Farah Khan @61 Birthday Special: कर्ज, कंगाली और संघर्ष से सुपरस्टार डायरेक्टर बनने तक की कहानी
Farah Khan फराह खान का जीवन संघर्ष, कर्ज और गरीबी से भरा रहा। पिता के जनाजे के लिए पैसे नहीं थे, घर का फर्नीचर तक बिक गया। जानिए कैसे बैकग्राउंड डांसर से फराह खान बनीं बॉलीवुड की सुपरस्टार कोरियोग्राफर और हिट डायरेक्टर।
Farah Khan Life Story: कर्ज, कंगाली और संघर्ष से स्टार बनने तक
आज फराह खान बॉलीवुड की उन शख्सियतों में गिनी जाती हैं, जिन्होंने कोरियोग्राफर और डायरेक्टर—दोनों रूपों में इतिहास रचा। उनकी फिल्में, गाने और स्टाइल आज भी लोगों को याद हैं। लेकिन इस सफलता के पीछे एक ऐसा दर्दनाक संघर्ष छिपा है, जिसे जानकर किसी की भी आंखें नम हो जाएं।
फराह खान की जिंदगी कभी आलीशान घर, लग्जरी कार और नाम-शोहरत से शुरू हुई थी, लेकिन हालात ऐसे बदले कि पिता के जनाजे के लिए भी पैसे नहीं थे।
Farah Khan : फिल्मी परिवार में जन्म, लेकिन किस्मत ने लिया कड़ा इम्तिहान
फराह खान का जन्म 9 जनवरी 1965 को हुआ। उनके पिता कामरान खान हिंदी सिनेमा में स्टंटमैन रह चुके थे। मां मेनका ईरानी, मशहूर लेखिका हनी ईरानी की बहन थीं, जो जावेद अख्तर की पहली पत्नी रह चुकी हैं। परिवार फिल्मी था, पैसा था, शोहरत थी। 5 कमरों का बड़ा घर, कई प्रॉपर्टी, घर में इंपाला कार, इंडस्ट्री में पहचान , लेकिन यह सुख ज्यादा दिनों तक नहीं टिक पाया।
Farah Khan : एक फिल्म ने बदल दी पूरी जिंदगी
जब फराह महज 5 साल की थीं, तब उनके पिता कामरान खान ने अपनी सारी जमापूंजी लगाकर फिल्म ‘ऐसा भी होता है’ (1971) बनाई। फिल्म बुरी तरह फ्लॉप हो गई। इसके बाद नुकसान की भरपाई के लिए उन्होंने कुछ बी-ग्रेड फिल्में बनाईं, लेकिन एक-एक कर सब असफल रहीं। यहीं से परिवार पर कर्ज का पहाड़ टूट पड़ा।
लग्जरी से कंगाली तक का सफर

फिल्मों की नाकामी के बाद हालात बदतर होते चले गए। पहले घर की गाड़ियां बिकीं, फिर प्रॉपर्टी और गहने, इसके बाद ग्रामोफोन और फर्नीचर तक बिक गया, कभी इंपाला कार में घूमने वाला परिवार अब रोजमर्रा की जरूरतों के लिए जूझ रहा था।
शराब, झगड़े और डर में गुजरा बचपन
लगातार असफलताओं से टूट चुके कामरान खान ने शराब का सहारा लेना शुरू कर दिया। सुबह से शराब शुरू हो जाती और शाम तक घर का माहौल झगड़ों में बदल जाता। कई बार मां घर छोड़कर चली जातीं, पिता नशे में बच्चों पर गुस्सा निकालते, घर में डर और तनाव का माहौल रहता, इसी माहौल में फराह और उनके छोटे भाई साजिद खान का बचपन गुजरा।
डांस का शौक, लेकिन हालात ने छीना सपना
बचपन में फराह को डांस बेहद पसंद था। 3-4 साल की उम्र में ही वो मेहमानों के सामने हेलन की तरह तैयार होकर डांस किया करती थीं। एक बार मशहूर पहलवान-एक्टर दारा सिंह उनके घर आए। फराह का डांस देखकर उन्होंने पिता से कहा—
“कामरान, तुम्हारी बेटी को फिल्मों में लाओ।” लेकिन पिता ने सख्ती से कहा— “कभी नहीं, अभी छोटी है।” कुछ समय बाद हालात ऐसे हो गए कि घर में गाना बजाने का साधन तक नहीं बचा और फराह ने डांस छोड़ दिया।
माइकल जैक्सन से मिली नई दिशा
किशोरावस्था में फराह के पड़ोसी तेज सप्रू के घर वीडियो कैसेट आए।
उन्हीं में एक कैसेट था—माइकल जैक्सन का ‘Thriller’।
फराह रोज वहां जाकर वीडियो देखतीं और माइकल जैक्सन की नकल उतारती थीं।
यहीं से उनके अंदर फिर से डांसर बनने की आग जली।
वो पिता से छिपकर घर में डांस की प्रैक्टिस करने लगीं।
मां का घर छोड़ना और टूटा हुआ परिवार

शराब और झगड़ों से तंग आकर मां ने घर छोड़ दिया और बहन हनी ईरानी के पास रहने लगीं।
फराह, साजिद और मां एक छोटे से कमरे में रहने लगे।
कभी आंटी के घर, कभी अपने घर—
इसी तरह फराह का बचपन टुकड़ों में बंटकर गुजरा।
रोज 30 रुपए में चलता था घर
फराह ने एक पॉडकास्ट में बताया था कि उनके घर शाम को पिता के दोस्त ताश खेलने आते थे। कोई 5 रुपए छोड़ जाता, कोई 10 रुपए, दिनभर में मुश्किल से 30 रुपए इकट्ठा होते, जिससे दूध, राशन, अगला दिन निकलता
पिता का निधन, जेब में थे सिर्फ 30 रुपए
फराह 17 साल की थीं, जब उनके पिता का निधन हो गया।
घर में मातम से ज्यादा चिंता इस बात की थी कि जनाजे का इंतजाम कैसे होगा।
पिता की जेब में मिले सिर्फ 30 रुपए।
फराह और साजिद रिक्शे से रिश्तेदारों के घर गए और पैसे उधार मांगे।
फराह ने खुद बताया कि इस समय सलीम खान ने उनकी मदद की और न सिर्फ जनाजे के लिए पैसे दिए, बल्कि कई दिनों का राशन भी दिलाया।
जिम्मेदारी फराह के कंधों पर आ गई
अब घर की पूरी जिम्मेदारी फराह पर थी। भाई साजिद जुहू बीच पर डांस करके कुछ पैसे कमा लेते थे। फराह एक डांस ग्रुप से जुड़ीं और फिल्मों में बैकग्राउंड डांसर बनने लगीं।
पहला बड़ा मौका: फिल्म ‘जलवा’
साल 1987 में फराह को फिल्म ‘जलवा’ में डांसर का मौका मिला।
गाने ‘Feeling Hot Hot Hot’ में वो अर्चना पूरन सिंह के पीछे डांस करती नजर आईं।
डांसर के साथ रखी असिस्टेंट डायरेक्टर बनने की शर्त
फिल्मों में काम करते हुए फराह सेट पर डांसर्स की रिहर्सल भी करवाती थीं। यहीं उनकी मुलाकात डायरेक्टर मंसूर अली खान से हुई। उन्होंने फराह को डांसर बनने का ऑफर दिया, लेकिन फराह ने कहा— “मुझे डांसर के साथ असिस्टेंट डायरेक्टर भी बनाइए।” मंसूर अली मान गए और फराह फिल्म ‘जो जीता वही सिकंदर’ से जुड़ गईं।
‘जो जीता वही सिकंदर’ ने बदली किस्मत
फिल्म की कोरियोग्राफी सरोज खान कर रही थीं। जब उनके पास समय नहीं रहा, तो फराह को स्टेप्स तैयार करने का मौका मिला।फराह के स्टेप्स इतने पसंद किए गए कि फिल्म के बाकी गाने भी उन्हें मिल गए , इंडस्ट्री में उनके काम की चर्चा होने लगी, यहीं से फराह खान एक मशहूर कोरियोग्राफर बन गईं।
कोरियोग्राफर से डायरेक्टर बनने का सपना

20 साल की उम्र में फराह ने फिल्म ‘अर्जुन’ देखकर तय कर लिया था कि वो डायरेक्टर बनेंगी। सालों बाद उन्होंने शाहरुख खान को ‘मैं हूं ना’ की कहानी सुनाई। शाहरुख को स्क्रिप्ट इतनी पसंद आई कि उन्होंने फिल्म में काम करने के साथ-साथ उसे प्रोड्यूस भी किया।
‘मैं हूं ना’ और नई पहचान
साल 2004 में रिलीज हुई ‘मैं हूं ना’ ने फराह को सफल डायरेक्टर , बॉलीवुड की पावरफुल महिला फिल्ममेकर बना दिया।
निष्कर्ष
फराह खान की कहानी सिर्फ सफलता की नहीं, बल्कि कर्ज, गरीबी, संघर्ष और हिम्मत की कहानी है। पिता के जनाजे के लिए कर्ज लेने वाली लड़की ने आज बॉलीवुड को कई सुपरहिट फिल्में और यादगार गाने दिए हैं, यह कहानी हर उस इंसान के लिए प्रेरणा है, जो हालात से हार मानने की सोच रहा है।

