Consumer Court Notice : भ्रामक विज्ञापन मामले में उपभोक्ता कोर्ट सख्त, कंपनी से मांगा जवाब
यह मामला उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 के तहत दर्ज किया गया है और अब अदालत विज्ञापन में किए गए दावों की सत्यता की जांच करेगी।
Consumer Court Notice : क्या है पूरा मामला?
एडवोकेट गुरुचरण सिंह ने उपभोक्ता आयोग में परिवाद दायर करते हुए आरोप लगाया कि कोल्ड ड्रिंक कंपनी और उसके ब्रांड एंबेसडर द्वारा किए जा रहे दावे पूरी तरह भ्रामक हैं। विज्ञापन में दिखाया जाता है कि इस कोल्ड ड्रिंक को पीने से व्यक्ति के भीतर असाधारण ऊर्जा और हिम्मत आ जाती है, जिससे वह डर पर विजय पा सकता है और साहसी कार्य कर सकता है।
परिवाद में कहा गया है कि ऐसे दावे वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नहीं हैं और उपभोक्ताओं को भ्रमित करने के उद्देश्य से किए गए हैं।
Consumer Court Notice : विज्ञापन से प्रभावित होकर खरीदी कोल्ड ड्रिंक
एडवोकेट गुरुचरण सिंह ने अदालत को बताया कि उन्होंने विज्ञापन देखकर उत्पाद खरीदा और उसका सेवन किया। हालांकि, उन्हें विज्ञापन में बताए गए किसी भी प्रकार के विशेष अनुभव या बदलाव का अहसास नहीं हुआ।
उनका कहना है कि न तो उत्पाद में ऐसी कोई विशेष सामग्री है और न ही कोई वैज्ञानिक रिपोर्ट उपलब्ध है, जो यह साबित करे कि इससे हिम्मत बढ़ती है या डर समाप्त होता है। इस आधार पर उन्होंने इसे भ्रामक विज्ञापन करार दिया।
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 का हवाला
परिवाद में उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 की धारा 2(28) का उल्लेख किया गया है। इस धारा के अनुसार, यदि कोई विज्ञापन किसी उत्पाद की गुणवत्ता, प्रकृति या उससे मिलने वाले लाभ के बारे में गलत या बढ़ा-चढ़ाकर जानकारी देता है, तो उसे ‘भ्रामक विज्ञापन’ माना जा सकता है।
एडवोकेट सिंह ने आरोप लगाया कि कंपनी और फिल्म स्टार मिलकर उपभोक्ताओं को गुमराह कर रहे हैं। उनका कहना है कि विज्ञापन में किए गए दावे वास्तविकता से मेल नहीं खाते।
कोर्ट ने प्रथम दृष्टया माना मामला सही
झालावाड़ उपभोक्ता न्यायालय ने प्रारंभिक सुनवाई में मामले को प्रथम दृष्टया सही पाया और परिवाद स्वीकार कर लिया। इसके बाद अभिनेता ऋतिक रोशन, पेप्सिको और वरुण बेवरेज लिमिटेड को डाक के माध्यम से नोटिस जारी कर एक महीने में जवाब देने के निर्देश दिए गए।
अब अदालत इस बात की जांच करेगी कि क्या विज्ञापन में किए गए दावे वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित हैं या केवल ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए प्रस्तुत किए गए हैं।
ब्रांड एंबेसडर की जिम्मेदारी पर सवाल
यह मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि किसी उत्पाद के प्रचार में ब्रांड एंबेसडर की क्या जिम्मेदारी होती है। क्या विज्ञापन में किए गए दावों की सत्यता की जांच करना केवल कंपनी का दायित्व है या प्रचार करने वाले सेलिब्रिटी की भी कुछ कानूनी जिम्मेदारी बनती है?
हाल के वर्षों में भ्रामक विज्ञापनों को लेकर सख्ती बढ़ी है और कई मामलों में सेलेब्रिटी एंडोर्समेंट को भी जांच के दायरे में लाया गया है।
एक महीने में देना होगा जवाब
एडवोकेट गुरुचरण सिंह के अनुसार, 20 जनवरी को परिवाद पेश किया गया था। तथ्यों की जांच के बाद 12 फरवरी को अदालत ने नोटिस जारी किए। अब सभी पक्षों को एक महीने के भीतर अपना पक्ष रखना होगा।
यदि अदालत को लगे कि विज्ञापन वास्तव में भ्रामक है, तो संबंधित पक्षों पर दंडात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है। यह मामला उपभोक्ता अधिकारों और विज्ञापन की पारदर्शिता के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
उपभोक्ताओं के लिए क्या संदेश?
यह प्रकरण उपभोक्ताओं को यह संदेश देता है कि यदि उन्हें किसी उत्पाद के विज्ञापन से गुमराह महसूस होता है, तो वे कानूनी रास्ता अपना सकते हैं। उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 के तहत अब ऐसे मामलों में त्वरित सुनवाई और कार्रवाई का प्रावधान है।
आने वाले समय में अदालत का फैसला यह तय करेगा कि विज्ञापन की सीमा क्या होनी चाहिए और ब्रांड एंबेसडर की जवाबदेही कितनी तय की जा सकती है।