Maharashtra Budget Session 2026 : पहली बार बिना नेता प्रतिपक्ष दोनों सदन, 6 मार्च को फडणवीस पेश करेंगे बजट
Maharashtra Budget Session 2026 : महाराष्ट्र विधानसभा का बजट सत्र 24 फरवरी से शुरू। राज्य के इतिहास में पहली बार विधानसभा और विधान परिषद दोनों में नेता प्रतिपक्ष नहीं। 6 मार्च को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस 2026-27 का बजट पेश करेंगे। विपक्ष ने इसे लोकतंत्र के लिए खतरा बताया।
Maharashtra Budget Session 2026 : पहली बार दोनों सदनों में नहीं होगा नेता प्रतिपक्ष
Maharashtra विधानसभा का बजट सत्र सोमवार से शुरू हो रहा है। राज्य के इतिहास में यह पहला मौका है, जब विधानसभा और विधान परिषद दोनों में ही नेता प्रतिपक्ष (LoP) नहीं होगा।
2024 के विधानसभा चुनावों के बाद से यह पद खाली है, क्योंकि किसी भी विपक्षी दल ने 10% विधायकों की अनिवार्य संख्या पार नहीं की।
6 मार्च को पेश होगा 2026-27 का बजट
पहले यह बजट अजित पवार द्वारा पेश किया जाना था, लेकिन 28 जनवरी को बारामती में हुए विमान हादसे में उनके निधन के बाद यह जिम्मेदारी बदल गई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बजट की पूरी तैयारी पहले ही हो चुकी थी और वे इसे सदन में प्रस्तुत करेंगे।
विपक्ष का आरोप: लोकतंत्र पर असर
विपक्षी गठबंधन महा विकास अघाड़ी (MVA) ने बिना नेता प्रतिपक्ष के सदन चलाने को लोकतांत्रिक संतुलन के लिए खतरा बताया है।
Sanjay Raut ने LoP पद न दिए जाने को “लोकतंत्र पर धब्बा” करार दिया। उनका कहना है कि विपक्ष की संवैधानिक भूमिका को कमजोर किया जा रहा है।
शिवसेना (UBT) के विधायक भास्कर जाधव ने दावा किया कि पहले सिंगल डिजिट विधायकों वाली पार्टियों को भी यह पद मिला है, जबकि उनकी पार्टी के 20 विधायक होने के बावजूद पद नहीं दिया गया।
क्यों बिगड़ा LoP का गणित?
दिवंगत कांग्रेस सांसद राजीव साटव की पत्नी प्रज्ञा साटव ने 18 दिसंबर को मुख्यमंत्री फडणवीस की मौजूदगी में भाजपा जॉइन करने से पहले इस्तीफा दिया।
उनके इस्तीफे से पहले परिषद में कांग्रेस के 8 सदस्य थे, जो 10% की सीमा पूरी करने के करीब थे। इस्तीफे के बाद संख्या घटकर 7 रह गई और पार्टी का दावा खत्म हो गया।
कांग्रेस ने वरिष्ठ नेता सतेज पाटिल को LoP पद के लिए नामित किया था, लेकिन संख्या पूरी न होने से यह संभव नहीं हो पाया।
10% नियम क्या कहता है?
नेता प्रतिपक्ष की मान्यता के लिए संबंधित सदन में कुल सदस्यों का कम से कम 10% समर्थन जरूरी होता है।
2024 के चुनावों के बाद विपक्षी दल इस आंकड़े तक नहीं पहुंच सके। भाजपा नेतृत्व वाली महायुति को भारी बहुमत मिलने से विपक्ष कमजोर स्थिति में है।
ऐतिहासिक संदर्भ
महाराष्ट्र के राजनीतिक इतिहास में अब तक ऐसा नहीं हुआ था कि दोनों सदनों में एक साथ नेता प्रतिपक्ष का पद खाली रहे।
विशेषज्ञों का मानना है कि LoP की अनुपस्थिति से विधायी बहस और सरकारी फैसलों की समीक्षा की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। हालांकि सरकार का कहना है कि सदन की कार्यवाही नियमों के अनुसार चलेगी।
आगे क्या?
बजट सत्र में राज्य की वित्तीय दिशा, कल्याणकारी योजनाएं और विकास परियोजनाएं प्रमुख मुद्दे रहेंगे।
अब सभी की नजरें 6 मार्च पर टिकी हैं, जब मुख्यमंत्री फडणवीस बजट पेश करेंगे।
वहीं विपक्ष इस मुद्दे को सत्र के दौरान जोर-शोर से उठाने की तैयारी में है, जिससे सदन में तीखी बहस की संभावना है।
निष्कर्ष
महाराष्ट्र के बजट सत्र की शुरुआत एक अनोखी परिस्थिति में हो रही है—दोनों सदनों में नेता प्रतिपक्ष का अभाव। यह स्थिति राजनीतिक और संवैधानिक बहस को जन्म दे रही है।
एक ओर सरकार अपने बहुमत के साथ बजट पेश करने को तैयार है, वहीं विपक्ष लोकतांत्रिक संतुलन की मांग कर रहा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राज्य की राजनीति का केंद्र बना रहेगा।




