Sebi Ipo Approval : ड्यूरोफ्लेक्स समेत 5 कंपनियों को सेबी की मंजूरी, IPO से जुटाएंगी सैकड़ों करोड़ रुपये
Sebi Ipo Approval : सेबी ने ड्यूरोफ्लेक्स, हेक्सागन न्यूट्रिशन, विरूपाक्ष ऑर्गेनिक्स, प्रीमियर इंडस्ट्रियल और ओम पावर ट्रांसमिशन के आईपीओ को मंजूरी दे दी है। ये कंपनियां फ्रेश इश्यू और ऑफर फॉर सेल के जरिए फंड जुटाएंगी। जानिए आईपीओ की पूरी डिटेल, फंड उपयोग और निवेशकों के लिए क्या है अहम जानकारी।
Sebi Ipo Approval : सेबी ने 5 कंपनियों के IPO को दी हरी झंडी
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने 13 फरवरी को पांच कंपनियों के प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) प्रस्तावों को मंजूरी दे दी है। सेबी द्वारा ‘ऑब्जर्वेशन’ जारी किए जाने के बाद अब ये कंपनियां आने वाले महीनों में अपना आईपीओ बाजार में ला सकेंगी।
जिन कंपनियों को मंजूरी मिली है, उनमें Duroflex, Hexagon Nutrition, Virupaksha Organics, Premier Industrial Corporation और Om Power Transmission शामिल हैं।
ये सभी कंपनियां फ्रेश इश्यू और ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए बाजार से फंड जुटाने की तैयारी में हैं।
1. Duroflex IPO: कर्ज चुकाने और क्षमता विस्तार पर फोकस
ड्यूरोफ्लेक्स 183.6 करोड़ रुपये के नए शेयर जारी करेगी। इसके साथ ही मौजूदा निवेशक और प्रमोटर्स ऑफर फॉर सेल के तहत 2.25 करोड़ शेयर बेचेंगे।
आईपीओ से जुटाई गई रकम का इस्तेमाल कंपनी कर्ज चुकाने और अपनी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाने में करेगी।
ड्यूरोफ्लेक्स एक प्रमुख स्लीप सॉल्यूशंस ब्रांड है, जो मैट्रेस, फोम, बेड और पिलो का निर्माण करती है। ऑर्थोपेडिक गद्दों के क्षेत्र में इसकी मजबूत पहचान है। कंपनी करीब 50 वर्षों से इस सेक्टर में सक्रिय है और देशभर में इसका वितरण नेटवर्क मौजूद है।
2. Virupaksha Organics IPO: पूरी तरह फ्रेश इश्यू
विरूपाक्ष ऑर्गेनिक्स का आईपीओ पूरी तरह फ्रेश इश्यू होगा। कंपनी लगभग 740 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही है।
इससे मिलने वाला पूरा फंड कंपनी के पास जाएगा। इसका उपयोग वर्किंग कैपिटल जरूरतों और सामान्य कॉर्पोरेट उद्देश्यों के लिए किया जाएगा।
यह एक रिसर्च-आधारित फार्मास्युटिकल कंपनी है, जो एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रेडिएंट्स (API) और इंटरमीडिएट्स का निर्माण करती है। ये दवाइयों के निर्माण में उपयोग किए जाते हैं और घरेलू के साथ-साथ निर्यात बाजार में भी मांग रखते हैं।
3. Premier Industrial IPO: वेल्डिंग इंडस्ट्री पर फोकस
प्रीमियर इंडस्ट्रियल कॉरपोरेशन अपने आईपीओ के तहत 2.25 करोड़ नए शेयर जारी करेगी। साथ ही 54 लाख शेयर ऑफर फॉर सेल के जरिए बेचे जाएंगे।
कंपनी वेल्डिंग इंडस्ट्री के लिए कच्चा माल जैसे फेरो अलॉय पाउडर, मेटल पाउडर और विभिन्न प्रकार के वायर बनाती है।
वेल्डिंग और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में बढ़ती मांग को देखते हुए कंपनी विस्तार की दिशा में कदम बढ़ा रही है। आईपीओ से जुटाई गई राशि कंपनी की उत्पादन क्षमता और बिजनेस विस्तार में सहायक होगी।
4. Om Power Transmission IPO: इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में मजबूती
ओम पावर ट्रांसमिशन 90 लाख नए शेयर जारी करेगी। इसके अलावा प्रमोटर्स 10 लाख शेयर ऑफर फॉर सेल के जरिए बेचेंगे।
यह कंपनी इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग और कॉन्ट्रैक्टिंग सेवाएं प्रदान करती है। पावर ट्रांसमिशन लाइनों, सब-स्टेशनों के निर्माण और उनके रखरखाव में इसका अनुभव है।
देश में बिजली इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार के साथ इस सेक्टर में संभावनाएं बढ़ रही हैं, जिसका फायदा कंपनी को मिल सकता है।
5. Hexagon Nutrition IPO: पूरी तरह OFS
हेक्सागन न्यूट्रिशन का आईपीओ पूरी तरह ऑफर फॉर सेल होगा। कंपनी के मौजूदा शेयरहोल्डर्स 3.08 करोड़ शेयरों की बिक्री करेंगे।
इस आईपीओ से कंपनी के पास कोई नया फंड नहीं आएगा। जो राशि मिलेगी, वह शेयर बेचने वाले निवेशकों के पास जाएगी।
हेक्सागन न्यूट्रिशन बच्चों के लिए हेल्थ ड्रिंक्स और क्लिनिकल न्यूट्रिशन फूड बनाती है। साथ ही यह अमूल और डाबर जैसी बड़ी कंपनियों को न्यूट्रिशनल प्रीमिक्स की सप्लाई भी करती है।
सेबी की मंजूरी का क्या मतलब है?
जब कोई कंपनी बाजार से पैसा जुटाने के लिए आईपीओ लाना चाहती है, तो उसे सेबी के पास ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) जमा करना होता है।
सेबी यह जांच करता है कि कंपनी ने निवेशकों को सभी जरूरी जानकारियां सही और पारदर्शी तरीके से दी हैं या नहीं।
सेबी की ‘ऑब्जर्वेशन’ मिलने का मतलब है कि रेगुलेटर को दस्तावेजों में कोई बड़ी आपत्ति नहीं है। इसके बाद कंपनी आईपीओ की तारीख और प्राइस बैंड तय कर सकती है।
नॉलेज पार्ट: फ्रेश इश्यू और OFS में अंतर
फ्रेश इश्यू
इसमें कंपनी नए शेयर जारी करती है। आईपीओ से मिलने वाला पैसा सीधे कंपनी के खाते में जाता है। इसका उपयोग बिजनेस विस्तार, कर्ज चुकाने या नई परियोजनाओं में निवेश के लिए किया जाता है।
ऑफर फॉर सेल (OFS)
इसमें कंपनी के मौजूदा निवेशक या प्रमोटर्स अपने शेयर बेचते हैं। इससे मिलने वाला पैसा कंपनी को नहीं बल्कि शेयर बेचने वाले निवेशकों को मिलता है।
निवेशकों के लिए क्या है अहम?
निवेशकों को किसी भी आईपीओ में निवेश से पहले कंपनी की वित्तीय स्थिति, कर्ज, ग्रोथ संभावनाएं और उद्योग की स्थिति का विश्लेषण करना चाहिए।
फ्रेश इश्यू वाली कंपनियों में जुटाई गई रकम का उपयोग किस उद्देश्य से होगा, यह देखना जरूरी है। वहीं पूरी तरह OFS वाले आईपीओ में यह समझना महत्वपूर्ण है कि प्रमोटर्स या निवेशक अपनी हिस्सेदारी क्यों घटा रहे हैं।
इन पांच कंपनियों के आईपीओ से बाजार में नई हलचल देखने को मिल सकती है। अब निवेशकों की नजर इनकी आईपीओ तारीख और प्राइस बैंड पर रहेगी।

