आर्टिस्ट स्वाति कौशिक की गैलरी ऑफ़ डोरो में समकालीन अफ़ोर्डेबल आर्ट प्रदर्शनी का जयपुर में उद्घाटन
जयपुर में आर्टिस्ट स्वाति कौशिक की गैलरी ऑफ़ डोरो में देशभर के 6 कलाकारों की 30 कलाकृतियों के साथ पहली समकालीन अफ़ोर्डेबल आर्ट प्रदर्शनी का उद्घाटन हुआ। गैलरी ने सुगम कला, संवादपरक अनुभव और उच्च गुणवत्ता की किफायती समकालीन कला दर्शकों के लिए प्रस्तुत की।
जयपुर में आर्टिस्ट स्वाति कौशिक की गैलरी ऑफ़ डोरो का उद्घाटन
जयपुर : गुलाबी नगरी के जीवंत कला परिदृश्य में रविवार को गैलरी ऑफ़ डोरो ने अपने द्वार खोले। यह गैलरी अपनी पहली समकालीन अफ़ोर्डेबल आर्ट प्रदर्शनी के माध्यम से कला प्रेमियों के लिए एक नए सांस्कृतिक केंद्र के रूप में उभरी।
गैलरी का उद्देश्य उच्च गुणवत्ता की समकालीन कलाकृतियों को दर्शकों तक सुलभ और किफायती रूप में पहुँचाना है। यह पहल विशेष रूप से उन दर्शकों के लिए महत्वपूर्ण है, जो समकालीन कला का अनुभव लेना चाहते हैं लेकिन इसे समझने या खरीदने में कठिनाई महसूस करते हैं।
स्वाति कौशिक की पहल और गैलरी का उद्देश्य
गैलरी की स्थापना प्रसिद्ध वरिष्ठ कलाकार और समकालीन कला संरक्षक स्वाति कौशिक ने की है। उन्होंने गैलरी को एक समावेशी और संवादपरक मंच के रूप में प्रस्तुत किया, जिससे कला और दर्शकों के बीच की दूरी कम हो।
स्वाति कौशिक के अनुसार, गैलरी का उद्देश्य न केवल कला का प्रदर्शन करना है, बल्कि दर्शकों को कला से जुड़ने और संवाद करने का अवसर भी प्रदान करना है। इस पहल से कलाकारों और कला प्रेमियों के बीच एक मजबूत नेटवर्क तैयार होगा।
उद्घाटन प्रदर्शनी में कलाकार और कलाकृतियां
उद्घाटन प्रदर्शनी में देशभर से 6 कलाकारों की लगभग 30 कलाकृतियां प्रदर्शित की गईं। प्रदर्शनी में शैलियों, विषयों और दृश्य भाषाओं की विविधता देखने को मिली।
उद्घाटन प्रदर्शनी में देश के विभिन्न हिस्सों से आए कलाकारों के कार्य प्रदर्शित किए गए, जिनमें शैलियों, विषयों और दृश्य भाषाओं की विविधता देखने को मिली। एक्रिलिक माध्यम में बनी इन सभी कृतियों में अमूर्त अभिव्यक्तियां, फिगरेटिव कथाएं, क्षेत्रीय परंपराएं और शहरी संवेदनाएं प्रस्तुत की गई। प्रदर्शनी में भाग लेने वाले कलाकारों में जयपुर से अमित कल्ला, श्रिकांत रानगा, महाराष्ट्र पुणे से मनोज दरेकर, झारखंड से सी. आर. हेम्ब्रम, कोलकाता से सोमन शाह तथा जयपुर के मनवेंद्र सिंह की राजस्थानी पारंपरिक चित्रशैली शामिल रही।
भाग लेने वाले प्रमुख कलाकार:
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जयपुर: अमित कल्ला, श्रिकांत रानगा, मनवेंद्र सिंह (राजस्थानी पारंपरिक चित्रशैली)
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महाराष्ट्र, पुणे: मनोज दरेकर
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झारखंड: सी.आर. हेम्ब्रम
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कोलकाता: सोमन शाह
कलाकृतियों में अमूर्त अभिव्यक्तियां, फिगरेटिव कथाएं, क्षेत्रीय परंपराएं और शहरी संवेदनाएं स्पष्ट रूप से देखने को मिलीं। एक्रिलिक माध्यम में बनी इन कृतियों ने दर्शकों को एक स्मार्ट और संवादपरक अनुभव प्रदान किया।
क्यूरेशन और आर्ट क्यूरेटर का योगदान
प्रदर्शनी का क्यूरेशन हैम राणा ने किया। उनकी शोधपरक और संवेदनशील दृष्टि ने प्रत्येक कलाकृति की विशिष्टता और सांस्कृतिक गहराई को उजागर किया।
क्यूरेटर हेम राणा ने बताया कि गैलरी का उद्देश्य दर्शकों को कलाकृतियों के पीछे की कहानी समझाना और कलाकारों के दृष्टिकोण को उजागर करना है। इससे कलाकार और दर्शक दोनों के बीच एक संवाद उत्पन्न होता है।
कला प्रेमियों और सांस्कृतिक जगत की उपस्थिति
प्रदर्शनी में कला प्रेमियों, संग्राहकों, कला समीक्षकों और सांस्कृतिक जगत से जुड़े लोगों ने भाग लिया। उपस्थित लोगों ने कलाकारों से संवाद किया और एक आत्मीय और संवादपरक माहौल में समकालीन कला का अनुभव लिया।
स्थानीय मीडिया और सामाजिक मंचों पर भी इस उद्घाटन की काफी चर्चा हुई, जिससे गैलरी को जल्द ही जयपुर की प्रमुख कला गैलरी के रूप में पहचान मिलने की संभावना बढ़ गई।
समापन और भविष्य की योजनाएं
गैलरी ऑफ़ डोरो ने जयपुर के कला दृश्य में एक नया रंग भरते हुए समकालीन और अफ़ोर्डेबल कला के लिए मंच प्रदान किया है। भविष्य में गैलरी में और भी कई कार्यशालाएं, क्यूरेटेड प्रदर्शनी और कलाकार-डिस्कशन आयोजित किए जाएंगे।
स्वाति कौशिक का मानना है कि इस पहल से न केवल कलाकारों को अवसर मिलेगा, बल्कि दर्शकों को कला से जुड़ने और सीखने का अवसर भी मिलेगा।
गैलरी ऑफ़ डोरो अब जयपुर के कला प्रेमियों के लिए सुगम कला, नवाचार और सांस्कृतिक संवाद का केंद्र बन चुकी है।





