O Romeo में छोटू बने हुसैन दलाल, विशाल भारद्वाज को मैसेज कर मिला रोल
फिल्म O Romeo में छोटू के किरदार से चर्चा में आए हुसैन दलाल। विशाल भारद्वाज को सीधे मैसेज भेजकर पाया रोल। शाहिद कपूर संग काम करने का सपना हुआ पूरा। थिएटर से फिल्म इंडस्ट्री तक के संघर्ष, सेट अनुभव और सीबीएफसी कट्स पर खुलकर बातचीत।
‘O Romeo’ में छोटू बन छाए हुसैन दलाल, विशाल भारद्वाज को मैसेज कर पाया रोल
विशाल भारद्वाज को भेजा मैसेज, बदल गई किस्मत
हुसैन बताते हैं कि वे आमतौर पर किसी डायरेक्टर को काम के लिए सीधे मैसेज नहीं करते। लेकिन जब उन्हें पता चला कि उनकी फेस्टिवल फिल्म The Underbug को विशाल भारद्वाज ने पसंद किया है, तो उन्होंने हिम्मत जुटाकर संदेश भेज दिया।
विशाल भारद्वाज ने शालीनता से जवाब दिया और उन्हें टेस्ट के लिए बुलाया गया। कुछ महीनों के इंतजार के बाद अचानक कॉल आया कि वे फिल्म के लिए चुन लिए गए हैं। हुसैन के लिए यह पल किसी सपने के सच होने जैसा था।
शाहिद कपूर संग काम करना रहा मास्टर क्लास
फिल्म में शाहिद कपूर के साथ काम करना हुसैन के लिए बेहद खास रहा। वे बताते हैं कि शाहिद न सिर्फ शानदार अभिनेता हैं, बल्कि टीम प्लेयर भी हैं।
एक सीन का जिक्र करते हुए हुसैन कहते हैं कि सड़क पर गुंडों से लड़ाई, फिर भावनात्मक बदलाव और डांस—इन सबको एक ही दिन-रात में शूट करना चुनौतीपूर्ण था। उस सीन में गुस्सा, आंसू, हंसी और डांस जैसे कई भाव एक साथ निभाने पड़े।
शाहिद ने रिहर्सल और कैरेक्टर ग्राफ समझने में उनकी काफी मदद की। हुसैन इसे अपने करियर की “मास्टर क्लास” बताते हैं।
‘मकबूल’ से शुरू हुआ सपना
हुसैन बताते हैं कि जब उन्होंने किशोरावस्था में मकबूल देखी थी, तभी से वे विशाल भारद्वाज के साथ काम करने का सपना देख रहे थे। करीब 20 साल बाद 2024 में उनका यह सपना पूरा हुआ।
सेट पर हर दिन उनके लिए सीखने का अवसर था—कैमरे के सामने की बारीकियां, सीन की तैयारी और भावनाओं की गहराई।
सीबीएफसी कट्स पर राय
फिल्म में कटिंग और बदलावों पर हुसैन का कहना है कि दर्शकों ने अनकट वर्जन नहीं देखा, लेकिन उन्हें ज्यादा फर्क नहीं पड़ता। उनके अनुसार कलाकार का काम ईमानदारी से निभाना सबसे अहम है।
थिएटर से फिल्म तक का सफर
हुसैन दलाल ने महज 15 साल की उम्र में थिएटर से अपने करियर की शुरुआत की। पिछले 20 वर्षों से वे थिएटर से जुड़े रहे हैं। उनका मानना है कि संघर्ष, धैर्य और कला के प्रति समर्पण ने उन्हें फिल्म इंडस्ट्री तक पहुंचाया।
वे कहते हैं कि रास्ता आसान नहीं था, लेकिन लगातार मेहनत और सीखने की इच्छा ने उन्हें आगे बढ़ाया। ‘ओ रोमियो’ उनके करियर का अहम पड़ाव बनकर सामने आई है।


