Jaipur | Art Week : जयपुर आर्ट वीक में कला, प्रकृति और स्मृतियों का संगम बना शहर सांस्कृतिक उत्सव केंद्र
Art Week : जयपुर आर्ट वीक के तहत वॉक, वर्कशॉप, सार्वजनिक कला और अनुभवात्मक आयोजनों ने राजधानी को जीवंत कला–शहर में बदला। प्रकृति, स्मृति, ध्वनि, शिल्प और समुदाय से जुड़े कार्यक्रमों ने कला को गैलरियों से निकालकर आमजन से जोड़ा।
जयपुर Art Week : कला, प्रकृति और स्मृतियों से सजा शहर
वॉक, वर्कशॉप और अनुभवात्मक आयोजनों ने रचा सांस्कृतिक उत्सव का जीवंत परिदृश्य
जयपुर : राजधानी जयपुर इन दिनों केवल ऐतिहासिक धरोहरों और पर्यटन स्थलों तक सीमित नहीं रही, बल्कि जयपुर आर्ट वीक के माध्यम से यह शहर एक जीवंत, संवादशील और सहभागितापूर्ण कला–शहर के रूप में उभर कर सामने आया है। आयोजन के पांचवें दिन शहर के विभिन्न हिस्सों में फैली गतिविधियों ने यह सिद्ध कर दिया कि कला दीवारों और गैलरियों तक सीमित नहीं, बल्कि प्रकृति, स्मृति, समुदाय और सार्वजनिक जीवन से गहराई से जुड़ी हुई प्रक्रिया है।
Art Week: प्रकृति से संवाद की शुरुआत: किशन बाग वॉक
दिन की शुरुआत ‘किशन बाग वॉक: मरुस्थलीय परिदृश्य की वनस्पतियों की खोज’ से हुई।
मोनल सिंह द्वारा संचालित इस विशेष वॉक में प्रतिभागियों ने जयपुर के मरुस्थलीय भू-दृश्य, स्थानीय वनस्पतियों और पारिस्थितिकी तंत्र को नज़दीक से समझा।
इस सत्र ने यह स्पष्ट किया कि कला केवल दृश्य अनुभव नहीं, बल्कि पर्यावरण को समझने और उसके साथ संवाद स्थापित करने का माध्यम भी है। प्रकृति और कला के इस संगम ने प्रतिभागियों को शहर के प्राकृतिक परिदृश्य से नए दृष्टिकोण से जोड़ दिया।
Art Week : बच्चों के लिए रचनात्मक सीख: ‘सांठ–गांठ’ वर्कशॉप
राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में बच्चों के लिए आयोजित ‘सांठ–गांठ’ ड्रॉप-इन वर्कशॉप जयपुर आर्ट वीक की एक विशेष पहल रही।
इस वर्कशॉप में खजूर, खेजड़ी और मूंज घास जैसी प्राकृतिक सामग्रियों से पारंपरिक गांठ बांधने की तकनीकों को सिखाया गया।
क्रिएटिव आर्ट्स एजुकेशन प्रोग्राम के फेलोज़ द्वारा संचालित इस सत्र का उद्देश्य बच्चों को स्थानीय ज्ञान प्रणालियों, सतत जीवनशैली और पारंपरिक शिल्प से परिचित कराना था।
यह आयोजन पब्लिक आर्ट्स ट्रस्ट ऑफ इंडिया और लर्निंग थ्रू आर्ट्स नैरेटिव एंड डिस्कोर्स के सहयोग से हुआ, जिसमें
प्रज्ञा सोनी, प्रवीण सिंह भाट, स्वधा जोशी, शुभम गेहलोत और यशवर्धन दवे की सक्रिय भूमिका रही।
Art Week : ध्वनि, स्मृति और खुशबू का अनुभवात्मक संसार
जयपुर आर्ट वीक के तहत कला के अनुभव को और गहरा करने के लिए ध्वनि और सुगंध आधारित सत्र भी आयोजित किए गए।
‘साउंड इज़ अ प्लेस टू’ सत्र
पाटी मुख्यालय में आयोजित इस सत्र में नंदिति खिलनानी (अजायबघर) ने ध्वनि को एक सामाजिक और सांस्कृतिक अनुभव के रूप में प्रस्तुत किया। प्रतिभागियों ने यह जाना कि ध्वनि कैसे स्थान, स्मृति और पहचान से जुड़ती है।
‘सेंट एंड मेमोरी’ वर्कशॉप
सी-स्कीम स्थित ग्रे स्पेस में आयोजित इस वर्कशॉप में परफ़्यूम और व्यक्तिगत खुशबुओं के माध्यम से स्मृतियों और कहानी कहने की प्रक्रिया को समझा गया। यह सत्र संवेदना और आत्मीय अनुभवों पर केंद्रित रहा।
पर्यावरण, निर्माण और विरासत पर विशेष फोकस
प्राकृतिक निर्माण तकनीकों की जानकारी
दोपहर में सेंट्रल पार्क में ‘इंट्रोडक्शन टू नैचुरल बिल्डिंग’ वर्कशॉप आयोजित हुई। टाइनी फ़ार्म लैब के राघव कुमार और अंश कुमार द्वारा संचालित इस सत्र में मिट्टी और कॉब निर्माण तकनीकों पर चर्चा की गई, जिससे पर्यावरण-अनुकूल और सतत निर्माण के प्रति जागरूकता बढ़ी।
मीनाकारी विरासत से साक्षात्कार
जवाहर कला केंद्र स्थित म्यूज़ियम ऑफ मीनाकारी हेरिटेज में क्यूरेटर-नेतृत्वित वॉकथ्रू आयोजित हुआ, जिसमें जयपुर की प्रसिद्ध मीनाकारी कला के ऐतिहासिक और समकालीन स्वरूप को विस्तार से प्रस्तुत किया गया।
इसके बाद ‘रीथ्रेड’ कठपुतली निर्माण कार्यशाला में भट्ट महिला कलाकारों के साथ पुनः उपयोग, आत्मकथा और सांस्कृतिक निरंतरता पर आधारित रचनात्मक गतिविधियां हुईं।
सार्वजनिक कला और शहर के रिश्ते की पड़ताल
सेंट्रल पार्क में आयोजित चार प्रदर्शनियों के क्यूरेटर-नेतृत्वित वॉकथ्रू में पाटी टीम ने सार्वजनिक कला और शहरी परिदृश्य के आपसी संबंधों को रेखांकित किया।
इस सत्र ने यह समझ विकसित की कि कैसे सार्वजनिक स्थानों में कला शहर के नागरिक जीवन को नई पहचान देती है।
‘दावतें’ के साथ सांस्कृतिक समापन
दिन का समापन सम, जयपुर में आयोजित सैटेलाइट इवेंट ‘दावतें’ के साथ हुआ।
तारी द्वारा प्रस्तुत यह अनुभवात्मक दस्तरख़्वान शाही रसोई और घरेलू परंपराओं से प्रेरित रहा, जहां भोजन, स्मृति और संवाद एक साझा सांस्कृतिक अनुभव के रूप में उभरे।
कला को जन–जन से जोड़ता जयपुर आर्ट वीक
विविध, बहुआयामी और सहभागितापूर्ण कार्यक्रमों के माध्यम से जयपुर आर्ट वीक कला को एक जीवंत, सुलभ और सामूहिक अनुभव के रूप में प्रस्तुत कर रहा है।
यह आयोजन न केवल कला प्रेमियों को आकर्षित कर रहा है, बल्कि शहर की पारिस्थितिकी, शिल्प परंपराओं, सार्वजनिक स्थलों और साझा स्मृतियों से गहराई से जुड़कर जयपुर की सांस्कृतिक पहचान को नए सिरे से परिभाषित कर रहा है।




