Gold Silver Price Updates : सोना ₹1.55 लाख और चांदी ₹3.12 लाख पर, निवेशकों के लिए तेजी के संकेत
Gold Silver Price Updates : सोने के दाम आज ₹1.55 लाख प्रति 10 ग्राम और चांदी ₹3.12 लाख प्रति किलो पर पहुंच गए। रुपया कमजोरी, ग्लोबल टेंशन और केंद्रीय बैंकों की खरीदारी से कीमतें बढ़ीं। विशेषज्ञों के अनुसार, 2026 में सोना ₹1.90 लाख और चांदी ₹4 लाख तक जा सकती है।
Gold Silver Price Updates : सोने के दाम पहुंचे ऑलटाइम हाई पर
सोना आज ऑलटाइम हाई पर पहुंच गया। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, सोना सुबह 1,55,428 रुपए प्रति 10 ग्राम पर ओपन हुआ। दिन के दौरान इसकी कीमत में हल्की गिरावट आई, लेकिन अंत में सोने की कीमत 3,182 रुपए बढ़कर 1,54,310 रुपए प्रति 10 ग्राम पर बंद हुई। इससे पहले सोने का भाव 1,51,128 रुपए था।
वहीं, 1 किलो चांदी की कीमत में भी जोरदार उछाल देखा गया। चांदी 11,994 रुपए बढ़कर 3,11,705 रुपए प्रति किलो पर पहुंच गई, जबकि गुरुवार को यह 2,99,711 रुपए पर थी।
सिर्फ 23 दिनों में, सोना 21,115 रुपए और चांदी 81,285 रुपए महंगी हो चुकी है।
Gold Price : सोने में तेजी के मुख्य कारण
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1. ग्लोबल टेंशन और ‘ग्रीनलैंड’ विवाद
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की जिद और यूरोपीय देशों को टैरिफ की धमकी ने वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ा दी। जब दुनिया में ट्रेड वॉर का खतरा बढ़ता है, निवेशक शेयर बाजार से पैसा निकालकर सुरक्षित निवेश, यानी सोने की ओर रुख करते हैं।
2. रुपए की रिकॉर्ड कमजोरी
भारत में सोने की कीमत केवल वैश्विक स्तर पर नहीं, बल्कि डॉलर-रुपया एक्सचेंज रेट पर भी निर्भर करती है। आज रुपया डॉलर के मुकाबले ₹91.10 के ऑलटाइम लो पर है। LKP सिक्योरिटीज के जतिन त्रिवेदी के अनुसार, रुपए की कमजोरी से अंतरराष्ट्रीय सोने की लैंडिंग कॉस्ट भारत में बहुत महंगी हो गई। इसका असर घरेलू बाजार में सीधे देखा जा रहा है।
3. केंद्रीय बैंकों की भारी खरीदारी
दुनिया भर के केंद्रीय बैंक, जैसे RBI, अपने विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखने के लिए सोने का स्टॉक बढ़ा रहे हैं। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के अनुसार, 2025 में रिकॉर्ड खरीदारी के बाद 2026 की शुरुआत में भी मांग मजबूत बनी हुई है। सप्लाई कम और मांग ज्यादा होने से कीमतें बढ़ रही हैं।
2026 में संभावित रुझान
रिसर्च हेड डॉ. रेनिशा चैनानी के अनुसार, यदि अमेरिकी टैरिफ और मध्य पूर्व में तनाव बढ़ता है, तो सोने की कीमत 2026 में ₹1,90,000 प्रति 10 ग्राम तक जा सकती है। चांदी की कीमत भी वैश्विक मांग और औद्योगिक इस्तेमाल को देखते हुए ₹4,00,000 प्रति किलो तक पहुंचने की संभावना है।
2025 में सोना और चांदी में रिकॉर्ड तेजी

पिछले साल यानी 2025 में, सोने की कीमत 75% बढ़ी। 31 दिसंबर 2024 को 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 76,162 रुपए था, जो 31 दिसंबर 2025 को 1,33,195 रुपए पर पहुंच गया।
चांदी का भाव इस दौरान 167% बढ़ा। 31 दिसंबर 2024 को चांदी का भाव 86,017 रुपए प्रति किलो था, जो 31 दिसंबर 2025 को 2,30,420 रुपए प्रति किलो हो गया।
Silver Price : चांदी में तेजी के कारण
1. इंडस्ट्रियल डिमांड
सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) में चांदी का भारी इस्तेमाल बढ़ गया है। अब चांदी केवल ज्वेलरी नहीं, बल्कि एक आवश्यक कच्चा माल बन गई है।
2. अमेरिकी टैरिफ का डर
अमेरिकी कंपनियां चांदी का भारी स्टॉक जमा कर रही हैं। वैश्विक सप्लाई में कमी से चांदी की कीमतें ऊपर चढ़ी हैं।
3. मैन्युफैक्चरर होड़
उत्पादन रुकने का डर है, इसलिए निर्माता पहले से ही चांदी खरीद रहे हैं। इस वजह से आने वाले महीनों में तेजी जारी रहने की संभावना है।
विशेषज्ञों की राय
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मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज: 2026 में चांदी ₹3.20 लाख प्रति किलो तक पहुंच सकती है। सोलर और EV डिमांड देखते हुए हर गिरावट पर खरीदारी की सलाह।
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सैमको सिक्योरिटीज: टेक्निकल ब्रेकआउट और मजबूत वैश्विक संकेतों के आधार पर चांदी ₹3.94 लाख प्रति किलो तक जा सकती है।
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नीलेश सुराना (कमोडिटी एक्सपर्ट): ग्रीन एनर्जी की बढ़ती मांग और अमेरिकी ब्याज दर कटौती से चांदी $100 प्रति औंस तक जा सकती है (लगभग ₹3.5-4 लाख)।
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पोनमुडी आर (CEO, एनरिच मनी): चांदी में लंबी अवधि की तेजी जारी रहेगी; निवेशक हर गिरावट का फायदा उठाएं।
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रॉबर्ट कियोसाकी (ग्लोबल इन्वेस्टर): डॉलर कमजोर और महंगाई बढ़ने से चांदी साल 2026 में $200 प्रति औंस के स्तर तक जा सकती है।
निवेशकों के लिए टिप्स
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सोने और चांदी में निवेश लंबी अवधि के लिए लाभकारी साबित हो सकता है।
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छोटे उतार-चढ़ाव का फायदा उठाकर पोर्टफोलियो को मजबूत करें।
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वैश्विक तनाव, डॉलर रेट और केंद्रीय बैंकों की गतिविधियों पर नज़र रखें।
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सोलर, EV और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में चांदी की मांग को ध्यान में रखें।
निष्कर्ष:
सोना और चांदी की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। वैश्विक तनाव, रुपए कमजोरी, केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और औद्योगिक मांग के चलते 2026 में ये धातुएँ निवेशकों के लिए आकर्षक विकल्प बन सकती हैं।

