KK Vishnoi Attack On Cogress : मंत्री केके विश्नोई का कांग्रेस पर पलटवार, फ्रेंच कंपनी जमीन विवाद पर सरकार का जवाब
KK Vishnoi Attack On Cogress : फ्रांस की कंपनी सॉफ्लेट माल्ट इंडिया को जमीन देने में देरी के आरोपों पर उद्योग राज्यमंत्री केके विश्नोई ने कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि 2019-20 में कांग्रेस सरकार ने जमीन नहीं दी थी, जबकि वर्तमान सरकार निवेश बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है और प्रक्रिया जारी है।
KK Vishnoi Attack On Cogress :फ्रेंच कंपनी जमीन विवाद पर सरकार ने दी सफाई
राजस्थान में फ्रांस की कंपनी को इंडस्ट्री लगाने के लिए जमीन देने में देरी के मामले ने सियासी माहौल गरमा दिया है। इस मुद्दे पर विपक्ष और सरकार के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। फ्रांसीसी राजदूत की ओर से लिखी गई चिट्ठी के बाद कांग्रेस नेताओं ने सरकार की निवेश नीति और राइजिंग राजस्थान कार्यक्रम पर सवाल उठाए थे।
इन आरोपों के जवाब में उद्योग राज्यमंत्री केके विश्नोई ने कांग्रेस पर तीखा पलटवार करते हुए कहा कि विपक्ष अधूरी जानकारी के आधार पर भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संबंधित फ्रांसीसी कंपनी ने पहले भी कांग्रेस सरकार के दौरान जमीन की मांग की थी, लेकिन उस समय उन्हें जमीन उपलब्ध नहीं कराई गई थी।
कांग्रेस के आरोपों पर मंत्री का जवाब
मंत्री केके विश्नोई ने कहा कि विपक्ष जिस मुद्दे पर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है, उसकी पूरी जानकारी उन्हें खुद नहीं है। उन्होंने बताया कि फ्रांस की कंपनी सॉफ्लेट माल्ट ने वर्ष 2019-20 में कांग्रेस सरकार के समय राजस्थान में इंडस्ट्री लगाने के लिए जमीन मांगी थी, लेकिन उस समय सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में निवेश को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं और उद्योग क्षेत्र में सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं।

राइजिंग राजस्थान के तहत बड़े निवेश का दावा
मंत्री विश्नोई ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा शुरू किए गए राइजिंग राजस्थान कार्यक्रम के तहत अब तक करीब 35 लाख करोड़ रुपये के समझौता ज्ञापन (MOU) किए जा चुके हैं।
उनके अनुसार, इनमें से लगभग 8 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव जमीन पर भी उतर चुके हैं। उन्होंने कहा कि यह आंकड़े इस बात का प्रमाण हैं कि राजस्थान औद्योगिक विकास के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
मंत्री ने कांग्रेस नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि जो काम पिछली सरकार अपने कार्यकाल में नहीं कर सकी, वह वर्तमान सरकार के आने के बाद तेजी से किया जा रहा है।
फ्रांसीसी राजदूत की चिट्ठी पर मंत्री की प्रतिक्रिया
फ्रांस के राजदूत द्वारा मुख्यमंत्री को लिखी गई चिट्ठी पर प्रतिक्रिया देते हुए मंत्री ने कहा कि यह विषय पहले से ही प्रक्रियाधीन था।
उन्होंने कहा कि जानकारी के अभाव में राजदूत ने यह पत्र लिखा, जबकि जमीन आवंटन की प्रक्रिया लगातार चल रही थी।
मंत्री के अनुसार, 20 मार्च को फ्रेंच दूतावास की ओर से मुख्यमंत्री को पत्र भेजा गया था, जिसमें कंपनी को हो रही कठिनाइयों का उल्लेख किया गया था।
उन्होंने कहा कि सरकार इस मामले को गंभीरता से ले रही है और कंपनी को जमीन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को प्राथमिकता दी जा रही है।
जमीन आवंटन की पूरी प्रक्रिया का विवरण
मंत्री केके विश्नोई ने बताया कि कंपनी के साथ जमीन आवंटन की प्रक्रिया कई चरणों में पूरी की जा रही है।
- 17 जुलाई 2025: कंपनी के साथ MOU किया गया
- 21 जुलाई 2025: बूंदी में जमीन का प्रस्ताव दिया गया
- 19 नवंबर 2025: कोटा में जमीन का विकल्प बताया गया
- 20 फरवरी 2026: कंपनी ने विकसित जमीन की मांग की
- 8 मार्च 2026: कंपनी ने अर्द्ध विकसित जमीन लेने की इच्छा जताई
- 9 मार्च 2026: जमीन की अंतिम जरूरत स्पष्ट हुई
उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया के तहत कंपनी को बूंदी और कोटा दोनों स्थानों पर जमीन दिखाई गई थी और उनकी आवश्यकताओं के अनुसार विकल्प उपलब्ध कराए गए।
पानी की उपलब्धता भी बनी अहम शर्त
मंत्री ने बताया कि कंपनी ने इंडस्ट्री लगाने के लिए 700 KLD पानी की उपलब्धता वाली जमीन की मांग की थी।
इसके बाद संबंधित विभागों ने इस शर्त को ध्यान में रखते हुए जमीन की तलाश और प्रस्ताव की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया।
उन्होंने कहा कि सरकार निवेशकों की सभी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए निर्णय ले रही है, ताकि उद्योग स्थापित होने में कोई बाधा न आए।
कांग्रेस ने सरकार पर लगाए थे गंभीर आरोप
इस पूरे मामले में कांग्रेस नेताओं ने सरकार की निवेश नीति पर सवाल उठाए थे।
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने सोशल मीडिया पर लिखा था कि यदि मुख्यमंत्री स्तर पर बातचीत के बाद भी निवेश जमीन पर नहीं उतर रहा है, तो यह सिस्टम की कार्यशैली पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।
उन्होंने यह भी कहा कि विदेशी निवेशकों को जमीन के लिए भटकना पड़ रहा है, जो राज्य की निवेश नीति की कमजोरियों को दर्शाता है।
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भी उठाए सवाल
वहीं नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने फ्रांसीसी राजदूत की चिट्ठी को गंभीर बताते हुए सरकार पर आरोप लगाए थे कि राज्य सरकार केवल राइजिंग राजस्थान के नाम पर प्रचार कर रही है, जबकि निवेशकों को आवश्यक सहयोग नहीं मिल रहा है।
उन्होंने कहा कि यदि निवेशकों को जमीन मिलने में देरी हो रही है, तो इससे राज्य की छवि पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है और निवेशक दूसरे राज्यों की ओर रुख कर सकते हैं।
सरकार का दावा—निवेशकों को मिल रही पूरी मदद
मंत्री केके विश्नोई ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार निवेशकों को हर संभव सहायता प्रदान कर रही है।
उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य राजस्थान को उद्योग और निवेश के लिए आकर्षक राज्य बनाना है।
सरकार का दावा है कि नई औद्योगिक नीतियों और निवेश कार्यक्रमों के माध्यम से राज्य में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और आर्थिक विकास को गति मिलेगी।
निष्कर्ष
फ्रांस की कंपनी को जमीन देने में देरी के मुद्दे पर राजस्थान में सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। जहां कांग्रेस सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रही है, वहीं सरकार का कहना है कि जमीन आवंटन की प्रक्रिया नियमित रूप से चल रही है और निवेशकों को हर संभव सहयोग दिया जा रहा है।
आने वाले समय में इस मामले का समाधान और उद्योग स्थापना की प्रक्रिया राज्य की निवेश नीति और औद्योगिक विकास की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

