Indore Updates : हर तीसरा व्यक्ति विटामिन-D की कमी से जूझ रहा, हेल्थ स्टडी में चौंकाने वाला खुलासा
Indore Updates : इंदौर में 9 हजार से अधिक लोगों की हेल्थ जांच में सामने आया कि हर तीसरा व्यक्ति विटामिन-D की कमी से पीड़ित है। वर्क फ्रॉम होम, एसी लाइफस्टाइल और धूप की कमी को इसकी बड़ी वजह बताया गया है।
Indore Updates : हर तीसरा व्यक्ति विटामिन-D की कमी का शिकार
9 हजार लोगों की जांच में खुलासा, वर्क फ्रॉम होम और एसी लाइफस्टाइल बनी बड़ी वजह
इंदौर : देश के तेजी से बढ़ते शहरों में शामिल इंदौर में विटामिन-D की कमी अब एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या के रूप में सामने आ रही है। हाल ही में 9 हजार से अधिक लोगों की स्वास्थ्य जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि शहर में 36 से 37 प्रतिशत लोग विटामिन-D की कमी से ग्रस्त हैं। यह समस्या महिलाओं और पुरुषों दोनों में लगभग समान रूप से पाई गई है।
विशेषज्ञों के अनुसार बदलती जीवनशैली, वर्क फ्रॉम होम कल्चर और एयर कंडीशनिंग वाले बंद वातावरण में अधिक समय बिताना इस बढ़ती समस्या की सबसे बड़ी वजह बन रहा है।
Indore Updates : कोकिलाबेन अंबानी हॉस्पिटल की स्टडी में सामने आए तथ्य
यह जानकारी कोकिलाबेन धीरुबाई अंबानी हॉस्पिटल की सालाना हेल्थ स्टडी में सामने आई है। इस अध्ययन में कुल 9418 लोगों की जांच की गई, जिनमें
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3454 महिलाएं
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5964 पुरुष शामिल थे।
सभी प्रतिभागियों को दो आयु वर्गों में बांटा गया—
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45 वर्ष से कम उम्र
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45 वर्ष या उससे अधिक उम्र
रिपोर्ट के अनुसार विटामिन-D की कमी अधिक उम्र के लोगों में ज्यादा पाई गई, लेकिन कम उम्र के वयस्क भी इससे अछूते नहीं रहे।
Indore Updates : आंकड़ों में समझिए विटामिन-D की गंभीरता
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स्टडी में सामने आए आंकड़े इस प्रकार हैं—
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3454 महिलाओं में से 1288 महिलाएं विटामिन-D की कमी से पीड़ित पाई गईं
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5964 पुरुषों में से 2164 पुरुषों में भी विटामिन-D की कमी दर्ज की गई
कुल मिलाकर यह आंकड़ा करीब 37 प्रतिशत तक पहुंच गया, जो एक बड़े शहरी स्वास्थ्य संकट की ओर इशारा करता है।
Indore Updates : बदलती लाइफस्टाइल बना रही शरीर को कमजोर
कंसलटेंट क्लिनिकल चीफ डॉ. गौरव शैलगांवकर के अनुसार मानव शरीर मूल रूप से खुले वातावरण में सक्रिय रहने के लिए बना है।
उन्होंने बताया कि—
“पहले लोग खेती, श्रम और आउटडोर गतिविधियों से जुड़े रहते थे, लेकिन आज बड़ी आबादी केबिन आधारित नौकरियों और कॉर्पोरेट वर्क कल्चर में फंसी हुई है।”
लंबे समय तक बंद कमरों और एसी वातावरण में काम करने से शरीर को पर्याप्त प्राकृतिक धूप नहीं मिल पाती, जिससे विटामिन-D का स्तर लगातार गिरता जा रहा है।
बच्चों में भी बढ़ रही विटामिन-D की कमी
डॉक्टरों ने चिंता जताई कि यह समस्या अब केवल वयस्कों तक सीमित नहीं रही।
जहां पहले बच्चे क्रिकेट, कबड्डी और आउटडोर खेलों में समय बिताते थे, वहीं अब—
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मोबाइल गेम्स
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सोशल मीडिया
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इनडोर गतिविधियां
बच्चों की दिनचर्या का हिस्सा बन गई हैं। इसके चलते बच्चों में भी विटामिन-D की कमी के मामले बढ़ रहे हैं, जो भविष्य में गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म दे सकते हैं।
हड्डियों से लेकर मानसिक स्वास्थ्य तक पड़ता है असर
एक्सपर्ट्स के अनुसार विटामिन-D शरीर में कैल्शियम को हड्डियों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाता है। इसकी कमी से—
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हड्डियां कमजोर होती हैं
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ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा बढ़ता है
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बार-बार फ्रैक्चर की आशंका रहती है
इसके अलावा विटामिन-D की कमी से
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बालों का झड़ना
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थकान
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चिड़चिड़ापन
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डिप्रेशन जैसी मानसिक समस्याएं भी देखी जाती हैं।
खासतौर पर मेनोपॉज के बाद महिलाओं में इसका असर अधिक गंभीर हो सकता है, क्योंकि इस उम्र में शरीर को ज्यादा कैल्शियम की जरूरत होती है।
धूप और संतुलित आहार है सबसे बड़ा इलाज
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डॉक्टरों के अनुसार रोज़ाना सुबह 15 से 20 मिनट की प्राकृतिक धूप विटामिन-D का सबसे अच्छा स्रोत है।
हालांकि वर्क फ्रॉम होम और एसी लाइफस्टाइल के कारण यह अब मुश्किल होता जा रहा है।
ऐसे में डॉक्टरों ने संतुलित आहार लेने की सलाह दी है, जिसमें शामिल हों—
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मिलेट्स
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टोफू
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दूध और पनीर
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कैल्शियम-युक्त खाद्य पदार्थ
जांच और सही इलाज बेहद जरूरी
विशेषज्ञों की सलाह है कि लोग नियमित रूप से विटामिन-D की जांच कराएं।
यदि स्तर कम पाया जाए तो—
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डॉक्टर की सलाह से सप्लीमेंट लें
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खुद से दवा लेने से बचें
गलत मात्रा में सप्लीमेंट लेने से नुकसान भी हो सकता है।
सालाना हेल्थ स्टडी में सामने आए अन्य महत्वपूर्ण तथ्य
विटामिन-B12 की कमी
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13.60% पुरुष
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9.30% महिलाएं प्रभावित
एनीमिया
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महिलाओं में 10%
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पुरुषों में 1.9%
प्री-डायबिटीज
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30.90% पुरुष
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29% महिलाएं
डायबिटीज
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16.2% पुरुष
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12.20% महिलाएं
थायराइड
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हाइपोथायरायडिज़म: 12.50% महिलाएं, 6.90% पुरुष
मरीजों की बेहतर देखभाल प्राथमिकता
हॉस्पिटल के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर डॉ. संतोष शेट्टी ने कहा कि मरीजों की बेहतर देखभाल उनकी प्राथमिकता है।
वहीं वाइस प्रेसिडेंट सुनील मेहता ने बताया कि जांच आंकड़ों पर आधारित हेल्थ कार्ड से एनीमिया, प्री-डायबिटीज, डायबिटीज, किडनी, थायराइड और विटामिन-D व B12 जैसी समस्याओं की समय रहते पहचान संभव हो पा रही है।

