Foreign Trade Policy : अमेरिका-चीन तनाव में भारत की नई रणनीति, ट्रम्प टैरिफ ने बदली विदेश और व्यापार नीति
Foreign Trade Policy : अमेरिका-चीन तनाव और ट्रम्प के टैरिफ के बाद भारत की विदेश और व्यापार नीति में बड़ा बदलाव दिख रहा है। भारत अब EU, कनाडा, ब्रिटेन और मध्यम ताकत वाले देशों से दोस्ती बढ़ाकर वैश्विक संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है।
Foreign Trade Policy : अमेरिका-चीन के बीच फंसा भारत, अब कम ताकतवर देशों से बढ़ा रहा दोस्ती

दुनिया की मौजूदा वैश्विक व्यवस्था तेजी से बदल रही है। इसी बदलाव की ओर इशारा करते हुए कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने पिछले महीने स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) में कहा था कि पुरानी विश्व व्यवस्था अब “टूट” रही है और आने वाले समय में मध्यम ताकत वाले देशों को मिलकर काम करना होगा।
हालांकि कार्नी ने न तो अपने भाषण में सीधे तौर पर डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन का नाम लिया और न ही अमेरिकी टैरिफ का जिक्र किया, लेकिन वैश्विक कूटनीति को समझने वालों के लिए उनका संदेश साफ था। यह संकेत भारत की ओर था, जो इस समय अमेरिका और चीन के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है।
दो बड़े दबावों के बीच भारत
भारत इस वक्त एक कठिन भू-राजनीतिक स्थिति में खड़ा है।
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एक तरफ अमेरिका की बदलती व्यापार नीतियां हैं
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दूसरी तरफ चीन की बढ़ती आक्रामकता और सैन्य दबाव
इन हालात में भारत ने यह समझ लिया है कि केवल पारंपरिक साझेदारों पर निर्भर रहना अब पर्याप्त नहीं है। इसी वजह से भारत अब यूरोप, कनाडा, खाड़ी देशों और लैटिन अमेरिका जैसे क्षेत्रों में नए दोस्त और व्यापारिक सहयोगी तलाश रहा है।
Foreign Trade Policy : भारत-EU ने 18 साल से अटकी ऐतिहासिक डील पूरी की
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दावोस की घटना के ठीक एक हफ्ते बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नई दिल्ली में यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के साथ नजर आए। इस दौरान भारत और यूरोपियन यूनियन (EU) ने करीब 18 साल से अटके व्यापार समझौते को पूरा करने की घोषणा की।
इस समझौते को दोनों नेताओं ने “मदर ऑफ ऑल डील्स” बताया।
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इस डील से लगभग 2 अरब लोगों का साझा बाजार तैयार होगा।
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यह सिर्फ व्यापार नहीं, बल्कि उस नए अंतरराष्ट्रीय ढांचे का हिस्सा है, जिसमें अमेरिका की भूमिका कमजोर होने के बाद बाकी देश मिलकर नई व्यवस्था बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
Foreign Trade Policy : भारत की विदेश नीति में साफ दिख रहा बदलाव

आज भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो चुका है जिनके फैसले वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था को प्रभावित करते हैं।
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140 करोड़ की आबादी के साथ भारत दुनिया का सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश है।
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भारत की अर्थव्यवस्था जापान और जर्मनी के साथ दुनिया की टॉप-5 इकोनॉमी में शामिल हो चुकी है, हालांकि प्रति व्यक्ति आय अब भी कम है।
प्रधानमंत्री मोदी की आत्मनिर्भर भारत की नीति अब पहले की तुलना में ज्यादा व्यावहारिक नजर आ रही है। लंबे समय तक भारत में यह सोच रही कि ज्यादा विदेशी जुड़ाव से खतरे बढ़ते हैं, लेकिन अब नीति-निर्माताओं को लगने लगा है कि व्यापार और सहयोग से ही ताकत बढ़ती है।
Foreign Trade Policy : भारत-ब्रिटेन FTA से बदली दिशा

भारत की नई व्यापार नीति की शुरुआत पिछले साल ब्रिटेन के साथ हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) से हुई। यह समझौता लंबे समय से अटका हुआ था, लेकिन आखिरकार इसे अमलीजामा पहनाया गया।
इसके बाद:
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दिसंबर में ओमान और न्यूजीलैंड के साथ समझौते हुए
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हाल के हफ्तों में जर्मनी, जापान, UAE और सऊदी अरब के शीर्ष नेता भारत आए
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हर मुलाकात में व्यापार, निवेश और रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाया गया
फरवरी में ब्राजील के राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा और मार्च में मार्क कार्नी के भारत दौरे की भी तैयारी है।
ट्रम्प के टैरिफ ने बिगाड़े भारत-अमेरिका रिश्ते
पिछले साल डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत से आने वाले ज्यादातर सामानों पर 50% टैरिफ लगा दिया था।
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इसमें 25% रेसिप्रोकल टैरिफ
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और 25% रूस से तेल खरीदने पर लगाई गई पेनल्टी शामिल थी
यहीं से भारत-अमेरिका रिश्तों में ठंडापन आया, जबकि इससे पहले 25 सालों तक दोनों देश चीन के मुकाबले एक-दूसरे के करीबी बने रहे थे।
हालांकि अब अमेरिका ने भारत पर टैरिफ घटाकर 18% कर दिया है और रूस से तेल खरीदने पर लगाया गया अतिरिक्त टैक्स हटा लिया गया है।
सप्लाई चेन में भारत की कमजोर पकड़
ब्रुकिंग्स इंस्टीट्यूशन की सीनियर फेलो तन्वी मदान के मुताबिक, भारत चीन की तरह वैश्विक सप्लाई चेन में मजबूत पकड़ बनाना चाहता था, लेकिन इसमें कई सीमाएं हैं।
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चीन के पास रेयर-अर्थ मिनरल्स हैं
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ताइवान और नीदरलैंड के पास एडवांस चिप टेक्नोलॉजी है
भारत के पास फिलहाल ऐसा कोई रणनीतिक संसाधन नहीं है, जिसकी वजह से बाकी दुनिया उस पर निर्भर हो। उल्टा, चीन का सामान वैश्विक बाजारों में छाया हुआ है और सीमा पर तनाव बना हुआ है।
पटरी पर लौटते भारत-कनाडा संबंध
अक्टूबर 2024 में एक सिख अलगाववादी की हत्या को लेकर भारत-कनाडा रिश्ते बिगड़ गए थे। दोनों देशों ने एक-दूसरे के राजनयिक तक निकाल दिए थे।
लेकिन जून 2025 में G-7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और मार्क कार्नी की मुलाकात के बाद रिश्तों में सुधार दिखा। अब एक नया व्यापार समझौता दोनों देशों के रिश्तों में बड़ा मोड़ साबित हो सकता है।
अमेरिका अब भी भारत का सबसे बड़ा बाजार
अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार है।
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50% टैरिफ के बाद निर्यात में गिरावट आई
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भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 7% कमजोर हुआ
लेकिन भारत ने इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर और नए बाजारों पर फोकस कर नुकसान की भरपाई कर ली। नतीजतन कुल निर्यात में सालाना बढ़ोतरी दर्ज की गई।
निष्कर्ष
अमेरिका-चीन के बीच बढ़ते तनाव ने भारत को अपनी विदेश और व्यापार नीति पर दोबारा सोचने के लिए मजबूर कर दिया है।
EU, कनाडा, ब्रिटेन और अन्य मध्यम ताकत वाले देशों से बढ़ती दोस्ती भारत को आने वाले वैश्विक उतार-चढ़ाव से निपटने में मदद कर सकती है।
अर्थशास्त्री रजत कथूरिया के शब्दों में, भारत संकट को अक्सर सुधार का मौका बना लेता है — और मौजूदा हालात भी उसी दिशा में इशारा कर रहे हैं।

