Chhattisgarh Updates : साहित्यकार को मंच से भगाया, GGU कुलपति के खिलाफ आंदोलन, हटाने की मांग जोर पकड़ रही
Chhattisgarh Updates : बिलासपुर GGU में कुलपति के अपमानित व्यवहार के खिलाफ साहित्यकार, कथाकार सड़क पर उतरे। राज्यपाल-राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजकर तत्काल कार्रवाई की मांग। विश्वविद्यालय की गरिमा पर प्रश्न, राष्ट्रीय स्तर पर विवाद। आंदोलन और चेतावनी जारी, प्रशासन और शासन हस्तक्षेप की उम्मीद।
Chhattisgarh Updates : साहित्यकार को मंच से भगाया, बिलासपुर GGU कुलपति पर नाराजगी बढ़ी
Chhattisgarh Updates : बिलासपुर केंद्रीय विश्वविद्यालय में कुलपति विवाद
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर स्थित गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय (GGU) में हाल ही में साहित्यकार के साथ कुलपति के अपमानजनक व्यवहार का मामला सामने आया है। इस घटना ने न केवल प्रदेश बल्कि देशभर में चर्चा का विषय बना लिया है। साहित्यकार, कथाकार और लेखक इस मामले में नाराज हैं और कुलपति को तत्काल हटाने की मांग कर रहे हैं।
Chhattisgarh Updates : लेखक और साहित्यकार सड़कों पर उतरे
घटना के विरोध में बिलासपुर के साहित्यकार, लेखक और कथाकार सड़कों पर उतर आए। उन्होंने कहा कि कुलपति का यह रवैया न केवल व्यक्तिगत अपमान है, बल्कि विश्वविद्यालय जैसी प्रतिष्ठित संस्था की गरिमा पर भी सवाल खड़ा करता है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर प्रशासन ने कार्रवाई नहीं की, तो आंदोलन किया जाएगा।
राज्यपाल और राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा गया
साहित्यकारों ने कलेक्टर के माध्यम से राज्यपाल और राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपकर मांग की कि कुलपति आलोक चक्रवाल को तत्काल पद से हटाया जाए। ज्ञापन में कहा गया कि राष्ट्रीय कार्यक्रम में साहित्यकारों का अपमान करना अस्वीकार्य है और इसके लिए कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई होनी चाहिए।
राष्ट्रीय परिसंवाद कार्यक्रम में हुई घटना

दरअसल, 7 जनवरी को GGU में ‘समकालीन हिंदी कहानी’ विषय पर राष्ट्रीय परिसंवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और ओडिशा सहित कई राज्यों के साहित्यकार और प्रोफेसर्स शामिल हुए।
कार्यक्रम के दौरान कुलपति प्रो. आलोक चक्रवाल ने अपने जीवन और उपलब्धियों का विवरण देने लगे। बातचीत में उन्होंने गुजराती और बनारसी भाषी अपने निजी जीवन की कहानी साझा की। इससे कुछ साहित्यकार असहज महसूस करने लगे।
मनोज रूपड़ा के साथ विवाद
इस दौरान कुलपति ने मनोज रूपड़ा की ओर इशारा करते हुए कहा, “भाई साहब आप बोर तो नहीं हो रहे हैं।” मनोज ने प्रतिक्रिया दी कि मुद्दे की बात पर आना बेहतर होगा। इस पर कुलपति ने कहा कि वे बड़े कहानीकार और विद्वान बन रहे हैं, लेकिन तमीज नहीं जानते कि कुलपति से कैसे बात करें। इसके बाद कुलपति ने उन्हें मंच से बाहर जाने का निर्देश दे दिया।
इस घटना को देखकर अन्य साहित्यकार और प्रोफेसर विरोध में खड़े हुए, लेकिन कुलपति ने उन्हें भी सभा छोड़ने का संकेत दिया।
साहित्यिक समुदाय की प्रतिक्रिया

कार्यक्रम में उपस्थित साहित्यकार और कथाकारों का कहना है कि कुलपति का यह रवैया न केवल असंसदीय और अपमानजनक था, बल्कि एक अतिथि लेखक के साथ ऐसी बर्ताव की अपेक्षा नहीं की जा सकती। उन्होंने जोर देकर कहा कि जिन्हें अपने पद की गरिमा का ख्याल नहीं है, उन्हें पद पर बने रहने का अधिकार नहीं है।
राष्ट्रीय स्तर पर विश्वविद्यालय की छवि धूमिल
साहित्यकारों का आरोप है कि इस घटना से GGU की छवि राष्ट्रीय स्तर पर धूमिल हुई है। कार्यक्रम में कुलपति का तानाशाही और अभद्र व्यवहार विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा के खिलाफ है।
सामाजिक और प्रशासनिक हस्तक्षेप की मांग
साहित्य प्रेमियों और लेखक समुदाय ने प्रशासन और शासन से आग्रह किया है कि वे पूरे मामले में हस्तक्षेप करें। उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रपति को रिपोर्ट भेजकर कुलपति के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
साहित्य और शिक्षा के महत्व पर जोर
इस घटना ने विश्वविद्यालयों में विचारों की स्वतंत्रता और स्वस्थ चर्चा के महत्व को उजागर किया। साहित्यकारों का कहना है कि इस तरह के व्यवहार से शिक्षा और साहित्य दोनों के मूल्यों को खतरा है।
आगे की कार्रवाई
साहित्यकार और लेखक समुदाय का इरादा साफ है कि अगर प्रशासन ने कुलपति के खिलाफ उचित कदम नहीं उठाए, तो वे आंदोलन के लिए मजबूर होंगे। उनका मानना है कि न्याय और सम्मान के लिए आवाज उठाना जरूरी है।

