Investment 2026 : डेटा की तरह सस्ती होगी AI, भारत जुड़ेगा ‘इंटेलिजेंस एरा’ से
उन्होंने स्पष्ट कहा, “भारत इंटेलिजेंस किराये पर नहीं ले सकता।” जियो अब इंटरनेट युग के बाद देश को “इंटेलिजेंस एरा” से जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ेगा।
7 वर्षों में ₹10 लाख करोड़ का निवेश
अंबानी ने घोषणा की कि जियो और रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड अगले सात वर्षों में ₹10 लाख करोड़ का निवेश करेंगे।
यह निवेश मजबूत AI इंफ्रास्ट्रक्चर, डेटा सेंटर, कंप्यूटिंग क्षमता और डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार करने में लगाया जाएगा, ताकि आने वाले दशकों में भारत की आर्थिक मजबूती सुनिश्चित की जा सके।
जामनगर में गीगावॉट-स्केल AI डेटा सेंटर
यह पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर 100% ग्रीन एनर्जी पर आधारित होगा। जियो अपने नेटवर्क के जरिए देशभर में कंप्यूट क्षमता उपलब्ध कराएगा, जिससे AI सेवाएं कम लागत और तेज गति से स्कूलों, अस्पतालों, दुकानों और खेतों तक पहुंच सकें।
शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि के लिए AI प्लेटफॉर्म
अंबानी ने कई सेक्टर-विशिष्ट AI प्लेटफॉर्म लॉन्च करने की घोषणा की:
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जियो शिक्षा AI – छात्रों और शिक्षकों के लिए बहुभाषी स्मार्ट लर्निंग
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जियो आरोग्य AI – स्वास्थ्य सेवाओं में डिजिटल सहायता
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जियो कृषि – किसानों के लिए स्थानीय भाषा में सलाह
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जियो भारत IQ – आम नागरिकों के लिए AI आधारित उपयोगी सेवाएं
उन्होंने कहा कि जियो AI भारतीय भाषाओं में काम करेगा, ताकि किसान, युवा, छात्र और छोटे व्यवसायी अपनी भाषा में इसका लाभ उठा सकें।
AI और ‘विकसित भारत 2047’ का विज़न
अंबानी ने अपने संबोधन की शुरुआत में नरेंद्र मोदी के विकसित भारत 2047 के विज़न की सराहना की। उन्होंने कहा कि AI-आधारित विकास भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को नई गति देगा।
उनके अनुसार यह मॉडल ग्लोबल साउथ के देशों के लिए भी प्रेरक साबित हो सकता है।
“AI नौकरियां नहीं छीनेंगा”
AI को लेकर उठ रही चिंताओं पर अंबानी ने कहा कि एआई हर यंत्र को तेज, बेहतर और स्मार्ट तरीके से काम करने की शक्ति देता है। उन्होंने AI को “आधुनिक अक्षय पात्र” बताया, जो अंतहीन अवसर और पोषण प्रदान कर सकता है।
उन्होंने विश्वास जताया कि AI नौकरियां नहीं छीनेगा, बल्कि उच्च कौशल वाले नए अवसर पैदा करेगा।
कनेक्टिविटी के बाद अब AI राष्ट्रीय इंफ्रास्ट्रक्चर
जियो ने कनेक्टिविटी के क्षेत्र में जो बदलाव किया, उसी मॉडल को अब AI में दोहराने की तैयारी है।
घोषणाओं से साफ है कि कंपनी AI को अगला राष्ट्रीय इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। आने वाले वर्षों में यह पहल भारत को वैश्विक AI प्रतिस्पर्धा में किस स्थान पर पहुंचाती है, यह देखना दिलचस्प होगा।