Jaipur Art Week 5.0 में राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय कलाकार, दूसरी सूची घोषित, कान्स-सनडांस कलाकार शामिल
Jaipur Art Week 5.0 का आयोजन 27 जनवरी से 3 फरवरी 2026 तक होगा। सात दिवसीय समकालीन कला महोत्सव में 100 से अधिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कलाकार भाग लेंगे। दूसरी सूची में कान्स और सनडांस में काम प्रदर्शित कर चुके कलाकार शामिल हैं।
Jaipur Art Week 5.0 का भव्य आयोजन
गुलाबी नगरी जयपुर एक बार फिर समकालीन कला का अंतरराष्ट्रीय केंद्र बनने जा रही है। भारत के सबसे बड़े समकालीन कला महोत्सव जयपुर आर्ट वीक (JAW) संस्करण 5.0 का आयोजन 27 जनवरी से 3 फरवरी 2026 तक शहर के प्रमुख स्थलों पर किया जाएगा। सात दिनों तक चलने वाले इस आर्ट फेस्टिवल में देश-विदेश के कलाकार अपनी रचनात्मक प्रस्तुतियों के माध्यम से कला प्रेमियों को एक अनोखा अनुभव देंगे।
Jaipur Art Week : दूसरी कलाकार सूची की घोषणा
जयपुर आर्ट वीक 5.0 के आयोजकों ने महोत्सव में भाग लेने वाले कलाकारों की दूसरी सूची जारी कर दी है। इस सूची में सोलो, ग्रुप और डिजिटल कैटेगिरी के कई प्रतिष्ठित और उभरते कलाकारों के नाम शामिल हैं। खास बात यह है कि इस संस्करण में भी 100 से अधिक कलाकार जयपुर के अलग-अलग लोकेशन्स पर अपनी कला प्रस्तुत करेंगे।
Jaipur Art Week : सात दिवसीय कला उत्सव की विशेषताएं
यह सात दिवसीय आर्ट महोत्सव फीचर्ड शो, सोलो प्रेजेंटेशन, ग्रुप एग्जीबिशन, डिजिटल आर्ट और पारसंस न्यूयॉर्क स्टूडेंट ग्रुप शो जैसी विभिन्न कैटेगिरी में आयोजित होगा। पांचवें संस्करण में 15 से अधिक एकल कला प्रस्तुतियां और कई समूह प्रदर्शनियां शामिल होंगी, जो जयपुर को एक जीवंत कला मंच में बदल देंगी।
कान्स और सनडांस से जुड़े कलाकारों की मौजूदगी
जयपुर आर्ट वीक 5.0 की दूसरी सूची की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें ऐसे कलाकार शामिल हैं, जिनका काम कान्स और सनडांस जैसे प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय फिल्म और कला महोत्सवों में प्रदर्शित हो चुका है। इससे जयपुर आर्ट वीक की अंतरराष्ट्रीय पहचान और भी मजबूत होने की उम्मीद है।
सोलो आर्टिस्ट्स कैटेगिरी के प्रमुख नाम
सोलो आर्टिस्ट्स कैटेगिरी में कई चर्चित और विविध पृष्ठभूमि के कलाकार शामिल किए गए हैं।
कांची चोपड़ा ने कृषि अपशिष्ट को टिकाऊ कागज और पैकेजिंग में बदलने वाले सामाजिक उपक्रम ‘कोहिनूरी’ के जरिए उत्तरी भारत के किसानों और स्ट्रीट वेंडर्स के साथ मिलकर 120 से अधिक देशी पौध प्रजातियों का दस्तावेजीकरण और संरक्षण किया है।
आर्टिस्ट माया कुमारी सुथार ने राजस्थान की ग्रामीण स्मृतियों और भूमि-इतिहास को समकालीन स्पैशियल डिजाइन के साथ जोड़ा है। वहीं मोहद. इंतियाज़ ने अपसाइकल्ड वस्त्रों और पाई गई सामग्रियों के माध्यम से विस्थापन, सत्ता और सामूहिक अस्तित्व जैसे विषयों को अपनी कला का केंद्र बनाया है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुके कलाकार
20 वर्षों का अनुभव रखने वाले आर्टिस्ट माइकल शॉ वीएंडए लंदन और सिडनी फेस्टिवल जैसे मंचों पर लार्ज-स्केल साइट-स्पेसिफिक इन्फ्लेटेबल स्कल्प्चर्स प्रस्तुत कर चुके हैं।
नताशा गालेसिच ने 10 से अधिक देशों में प्रदर्शनियां की हैं और सार्वजनिक कला व समुदाय-आधारित प्रैक्टिस के लिए अपने प्रोजेक्ट ‘होसमोलोज़ी’ से विशिष्ट पहचान बनाई है।
फिल्म और परफॉर्मेंस आर्ट से जुड़े नाम
आर्टिस्ट नव्या साह की फिल्में बर्लिनाले, बुसान और मामी जैसे अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों में प्रदर्शित हो चुकी हैं।
वहीं श्रेया अग्रवाल ने सेरेंडिपिटी आर्ट्स फेस्टिवल सहित कई प्रमुख मंचों पर इमर्सिव मूवमेंट परफॉर्मेंस प्रस्तुत की हैं।
पास्कल उंगरर, जिन्हें गोल्ड्स्मिथ एक्सीलेंस अवार्ड मिल चुका है, 2023 में रॉबर्ट वॉल्टर्ज यूके न्यू आर्टिस्ट ऑफ द ईयर के फाइनलिस्ट भी रह चुके हैं।
परंपरा और पर्यावरण से जुड़ी कला
आर्टिस्ट पूजन गुप्ता ने फार्मास्यूटिकल वेस्ट (ब्लिस्टर पैक्स) को बड़े पैमाने की समकालीन मूर्तिकला में बदलकर पर्यावरणीय चेतना को नई दृश्य भाषा दी है।
रियाज़ उद्दीन, पिंक सिटी स्टूडियो जयपुर के मास्टर मिनिएचर कलाकार हैं, जो 700 वर्ष पुरानी भारतीय मिनिएचर परंपरा को समकालीन वैश्विक संदर्भों से जोड़ते हैं।
ज़ोया चौधरी को कई अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिल चुके हैं और वे टीएएफ अवार्ड 2024 की फाइनलिस्ट भी रही हैं।
ग्रुप आर्टिस्ट्स कैटेगिरी में विविधता
ग्रुप आर्टिस्ट्स कैटेगिरी में भी विविध विषयों और माध्यमों पर काम करने वाले कलाकार शामिल हैं।
रिदम कुमार ने काइनेटिक स्कल्प्चर के जरिए विस्थापन और स्मृति के विषयों को यांत्रिक गति में ढाला है।
रिया भगत केयर-आधारित स्पेक्युलेटिव डिजाइन और सहभागी इंस्टॉलेशन्स के लिए उभरती अंतरराष्ट्रीय आवाज़ हैं।
राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मंचों पर चर्चित समूह
अन्वेकर जुड़वां कलाकार रोशन और रोहन अन्वेकर को अमरनाथ सहगल ग्रांट सहित कई राष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके हैं और उनका कार्य कोरिया आर्ट बिएनाले में प्रदर्शित हो चुका है।
सुमित नाइक ने कागज को संरचनात्मक माध्यम के रूप में इस्तेमाल कर हाइपररियल चारकोल ड्रॉइंग्स के जरिए पहचान बनाई है।
क्षेत्रीय स्मृति और शहरी बदलाव पर फोकस
सुभाष डेका ने असम की प्राकृतिक लय और ग्रामीण स्मृतियों को अपनी मूर्तियों में रूपांतरित किया है।
यश चौधरी ने जयपुर के शहरी परिवर्तन को नॉन-रिप्रेजेंटेशनल एब्स्ट्रैक्शन के माध्यम से दर्ज किया है।
यशिका गोयल का एआई आधारित कार्य वीएंडए म्यूज़ियम में प्रदर्शित हो चुका है।
डिजिटल आर्टिस्ट्स कैटेगिरी की खास पेशकश
डिजिटल कैटेगिरी में आयही ने लाइट, साउंड और डेटा के संयोजन से इमर्सिव न्यू-मीडिया वातावरण रचे हैं।
अलाप पारिख का काम कान्स और सनडांस फिल्म फेस्टिवल में प्रदर्शित हो चुका है।
अंतरिक्ष स्टूडियो x अभिनव मिश्रा x अनिरुद्ध कनिसेट्टी के सहयोग ने मिक्स्ड-रियलिटी के जरिए भारतीय सांस्कृतिक विरासत को नए सिरे से प्रस्तुत किया है।
तकनीक और संस्कृति का संगम
भरगव पधियार × वगराम चौधरी की जोड़ी ने डिजिटल तकनीक और सामुदायिक इतिहास को जोड़ा है।
करसोरमा ने जनरेटिव वीडियो आर्ट और लाइव ऑडियो-विजुअल परफॉर्मेंस के जरिए न्यू-मीडिया आर्ट को नया आयाम दिया है।
एल्सवेयर इन इंडिया और त्रिशा छाबड़ा ने एआर, वीआर और एआई आधारित प्रणालियों के जरिए प्रकृति, तकनीक और जलवायु चेतना को जोड़ा है।
जयपुर को मिलेगा वैश्विक कला मंच
जयपुर आर्ट वीक 5.0 न सिर्फ स्थानीय कलाकारों के लिए, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कला जगत के लिए भी एक महत्वपूर्ण मंच साबित होने जा रहा है। सात दिनों तक चलने वाला यह महोत्सव जयपुर को वैश्विक समकालीन कला मानचित्र पर और मजबूत स्थान दिलाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।





