Indore Updates : इंदौर कांग्रेस में वंदे मातरम अनिवार्य, न गाने वालों पर सख्ती, रुबीना निष्कासन तय

Indore Updates : इंदौर कांग्रेस में वंदे मातरम अनिवार्य किया गया। शहर अध्यक्ष चिंटू चौकसे ने साफ कहा—जो नहीं गाए, वह बैठक में न आए। रुबीना इकबाल खान के निष्कासन का प्रस्ताव भेजा गया। पार्षद फौजिया शेख के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने की मांग उठी, विवाद तेज हुआ।
Indore Updates : इंदौर कांग्रेस में नया नियम: वंदे मातरम होगा अनिवार्य
मध्यप्रदेश के इंदौर में कांग्रेस संगठन के भीतर एक नया नियम लागू किया गया है, जिसने सियासी हलचल तेज कर दी है। शहर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष चिंटू चौकसे ने स्पष्ट किया है कि अब हर कांग्रेस बैठक की शुरुआत “वंदे मातरम” से होगी और समापन “जन गण मन” के साथ किया जाएगा।
उन्होंने दो टूक कहा कि जिन्हें वंदे मातरम गाने में आपत्ति है, वे पार्टी की बैठकों में शामिल न हों।
“धर्म से पहले राष्ट्र”—चौकसे का सख्त संदेश
चिंटू चौकसे ने अपने बयान में राष्ट्रभक्ति को सर्वोपरि बताते हुए कहा कि कोई भी धर्म देश के सम्मान में गान करने से नहीं रोकता।
उन्होंने कहा:
“धर्म से पहले राष्ट्र है। राष्ट्रीयता का भाव हर कार्यकर्ता में होना चाहिए। दलीय राजनीति अपनी जगह है, लेकिन राष्ट्र उससे ऊपर है।”
उन्होंने यह भी याद दिलाया कि आजादी से पहले कांग्रेस के हर अधिवेशन की शुरुआत वंदे मातरम से होती थी, जिससे पार्टी की ऐतिहासिक भूमिका स्पष्ट होती है।
पार्टी लाइन से हटने वालों पर सख्ती
चौकसे ने साफ कर दिया कि पार्टी के भीतर ऐसे बयानों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, जो राष्ट्रगीत या राष्ट्रगान के प्रति असम्मान दिखाते हों।
उन्होंने कहा कि अगर कोई कांग्रेस कार्यकर्ता वंदे मातरम गाने से इनकार करता है, तो यह पार्टी की विचारधारा के खिलाफ है।
रुबीना इकबाल खान का निष्कासन लगभग तय

इस पूरे विवाद के बीच रुबीना इकबाल खान का नाम प्रमुखता से सामने आया है।
चिंटू चौकसे ने संकेत दिए हैं कि उनका पार्टी से निष्कासन लगभग तय है। उन्होंने बताया कि प्रदेश कांग्रेस कमेटी को निष्कासन का प्रस्ताव भेज दिया गया है।
उन्होंने कहा:
“आज से मानकर चलिए कि रुबीना कांग्रेस में नहीं हैं। पार्टी के खिलाफ बोलने वालों को एंटरटेन नहीं किया जाएगा।”
फौजिया शेख के खिलाफ शिकायत की मांग

विवाद में फौजिया शेख अलीम का नाम भी जुड़ गया है। उनके खिलाफ थाने में शिकायत दर्ज कराने की मांग उठी है।
हिंदूवादी नेताओं—लक्की मेवाती, ऐश्वर्य शर्मा और मानसिंह राजावत—ने अपने समर्थकों के साथ एमजी रोड थाने पहुंचकर आवेदन दिया।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि वंदे मातरम नहीं गाने और उस पर टिप्पणी करने से उनकी धार्मिक और राष्ट्रीय भावनाएं आहत हुई हैं।
राजनीतिक विवाद ने पकड़ा जोर
इंदौर में यह मुद्दा अब केवल एक संगठनात्मक निर्णय तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय बन गया है।
जहां एक तरफ कांग्रेस नेतृत्व इसे राष्ट्रभक्ति से जोड़कर देख रहा है, वहीं दूसरी ओर यह विवाद अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और व्यक्तिगत विचारों के अधिकार से भी जुड़ता नजर आ रहा है।
आगे क्या हो सकता है?
इस पूरे मामले में अब सभी की नजरें प्रदेश कांग्रेस कमेटी के फैसले पर टिकी हैं। रुबीना इकबाल खान के निष्कासन पर अंतिम निर्णय जल्द लिया जा सकता है।
वहीं, फौजिया शेख के खिलाफ शिकायत पर पुलिस की कार्रवाई भी इस मामले को और तूल दे सकती है।
निष्कर्ष
इंदौर कांग्रेस में वंदे मातरम को अनिवार्य करने का फैसला एक बड़े राजनीतिक विवाद का कारण बन गया है। इससे पार्टी के भीतर अनुशासन और राष्ट्रभक्ति का संदेश देने की कोशिश की जा रही है, लेकिन इसके साथ ही यह मुद्दा राजनीतिक और सामाजिक बहस को भी जन्म दे रहा है।
आने वाले दिनों में इस विवाद के और बढ़ने की संभावना है, जिससे प्रदेश की राजनीति पर असर पड़ सकता है।

