मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय का 33 वां दीक्षान्त समारोह, शिक्षा से गरीबी दूर, विद्यार्थी सत्य व मानवता के मार्ग पर चलें : राज्यपाल
मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के 33वें दीक्षांत समारोह में राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने शिक्षा को गरीबी उन्मूलन का मूल मंत्र बताया। 255 शोधार्थियों को PhD व 109 को स्वर्ण पदक मिले। समारोह में गुलाबचंद कटारिया, प्रेमचंद बैरवा सहित गणमान्य उपस्थित रहे।
मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय का 33 वां दीक्षान्त समारोह :
राज्यपाल ने दीक्षांत में शिक्षा को गरीबी उन्मूलन का आधार बताया

उदयपुर के आरएनटी मेडिकल कॉलेज सभागार में आयोजित मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के 33वें दीक्षान्त समारोह में राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्री हरिभाऊ बागडे ने शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन और गरीबी उन्मूलन का प्रमुख साधन बताया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी सदैव सत्य, धर्म और मानवता के मार्ग पर चलते हुए समाज की भलाई के लिए कार्य करें। उन्होंने प्राचीन गुरु-शिष्य परंपरा का स्मरण करते हुए कहा कि तब छात्र का निरंतर मूल्यांकन संभव था, आज भी शिक्षा में संस्कारों का समावेश आवश्यक है।
जनजातीय क्षेत्रों में उच्च शिक्षा को बढ़ावा देना जरूरी
राज्यपाल ने चिंता जताते हुए कहा कि जनजाति क्षेत्रों में उच्च शिक्षा ग्रहण करने वालों की संख्या अभी भी कम है। उन्होंने जोर देकर कहा कि परिवार में एक व्यक्ति के शिक्षित होकर रोजगार प्राप्त करने से पूरी पीढ़ी का भविष्य बदल सकता है। गरीबी दूर करने का एकमात्र रास्ता शिक्षा है, इसलिए वंचित वर्गों को शिक्षा से जोड़ने के लिए विशेष प्रयास किए जाने चाहिए।
255 शोधार्थियों को PhD, 109 विद्यार्थियों को मिले स्वर्ण पदक

इस ऐतिहासिक समारोह में विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों के 255 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई। साथ ही, 109 मेधावी विद्यार्थियों को उनकी शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए स्वर्ण पदकों से सम्मानित किया गया। राज्यपाल श्री बागडे ने व्यक्तिगत रूप से इन उपाधियों और पदकों का वितरण किया।
मेवाड़ की वीर परंपरा और आधुनिक शिक्षा का समन्वय

राज्यपाल ने मेवाड़ की शूरवीरता और संस्कारों की समृद्ध परंपरा को याद करते हुए कहा कि शिक्षा में जीवन के सभी आयामों का समावेश होना चाहिए। बच्चों की शारीरिक एवं बौद्धिक क्षमता के विकास को शिक्षा का मूल उद्देश्य बताया। उन्होंने विश्वविद्यालयों से देश-दुनिया की शीर्ष रैंकिंग में स्थान बनाने के लिए निरंतर प्रयास करने का आह्वान किया।
पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया ने गुरु के महत्व पर जोर दिया
दीक्षान्त समारोह के मुख्य अतिथि एवं पंजाब के राज्यपाल श्री गुलाबचंद कटारिया ने अपने दीक्षान्त संबोधन में कहा कि यह केवल डिग्री वितरण का कार्यक्रम नहीं, बल्कि शिक्षक, अभिभावक और संस्था के सामूहिक समर्पण का प्रतिफल है। उन्होंने गुरु की कृपा को जीवन की प्रगति का आधार बताया और कहा कि मानव सभ्यता जब तक है, गुरु का सम्मान बना रहेगा। उन्होंने खासतौर पर इस बात की सराहना की कि इस वर्ष अधिकांश स्वर्ण पदक और पीएचडी उपाधियाँ बालिकाओं ने प्राप्त की हैं, जो समाज की प्रगतिशील दिशा का संकेत है।
उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने राज्य सरकार के प्रयासों से अवगत कराया
प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने समारोह को संबोधित करते हुए बताया कि राज्य सरकार उच्च शिक्षा के स्तर को ऊपर उठाने के लिए दृढ़संकल्पित है। नीतिगत निर्णयों के माध्यम से शिक्षा में मात्रात्मक और गुणात्मक सुधार सुनिश्चित किए जा रहे हैं। साधनों के अभाव को दूर करने के लिए भी सरकार प्रतिबद्ध है।
राज्यमंत्री प्रो. मंजू बाघमार ने नवीन ज्ञान को सच्ची शिक्षा बताया

सार्वजनिक निर्माण, महिला एवं बाल विकास विभाग की राज्यमंत्री प्रो. मंजू बाघमार ने कहा कि दीक्षान्त ज्ञान की यात्रा का एक पड़ाव मात्र है। बदलते समय के साथ स्वयं को अपडेट रखना और ज्ञान को नवीन बनाए रखना ही सच्ची शिक्षा है। उन्होंने कहा कि भारत आज युवा शक्ति का देश है और इस शक्ति को शिक्षा के माध्यम से सही दिशा देना राष्ट्रनिर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देगा।
कुलगुरु प्रो. बी.पी. सारस्वत ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियाँ साझा कीं
समारोह की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. बी.पी. सारस्वत ने स्वागत भाषण में विश्वविद्यालय की वर्ष भर की शैक्षणिक, शोध और प्रशासनिक उपलब्धियों का विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। उन्होंने सभी डिग्रीधारकों को भविष्य के लिए शुभकामनाएँ दीं और शिक्षकों, कर्मचारियों तथा अभिभावकों के योगदान को सराहा।
इस प्रकार, मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय का 33वाँ दीक्षान्त समारोह शिक्षा के सामाजिक दायित्व, गुणवत्तापूर्ण शोध और समावेशी विकास के संदेश के साथ संपन्न हुआ।

