इंदौर में दूषित पेयजल से 14 मौतें, पाइपलाइन लीकेज जिम्मेदार; मानवाधिकार आयोग सख्त
इंदौर के भागीरथपुरा में पाइपलाइन लीकेज से पेयजल में सीवेज मिला, जिससे हैजा जैसे बैक्टीरिया फैले और 14 लोगों की मौत हो गई। लैब रिपोर्ट से पुष्टि हुई। NHRC ने मध्य प्रदेश सरकार से दो सप्ताह में रिपोर्ट मांगी है।
इंदौर में पाइपलाइन लीकेज से पेयजल में मिला दूषित पानी, इंदौर में 14 लोगों की मौत
मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में दूषित पेयजल से फैली गंभीर बीमारी ने भयावह रूप ले लिया है। भागीरथपुरा इलाके में अब तक 14 लोगों की मौत हो चुकी है। यह मौतें किसी महामारी नहीं, बल्कि पेयजल में मिले दूषित और जानलेवा बैक्टीरिया की वजह से हुई हैं। गुरुवार को महात्मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज (MGM) की लैब रिपोर्ट ने इस आशंका की पुष्टि कर दी कि लोगों की जान दूषित पानी पीने से ही गई है।
इस मामले ने प्रशासन, सरकार और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
लैब रिपोर्ट से पुष्टि: दूषित पानी से ही हुई मौतें
सीएमएचओ डॉ. माधव हसानी ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि मेडिकल कॉलेज की लैब रिपोर्ट में साफ तौर पर सामने आया है कि भागीरथपुरा क्षेत्र में लोगों के बीमार पड़ने और मौत की वजह दूषित पेयजल ही है।
उन्होंने बताया कि पानी के सैंपल की जांच में हानिकारक बैक्टीरिया पाए गए हैं, जिनके कारण लोगों में उल्टी, दस्त, पेट दर्द और गंभीर संक्रमण फैला। कई मरीजों की हालत इतनी बिगड़ी कि उन्हें आईसीयू में भर्ती करना पड़ा।
कलेक्टर बोले- डिटेल कल्चर रिपोर्ट का इंतजार
इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा ने कहा कि प्रारंभिक रिपोर्ट से दूषित पानी की पुष्टि हुई है, लेकिन डिटेल कल्चर टेस्ट रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि मेडिकल कॉलेज में विशेष कल्चर जांच जारी है, जिससे यह साफ होगा कि किस प्रकार का बैक्टीरिया सबसे ज्यादा घातक साबित हुआ।
मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने माना- पेयजल में मिला सीवेज
मध्य प्रदेश के नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने भी इस बात को स्वीकार किया कि भागीरथपुरा इलाके के पेयजल में सीवेज का पानी मिला है। उन्होंने कहा कि उन्हें आशंका है कि चौकी के पास पाइपलाइन में हुए लीकेज के कारण ड्रेनेज का पानी सप्लाई लाइन में मिल गया।
मंत्री के इस बयान से यह स्पष्ट हो गया कि मामला तकनीकी खराबी से कहीं ज्यादा गंभीर प्रशासनिक लापरवाही का है।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने लिया संज्ञान
मामले की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने भी संज्ञान लिया है। आयोग ने मध्य प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
NHRC ने यह जानना चाहा है कि:
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पेयजल में दूषित पानी कैसे मिला
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प्रशासन ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की
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मृतकों के परिजनों को क्या राहत दी गई
हाईकोर्ट में भी होगी सुनवाई, सरकार से स्टेटस रिपोर्ट तलब
इस गंभीर मुद्दे पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में भी सुनवाई की संभावना है। बताया गया है कि जबलपुर की दो सदस्यीय बेंच दोपहर 12 बजे के बाद ऑनलाइन सुनवाई कर सकती है।
कोर्ट ने राज्य सरकार से स्टेटस रिपोर्ट मांगी है, जिसमें पूरे मामले की जानकारी, अब तक की कार्रवाई और आगे के कदमों का ब्यौरा देना होगा।
दूषित पानी में हैजा जैसे जानलेवा बैक्टीरिया

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक दूषित पानी में कई प्रकार के खतरनाक बैक्टीरिया पाए जाते हैं। ड्रेनेज के पानी में:
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टॉयलेट से निकलने वाला मल-मूत्र
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बाथरूम और कपड़े धोने का पानी
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साबुन, डिटर्जेंट, फर्श साफ करने के केमिकल
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कॉमर्शियल एरिया का केमिकल वेस्ट
सब मिलकर पानी को बेहद टॉक्सिक बना देते हैं।
ऐसे पानी के जरिए Shigella, Salmonella, Cholera (हैजा), Escherichia coli जैसे बैक्टीरिया शरीर में पहुंचते हैं। इनमें से कोई एक या एक से अधिक बैक्टीरिया इस घटना में जानलेवा साबित हुए हो सकते हैं।
मंत्री के सामने भड़की महिलाएं, चेक लेने से किया इनकार
गुरुवार सुबह मंत्री कैलाश विजयवर्गीय भागीरथपुरा पहुंचे। सरकार की ओर से 7 मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये के चेक दिए जाने थे, लेकिन मौके पर मौजूद लोगों ने चेक लेने से इनकार कर दिया।
महिलाओं ने मंत्री के सामने नाराजगी जताते हुए कहा कि उन्हें मुआवजा नहीं, बल्कि जवाब चाहिए। मंत्री स्कूटर से इलाके में पहुंचे थे, लेकिन विरोध के चलते माहौल तनावपूर्ण हो गया।
जीतू पटवारी ने सोशल मीडिया पर शेयर किया वीडियो
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इस दौरान का वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर शेयर किया। वीडियो में एक महिला कहती दिख रही है कि पिछले दो साल से गंदा पानी आ रहा था, लेकिन भाजपा पार्षद और प्रशासन ने कभी समाधान नहीं किया।
जीतू पटवारी ने लिखा-
“पूरा मोहल्ला बीमार है, लेकिन सत्ता के अहंकार में चूर मंत्री जी ने गाड़ी आगे बढ़ा ली और बहन की बात तक नहीं सुनी।”
महिला बोली- अस्पताल पैसे मांग रहा, जिम्मेदार कौन?
भागीरथपुरा की निधि यादव अस्पताल के बाहर गोद में बच्चा लिए बदहवास हालत में दिखीं। उन्होंने बताया कि उनकी 70 वर्षीय सास रामलली यादव सात दिन से अस्पताल में भर्ती हैं और उनकी किडनी फेल हो गई है।
निधि ने रोते हुए कहा-
“अस्पताल वाले स्लिप देकर पैसे मांग रहे हैं। अगर कुछ हो गया तो कौन जिम्मेदार होगा? क्या दो लाख रुपये देकर हमारी सास लौटा देंगे?”
CMHO का खुलासा: 201 मरीज अब भी भर्ती, 32 ICU में

सीएमएचओ डॉ. माधव हसानी ने बताया कि:
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1714 घरों का सर्वे किया गया
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8571 लोगों की जांच हुई
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338 मरीजों को मौके पर उपचार दिया गया
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अब तक 272 मरीज भर्ती किए गए
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71 मरीज डिस्चार्ज हो चुके हैं
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फिलहाल 201 मरीज अस्पताल में भर्ती, जिनमें 32 ICU में हैं
स्थिति अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है।
ACS संजय दुबे ने की जांच, अफसरों के साथ बैठक
मामले की जांच के लिए अपर मुख्य सचिव संजय दुबे गुरुवार को इंदौर पहुंचे। उन्होंने उस जगह का निरीक्षण किया, जहां से दूषित पानी के सप्लाई लाइन में मिलने की आशंका है।
इसके बाद नगर निगम और जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ बैठक कर निर्देश दिए कि:
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शहर के अन्य इलाकों में भी रैंडम सैंपलिंग कराई जाए
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कहीं और दूषित पानी सप्लाई तो नहीं हो रहा, इसकी जांच हो
संजय दुबे मुख्यमंत्री को रिपोर्ट सौंपेंगे कि चूक कहां हुई और जिम्मेदार कौन है।
सांसद शंकर लालवानी का ऐलान- 10 नई बोरिंग होंगी
इंदौर के सांसद शंकर लालवानी भी भागीरथपुरा पहुंचे। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों की मांग पर सांसद निधि से 10 नई बोरिंग स्वीकृत की गई हैं।
उन्होंने बताया कि मशीन बुलाकर काम शुरू करा दिया गया है, ताकि लोगों को जल्द स्वच्छ पेयजल मिल सके।
निष्कर्ष
इंदौर का यह मामला केवल तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और प्रशासनिक लापरवाही का गंभीर उदाहरण बन गया है। 14 लोगों की मौत ने पूरे सिस्टम को झकझोर दिया है। अब निगाहें जांच रिपोर्ट, हाईकोर्ट की सुनवाई और मानवाधिकार आयोग की कार्रवाई पर टिकी हैं।

