Jaipur Updates : दहेज-रहित विवाह की मिसाल, महला डोबर परिवार ने लौटाई राशि, शिक्षा को दिए ₹3.50 लाख
Jaipur Updates : जयपुर में महला डोबर परिवार ने दहेज-रहित विवाह कर समाज को नई सोच का संदेश दिया। सोमेन्द्र सिंह और अनिशा कंवर के विवाह में टीका-अगुवानी की राशि लौटा दी गई और भीलवाड़ा छात्रावास को ₹3.50 लाख का सहयोग प्रदान किया गया। आयोजन बना सामाजिक परिवर्तन की प्रेरणा।
Jaipur Updates : दहेज-रहित विवाह की अनूठी मिसाल
जयपुर : राजस्थान की राजधानी जयपुर में एक ऐसा विवाह संपन्न हुआ जिसने सामाजिक परंपराओं को नई दिशा देने का काम किया है। महला डोबर परिवार (हाल निवासी जयपुर) ने अपने पौत्र सोमेन्द्र सिंह (पुत्र प्रताप सिंह डोबर) का विवाह पूर्णतः दहेज-रहित सम्पन्न कर समाज के सामने एक प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया। इस विवाह ने यह संदेश दिया कि बेटी का सम्मान ही सबसे बड़ा दहेज है, धन-दौलत नहीं।
“दुल्हन ही सबसे बड़ा दहेज” – सोच जो बनी प्रेरणा
परिवार ने स्पष्ट शब्दों में कहा—
“हमारे लिए दुल्हन ही सबसे बड़ा दहेज है। हमें कन्या और कलश के अलावा कुछ भी स्वीकार नहीं।”
आज के समय में जहां दहेज और टीका-अगुवानी के नाम पर लाखों रुपये का लेन-देन आम बात हो चुकी है, वहीं इस परिवार ने परंपरा के नाम पर दी जाने वाली धनराशि को विनम्रतापूर्वक लौटा कर समाज को सकारात्मक संदेश दिया। वधू पक्ष द्वारा टीका एवं अगुवानी स्वरूप दी जाने वाली संपूर्ण राशि वापस कर दी गई और मात्र ₹100 शगुन के रूप में स्वीकार किए गए।
यह निर्णय केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध एक सशक्त कदम था।
विवाह समारोह: परंपरा और संस्कारों का संगम
सोमेन्द्र सिंह की बारात कान सिंह रोड (ठि. तिलोली, हाल मंगलवाड़ा चौराहा) से होते हुए चित्तौड़गढ़ स्थित होटल रतन पैलेस पहुंची, जहां श्री सांवरिया सेठ के सान्निध्य में उनका विवाह अनिशा कंवर के साथ विधि-विधान से सम्पन्न हुआ।
विवाह समारोह में परंपरागत रीति-रिवाजों का पालन किया गया, लेकिन दहेज जैसी सामाजिक बुराई से पूर्णतः दूरी रखी गई। यह आयोजन सादगी, सम्मान और सामाजिक चेतना का अनूठा उदाहरण बनकर उभरा।
Jaipur Updates : परिवार से जुड़े प्रतिष्ठित नाम
इस आयोजन में परिवार से जुड़े कई प्रतिष्ठित नामों की उपस्थिति रही। श्री द्वारिका बिल्ड स्टेट ग्रुप, जयपुर और श्री द्वारिका कालोनाइजर, मालपुरा जैसे संस्थानों से जुड़े सदस्यों की सामाजिक सोच इस अवसर पर स्पष्ट रूप से दिखाई दी।
समारोह में इन्द्र सिंह थानेदार, राम सिंह थानेदार, महेंद्र सिंह (राजस्थान पुलिस), सुरेन्द्र सिंह (निदेशक, के.पी. बालाजी ग्रुप) सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। सभी ने इस पहल की खुले मन से सराहना की और इसे समाज के लिए प्रेरणास्रोत बताया।
नववधू को सम्मान स्वरूप भेंट
दहेज को अस्वीकार करने के साथ-साथ वर पक्ष ने नववधू को सम्मान और स्नेह स्वरूप 23 तोला सोने के आभूषण एवं चांदी की पोशाक भेंट की। यह भेंट किसी लेन-देन का हिस्सा नहीं, बल्कि पारिवारिक परंपरा और स्नेह का प्रतीक थी।
इससे यह स्पष्ट हुआ कि दहेज-रहित विवाह का अर्थ परंपराओं का त्याग नहीं, बल्कि कुरीतियों से दूरी है।
शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय सहयोग: ₹3.50 लाख समर्पित
सामाजिक उत्तरदायित्व निभाते हुए वर पक्ष ने भीलवाड़ा छात्रावास को ₹1,00,000 की राशि प्रदान की। इससे पूर्व भी परिवार द्वारा ₹2,50,000 का सहयोग किया जा चुका है। इस प्रकार अब तक कुल ₹3,50,000 की राशि शिक्षा के क्षेत्र में समर्पित की जा चुकी है।
यह योगदान केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि शिक्षा को प्राथमिकता देने की सोच का प्रतीक है। समाजजनों ने इसे अत्यंत सराहनीय कदम बताया और कहा कि यदि हर विवाह में इस प्रकार शिक्षा के लिए सहयोग किया जाए तो अनेक जरूरतमंद विद्यार्थियों का भविष्य संवर सकता है।
नजर बाग रिसॉर्ट में भव्य आशीर्वाद समारोह
जयपुर के नजर बाग रिसॉर्ट, रिंग रोड में आयोजित आशीर्वाद समारोह में समाज बंधुओं और अतिथियों का भव्य स्वागत किया गया। बड़ी संख्या में उपस्थित मेहमानों ने नवदंपत्ति को शुभकामनाएं दीं और इस विवाह को सामाजिक परिवर्तन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
समारोह में वक्ताओं ने कहा कि दहेज जैसी कुरीतियां समाज की जड़ों को कमजोर करती हैं। ऐसे में महला डोबर परिवार की पहल नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा बनेगी।
सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध सशक्त संदेश
आज भी देश के कई हिस्सों में दहेज के कारण पारिवारिक विवाद, आर्थिक बोझ और सामाजिक तनाव देखने को मिलते हैं। ऐसे समय में दहेज-रहित विवाह केवल एक व्यक्तिगत निर्णय नहीं, बल्कि सामाजिक क्रांति की शुरुआत हो सकता है।
डोबर एवं रोड परिवार की यह पहल यह दर्शाती है कि यदि समाज के प्रतिष्ठित और सक्षम परिवार आगे बढ़कर उदाहरण प्रस्तुत करें, तो परिवर्तन अवश्य संभव है।
निष्कर्ष: समानता, शिक्षा और संस्कार को प्राथमिकता
यह विवाह केवल दो परिवारों का मिलन नहीं, बल्कि समानता, शिक्षा और संस्कारों को प्राथमिकता देने का संदेश है। “दुल्हन ही सबसे बड़ा दहेज” की भावना ने इस आयोजन को विशेष बना दिया।
महला डोबर परिवार की यह पहल आने वाले समय में अनेक परिवारों के लिए प्रेरणा बनेगी और दहेज-मुक्त समाज की दिशा में एक मजबूत कदम साबित होगी।

