Literature Festival : कविता से नॉवल तक की यात्रा, जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में इच्छा मृत्यु का लोकार्पण भव्य साहित्यिक
Literature Festival : जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में आयोजित “पोएट्री – खुद से बात” सत्र में लेखिका अंशु हर्ष के पहले नॉवल ‘इच्छा मृत्यु’ का लोकार्पण हुआ। कविता से नॉवल तक की उनकी रचनात्मक यात्रा, अनुवाद, आत्मसंवाद और सामाजिक सरोकारों पर गहन चर्चा हुई।
Literature Festival : कविता से नॉवल तक की यात्रा: ‘इच्छा मृत्यु’ का लोकार्पण
जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में साहित्यिक संवाद का जीवंत मंच
जयपुर, 15 जनवरी। विश्वप्रसिद्ध जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल (JLF) के पहले दिन साहित्य, विचार और रचनात्मक संवाद का एक यादगार सत्र आयोजित किया गया। अनिल अग्रवाल फाउंडेशन के बागान वेन्यू में हुए इस सत्र का शीर्षक था— “पोएट्री – खुद से बात”। यह सत्र न केवल कविता और गद्य के रचनात्मक अंतर को समझने का अवसर बना, बल्कि लेखिका, कवयित्री और प्रकाशक अंशु हर्ष के पहले नॉवल “इच्छा मृत्यु” के लोकार्पण का भी साक्षी रहा।
‘पोएट्री – खुद से बात’: आत्मसंवाद का साहित्यिक अर्थ
इस सत्र में कवि एवं पीआर एक्सपर्ट जगदीप सिंह ने अंशु हर्ष से उनके साहित्यिक सफ़र, लेखन प्रक्रिया और रचनात्मक विकास पर आत्मीय संवाद किया। बातचीत का केंद्रीय भाव कविता को आत्मसंवाद के रूप में देखना था। अंशु हर्ष ने स्पष्ट किया कि कविता लिखना अपने भीतर उतरने की प्रक्रिया है, जहाँ लेखक स्वयं से सवाल करता है और जवाब भी खोजता है।
उनके अनुसार,
“कविता लिखना खुद से बात करना होता है। यह साहस की मांग करता है, क्योंकि इसमें लेखक अपनी भीतरी सच्चाइयों से रूबरू होता है।”
कविता से नॉवल तक: रचनात्मक यात्रा का विस्तार
संवाद के दौरान जगदीप सिंह ने अंशु हर्ष से कविता से नॉवल तक की उनकी यात्रा को लेकर सवाल किया। इस पर अंशु हर्ष ने कहा कि कविता भावनाओं की तात्कालिक और संक्षिप्त अभिव्यक्ति होती है, जबकि नॉवल एक लंबी, धैर्यपूर्ण और गहन रचनात्मक प्रक्रिया है।
उन्होंने बताया कि नॉवल लिखते समय लेखक को पात्रों के साथ लंबे समय तक जीना पड़ता है। पात्रों के दुख, संघर्ष, संवाद और मानसिक स्थितियाँ लेखक के जीवन का हिस्सा बन जाती हैं। यही कारण है कि नॉवल लेखन भावनात्मक रूप से अधिक चुनौतीपूर्ण होता है।
‘इच्छा मृत्यु’: जीवन और मृत्यु के बीच का संघर्ष
अंशु हर्ष का पहला नॉवल “इच्छा मृत्यु” जीवन और मृत्यु के बीच के गहरे संघर्ष की कहानी है। यह कृति केवल एक कथा नहीं, बल्कि मानवीय इच्छाओं, पीड़ा, निर्णय और अस्तित्व से जुड़े सवालों को उठाती है। लेखिका के अनुसार यह नॉवल पाठकों को भीतर तक सोचने के लिए प्रेरित करेगा और उन्हें अपने जीवन को नए दृष्टिकोण से देखने का अवसर देगा।
वाणी प्रकाशन द्वारा प्रकाशित, माला श्री लाल ने किया विमोचन
“इच्छा मृत्यु” को हिंदी साहित्य की प्रतिष्ठित संस्था वाणी प्रकाशन ने प्रकाशित किया है। पुस्तक का लोकार्पण वरिष्ठ लेखिका एवं अनुवादक माला श्री लाल द्वारा किया गया। उन्होंने इस अवसर पर कहा कि अंशु हर्ष की लेखनी में संवेदना, वैचारिक स्पष्टता और मानवीय दृष्टि का सुंदर संतुलन दिखाई देता है।
अनुवाद और साहित्य की सीमाओं का विस्तार
सत्र के दौरान अंशु हर्ष ने अपनी कविता-संग्रह “समंदर – दी ओशन” में शामिल कविताओं के अंग्रेज़ी अनुवाद पर भी बात की। उन्होंने कहा कि अनुवाद साहित्य को भाषाई सीमाओं से बाहर ले जाने का सशक्त माध्यम है। एक अच्छा अनुवाद मूल रचना की आत्मा को सुरक्षित रखते हुए उसे नए पाठकों और संस्कृतियों तक पहुँचाता है।
उनका मानना है कि अनुवाद केवल भाषा परिवर्तन नहीं, बल्कि सांस्कृतिक संवाद की प्रक्रिया है।
लेखन में समय और अनुभव की भूमिका
2013 में प्रकाशित अपनी पहली पुस्तक से लेकर अब तक के सफ़र को याद करते हुए अंशु हर्ष ने कहा कि समय और जीवन-अनुभव ने उनके लेखन को अधिक परिपक्व बनाया है। शुरुआती दौर में उनका लेखन अधिक व्यक्तिगत था, जबकि अब उसमें सामाजिक सरोकार, मानवीय पीड़ा और व्यापक दृष्टिकोण अधिक गहराई से शामिल हो गया है।
कविता, पाठक और संवेदना का संबंध
“पोएट्री – खुद से बात” सत्र का एक महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि कविता को केवल साहित्यिक विधा नहीं, बल्कि संवेदनात्मक अनुभव के रूप में देखा गया। अंशु हर्ष ने कहा कि कविता लेखक और पाठक के बीच एक भावनात्मक सेतु बनाती है, जहाँ दोनों अपने-अपने अनुभवों के साथ रचना से जुड़ते हैं।
साहित्यप्रेमियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी
जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के पहले दिन आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी, लेखक, विद्यार्थी और पाठक उपस्थित रहे। सत्र को श्रोताओं की भरपूर सराहना मिली और “इच्छा मृत्यु” के लोकार्पण ने साहित्यिक वातावरण को और भी समृद्ध बना दिया।
निष्कर्ष
“कविता से नॉवल तक की यात्रा” केवल एक लेखक की रचनात्मक कहानी नहीं, बल्कि हिंदी साहित्य के बदलते स्वरूप और गहराते सरोकारों की झलक है। जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में आयोजित यह सत्र साहित्य, आत्मसंवाद और मानवीय संवेदना का एक सार्थक उत्सव बनकर उभरा।


