Art Exhibition : गंगाजल से बनी शिव नगरी की पेंटिंग आकर्षण, विदेशी कलाकारों ने दिए पर्यावरण और पशु संरक्षण संदेश
Art Exhibition : जयपुर के जवाहर कला केंद्र में आयोजित ‘सर्जना-2026’ आर्ट एग्जीबिशन में देश-विदेश के कलाकारों की 110 कलाकृतियां प्रदर्शित की गईं। गंगाजल से बनी शिव नगरी की पेंटिंग सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र रही, वहीं पानी बचाने और गाय संरक्षण जैसे सामाजिक संदेश भी कला के माध्यम से प्रस्तुत किए गए।
Art Exhibition : गंगाजल से बनी शिव नगरी की पेंटिंग बनी आकर्षण का केंद्र, विदेशी कलाकारों ने दिए सामाजिक संदेश
जयपुर में आयोजित अंतरराष्ट्रीय आर्ट एग्जीबिशन में देश-विदेश के कलाकारों और स्टूडेंट्स की पेंटिंग्स कला प्रेमियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बन गई हैं। इस प्रदर्शनी में गंगाजल से बनाई गई शिव नगरी की पेंटिंग सबसे ज्यादा चर्चा में रही, जिसने लोगों का ध्यान अपनी अनोखी कला शैली और धार्मिक भावनाओं के कारण खींचा।
यह दो दिवसीय आर्ट एग्जीबिशन ‘सर्जना-2026’ में देश और विदेश के कलाकारों तथा 13 यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स द्वारा तैयार की गई कुल 110 कलाकृतियां प्रदर्शित की गई हैं। इन कलाकृतियों में पर्यावरण संरक्षण, पानी बचाने और पशु-प्रेम जैसे महत्वपूर्ण सामाजिक संदेश भी शामिल हैं।
गंगाजल से बनाई शिव नगरी की अनोखी पेंटिंग

प्रदर्शनी में सबसे अधिक चर्चा बनारस की शिव नगरी की पेंटिंग की हो रही है, जिसे गंगाजल से तैयार किया गया है। इस अनोखी पेंटिंग को कलाकार संतोष कुमार शांडिल्य ने बनाया है, जो मूल रूप से बनारस के रहने वाले हैं।
कलाकार ने बताया कि वे वर्ष 2014 से लगातार अपनी सभी पेंटिंग्स गंगाजल से बना रहे हैं। उनके अनुसार, बनारस केवल एक शहर नहीं, बल्कि स्वयं भगवान शिव का स्वरूप माना जाता है। इसीलिए जब वे गंगाजल से पेंटिंग बनाते हैं, तो उन्हें ऐसा लगता है मानो वे भगवान शिव का रुद्राभिषेक कर रहे हों।
उन्होंने बताया कि रुद्राभिषेक की प्रक्रिया में भगवान शिव पर लगातार जल चढ़ाया जाता है। इसी प्रकार वे लगभग 6 से 7 दिनों तक लगातार गंगाजल से पेंटिंग तैयार करते हैं। इस पेंटिंग में बनारस के घाट, सीढ़ियां, सन्यासी, नंदी और भगवान शिव का चित्रण किया गया है।
यह पेंटिंग पूरी तरह धार्मिक और सांस्कृतिक भावनाओं से जुड़ी हुई है और इसे बिक्री के लिए उपलब्ध नहीं रखा गया है। यह पेंटिंग पूर्णिमा विश्वविद्यालय और जयपुर आर्ट समिट की विशेष प्रस्तुति के रूप में प्रदर्शनी में शामिल की गई है।
पानी बचाने का संदेश देती अनोखी पेंटिंग

प्रदर्शनी में मुंबई के 90 वर्षीय प्रसिद्ध कार्टूनिस्ट आबिद सूती की पेंटिंग भी लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही है। उन्होंने एक साधारण नल की पेंटिंग के माध्यम से पानी बचाने का महत्वपूर्ण संदेश दिया है।
इस पेंटिंग में नल से निकलने वाली पानी की धारा को पेड़ की जड़ों के समान दर्शाया गया है, जिससे यह संदेश दिया गया है कि पानी जीवन का आधार है। यदि पानी खत्म हो गया, तो पेड़-पौधे, पक्षी और मानव जीवन भी समाप्त हो जाएगा।
आबिद सूती ने बताया कि पानी बचाने की उनकी मुहिम को प्रधानमंत्री के ‘मन की बात’ कार्यक्रम में भी शामिल किया गया था। उनकी इस पहल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहा गया है और संयुक्त राष्ट्र संगठन द्वारा भी इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया गया है।
दक्षिण कोरिया के कलाकार ने दिया गाय संरक्षण का संदेश

प्रदर्शनी में दक्षिण कोरिया के कलाकार ऑचुल ह्वांग की पेंटिंग भी विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। उन्होंने अपनी कला के माध्यम से गाय को बचाने और पशुओं के प्रति संवेदनशील रहने का संदेश दिया है।
उन्होंने बताया कि जब वे भारत घूमने आए, तो उन्होंने देखा कि यहां गायें सड़कों पर स्वतंत्र रूप से घूमती हैं। यह दृश्य उन्हें अलग और भावनात्मक लगा। इसी अनुभव से प्रेरित होकर उन्होंने यह पेंटिंग बनाई, ताकि लोगों को पशुओं और पर्यावरण के प्रति प्रेम और जिम्मेदारी का संदेश दिया जा सके।
उनका कहना है कि इंसान होने के नाते हमें केवल मनुष्यों ही नहीं, बल्कि अपने आसपास के सभी जीव-जंतुओं और पर्यावरण का सम्मान करना चाहिए।
रामायण के प्रसंगों को दर्शाती फड़ पेंटिंग बनी आकर्षण

प्रदर्शनी में अलवर की कलाकार कंचन द्वारा बनाई गई रामायण श्रृंखला की फड़ पेंटिंग भी दर्शकों को आकर्षित कर रही है। इस पेंटिंग में रामायण के विभिन्न प्रसंगों को जीवंत चित्रों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है।
कलाकार ने बताया कि उन्होंने पहले प्लाईवुड और कॉटन कपड़े का बेस तैयार किया और फिर पारंपरिक फड़ पेंटिंग शैली में पूरी रामायण की श्रृंखला तैयार की। उनका उद्देश्य है कि लोग केवल टीवी या किताबों के माध्यम से ही नहीं, बल्कि चित्रकला के माध्यम से भी रामायण के प्रसंगों को समझ सकें।
अंतरराष्ट्रीय कलाकारों की भागीदारी से खास बनी प्रदर्शनी
इस आर्ट एग्जीबिशन में केवल भारत ही नहीं, बल्कि दक्षिण कोरिया, चीन और श्रीलंका के 30 से अधिक कलाकारों ने भाग लिया। इसके अलावा देश की 12 अन्य यूनिवर्सिटीज के स्टूडेंट आर्टिस्ट्स ने भी अपनी रचनात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
इन कलाकृतियों में पेंटिंग्स के साथ-साथ पत्थर की सुंदर मूर्तियां और वेस्ट मटेरियल से बनाए गए आर्ट इंस्टॉलेशन भी शामिल हैं। इससे यह प्रदर्शनी कला और पर्यावरण संरक्षण का अनोखा संगम बन गई है।
निष्कर्ष: कला के माध्यम से सामाजिक संदेश देने का प्रयास
जयपुर में आयोजित यह अंतरराष्ट्रीय आर्ट एग्जीबिशन केवल कला प्रदर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज को जागरूक करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम भी बन गया है।
गंगाजल से बनी शिव नगरी की पेंटिंग धार्मिक आस्था और संस्कृति का प्रतीक बनी, वहीं पानी बचाने और पशु संरक्षण जैसे संदेशों ने लोगों को पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार बनने की प्रेरणा दी।
इस प्रकार ‘सर्जना-2026’ आर्ट एग्जीबिशन ने कला, संस्कृति और सामाजिक जागरूकता को एक मंच पर लाकर एक नई मिसाल पेश की है।
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