आज के समय में तेजी से बढ़ रहे हैं।
साइबर पुलिस की अपील: डरें नहीं, सतर्क रहें
साइबर क्राइम पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि कोई भी सरकारी एजेंसी फोन पर इस तरह की धमकी नहीं देती। अगर कोई व्यक्ति ईडी, सीबीआई या पुलिस के नाम पर पैसे मांगता है, तो तुरंत सतर्क होकर स्थानीय पुलिस या साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करें।

