Domestic Flight Fare : 23 मार्च से घरेलू फ्लाइट किराया बढ़ा सकेंगी एयरलाइंस, सरकार ने हटाई सीमा
हवाई यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए बड़ा बदलाव सामने आया है। केंद्र सरकार ने घरेलू फ्लाइट्स के किराए पर लगी अधिकतम सीमा (फेयर कैप) को हटाने का फैसला किया है। अब एयरलाइंस कंपनियां मांग और उपलब्धता के आधार पर टिकट कीमतें तय कर सकेंगी, जिससे आने वाले दिनों में किराए में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
क्या है सरकार का नया फैसला
सिविल एविएशन मिनिस्ट्री ने आदेश जारी करते हुए कहा कि 23 मार्च 2026 से एयरलाइंस को किराया तय करने की पूरी स्वतंत्रता होगी। पहले सरकार ने अधिकतम किराया सीमा तय कर रखी थी, जिसे अब खत्म कर दिया गया है।
मंत्रालय के अनुसार, अब उड़ानों का संचालन सामान्य हो गया है और सेक्टर की क्षमता पूरी तरह बहाल हो चुकी है, इसलिए यह फैसला लिया गया।
इंडिगो संकट के बाद लगाया गया था फेयर कैप

पिछले साल दिसंबर में एयरलाइन कंपनी इंडिगो को स्टाफ की कमी के कारण भारी उड़ान रद्द करनी पड़ी थीं। इसका मुख्य कारण DGCA द्वारा लागू किया गया नया फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (FDTL) नियम था।
इस संकट के दौरान फ्लाइट्स की कमी के कारण टिकट कीमतें आसमान छूने लगी थीं। यात्रियों को सामान्य से कई गुना अधिक किराया देना पड़ रहा था। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने अधिकतम किराया ₹18,000 तय किया था।
टिकट कीमतों में भारी उछाल देखा गया
इंडिगो की फ्लाइट्स के कैंसिल होने के बाद बाजार में टिकट की मांग बढ़ गई थी। सीमित विकल्प होने के कारण यात्रियों को महंगे टिकट खरीदने पड़े।
बुकिंग प्लेटफॉर्म MakeMyTrip के अनुसार:
- दिल्ली से बेंगलुरु का किराया ₹40,000 से ₹80,000 तक पहुंच गया
- दिल्ली से मुंबई का किराया ₹36,000 से ₹56,000 तक गया
- दिल्ली से चेन्नई का किराया ₹62,000 से ₹82,000 तक दर्ज हुआ
यह सामान्य किराए से लगभग 10 गुना अधिक था।
सरकार रखेगी किराए पर नजर
हालांकि सरकार ने फेयर कैप हटा दी है, लेकिन मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि एयरलाइंस को जिम्मेदारी से किराया तय करना होगा।
मंत्रालय ने कहा कि:
- किराया पारदर्शी और उचित होना चाहिए
- यात्रियों के हितों का ध्यान रखा जाए
- अत्यधिक बढ़ोतरी को गंभीरता से लिया जाएगा
सरकार रियल टाइम में किराए के रुझानों पर नजर रखेगी।
ATF कीमतों का भी पड़ेगा असर

केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने कहा कि मौजूदा वैश्विक हालात और संभावित युद्ध के कारण एविएशन सेक्टर प्रभावित हो सकता है।
एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF), जो एयरलाइंस की लागत का 35–45% होता है, उसकी कीमतों में बढ़ोतरी से टिकट महंगे हो सकते हैं।
उन्होंने बताया कि ATF की कीमतें हर महीने की पहली तारीख को तय होती हैं, इसलिए इसका असर 1 अप्रैल से दिखाई दे सकता है।
यात्रियों के लिए नए नियम भी लागू
सरकार ने हाल ही में यात्रियों की सुविधा के लिए कुछ नए नियम भी लागू किए हैं:
- हर फ्लाइट में कम से कम 60% सीटें बिना एक्स्ट्रा चार्ज के उपलब्ध होंगी
- एक ही PNR पर यात्रा करने वाले यात्रियों को साथ या पास की सीटें दी जाएंगी
इन नियमों से यात्रियों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।
यात्रियों पर क्या होगा असर
फेयर कैप हटने के बाद अब टिकट की कीमतें पूरी तरह मांग और आपूर्ति पर निर्भर करेंगी।
- पीक सीजन में किराया बढ़ सकता है
- आखिरी समय में टिकट और महंगे हो सकते हैं
- कम मांग वाले समय में सस्ते टिकट मिलने की संभावना भी रहेगी
यात्रियों को अब पहले से प्लानिंग करके टिकट बुक करना ज्यादा फायदेमंद होगा।
निष्कर्ष
सरकार का यह फैसला एविएशन सेक्टर को अधिक स्वतंत्रता देने की दिशा में एक बड़ा कदम है। हालांकि इससे यात्रियों पर किराए का दबाव बढ़ सकता है, लेकिन निगरानी और नए नियमों के जरिए संतुलन बनाए रखने की कोशिश की जा रही है।
आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि एयरलाइंस इस स्वतंत्रता का उपयोग किस तरह करती हैं और इसका आम यात्रियों पर क्या असर पड़ता है।
READ MORE : कासगंज जिला अस्पताल में पहली बार हार्ट अटैक मरीज को 50 हजार का इंजेक्शन मुफ्त मिला