Mahakal की संध्या-शयन आरती के लिए भी अब लगेगा शुल्क, ऑनलाइन बुकिंग अनिवार्य
अब दोनों आरतियों में शामिल होने के लिए श्रद्धालुओं को प्रति व्यक्ति 250-250 रुपए का भुगतान कर ऑनलाइन बुकिंग करानी होगी। बिना शुल्क वाले भक्त केवल चलित (लाइन से चलते-चलते) दर्शन कर सकेंगे।
भीड़ प्रबंधन के लिए लिया गया फैसला
मंदिर समिति के अनुसार संध्या और शयन आरती में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़ते हैं। बढ़ती भीड़ को व्यवस्थित करने और अव्यवस्था से बचने के लिए यह निर्णय लिया गया है।
अब आरती में बैठकर दर्शन करने के इच्छुक श्रद्धालुओं को केवल अधिकृत वेबसाइट के माध्यम से ही ऑनलाइन बुकिंग करनी होगी। काउंटर से ऑफलाइन बुकिंग की सुविधा उपलब्ध नहीं रहेगी।
250 रुपए में शीघ्र दर्शन सुविधा
मंदिर समिति पहले से ही भस्मारती के ऑनलाइन प्रवेश के लिए 200 रुपए शुल्क ले रही है। इसके अलावा शीघ्र दर्शन (वीआईपी लाइन) के लिए प्रति व्यक्ति 250 रुपए शुल्क निर्धारित है।
प्रतिदिन लगभग 1200 श्रद्धालुओं को ऑनलाइन भस्मारती प्रवेश की अनुमति दी जाती है। इसके अतिरिक्त विभिन्न पूजन-विधियों के लिए अलग-अलग शुल्क निर्धारित है।
सामान्य कतार के अलावा वीआईपी लाइन से दर्शन की सुविधा भी उपलब्ध है, जिसमें ऑनलाइन या काउंटर से 250 रुपए जमा कर रसीद के आधार पर प्रवेश दिया जाता है।
फ्री दर्शन वाले श्रद्धालुओं के लिए क्या व्यवस्था?
नई व्यवस्था के तहत जो श्रद्धालु संध्या या शयन आरती के लिए शुल्क नहीं देंगे, उन्हें सामान्य लाइन से चलते-चलते दर्शन करने होंगे। वे आरती स्थल पर बैठकर दर्शन नहीं कर सकेंगे।
मंदिर प्रशासन का कहना है कि इससे भीड़ नियंत्रित होगी और सुरक्षा व्यवस्था बेहतर होगी।
गर्भगृह प्रवेश अब भी बंद
महाकाल मंदिर में पहले श्रद्धालु 1500 रुपए शुल्क देकर गर्भगृह में प्रवेश कर सकते थे। लेकिन 4 जुलाई 2023 को सावन के दौरान अत्यधिक भीड़ को देखते हुए गर्भगृह प्रवेश को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया था।
तब आश्वासन दिया गया था कि सावन के बाद व्यवस्था सामान्य होते ही गर्भगृह प्रवेश फिर शुरू किया जाएगा। हालांकि ढाई वर्ष बीत जाने के बाद भी आम श्रद्धालुओं के लिए गर्भगृह प्रवेश शुरू नहीं हुआ है।
श्रद्धालुओं की प्रतिक्रिया
नई व्यवस्था को लेकर श्रद्धालुओं की मिली-जुली प्रतिक्रिया सामने आ रही है। कुछ भक्त इसे भीड़ प्रबंधन के लिए जरूरी कदम मान रहे हैं, तो कुछ इसे धार्मिक आस्था से जुड़ी गतिविधियों पर शुल्क लगाने के रूप में देख रहे हैं।
उज्जैन में महाकाल मंदिर देश-विदेश के लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। ऐसे में आरती व्यवस्था में किया गया यह बदलाव आने वाले समय में दर्शन व्यवस्था को किस दिशा में ले जाएगा, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।