Border 2 Movie Controversy : बॉर्डर फिल्म पर फिर विवाद, लोंगेवाला के पूर्व हवलदार ने दिखाई वास्तविक युद्ध तस्वीर
Border 2Movie Controversy : सनी देओल की फिल्म ‘बॉर्डर 2’ में दिखाए गए लोंगेवाला युद्ध को लेकर विवाद गहराया। 1971 युद्ध में शामिल रहे हवलदार मुख्तियार सिंह ने दावा किया कि सिर्फ 3 जवान शहीद हुए थे, जबकि फिल्म में लगभग सभी को शहीद दिखाया गया। उन्होंने इतिहास को सही दिखाने की मांग की।
Border 2 Movie Controversy : सनी देओल की ‘बॉर्डर’ मूवी पर विवाद
लोंगेवाला युद्ध के पूर्व सैनिक ने उठाए सवाल
Border 2 फिल्म को रिलीज हुए करीब तीन दशक हो चुके हैं, लेकिन लोंगेवाला की ऐतिहासिक लड़ाई को लेकर विवाद थमता नजर नहीं आ रहा। अब 1971 के भारत-पाक युद्ध में शामिल रहे हवलदार मुख्तियार सिंह ने फिल्म में दिखाए गए तथ्यों पर सवाल उठाए हैं।
उनका दावा है कि लोंगेवाला के मोर्चे पर 120 भारतीय जवानों ने हजारों पाकिस्तानी सैनिकों और टैंकों का मुकाबला किया था, लेकिन युद्ध में केवल 3 जवान शहीद हुए थे। जबकि फिल्म में लगभग सभी सैनिकों को शहीद दिखाया गया है।
लोंगेवाला की ऐतिहासिक लड़ाई
Battle of Longewala 4-5 दिसंबर 1971 की रात राजस्थान के लोंगेवाला पोस्ट पर भारतीय सेना की 23 पंजाब रेजिमेंट ने पाकिस्तानी टैंकों की भारी टुकड़ी का सामना किया था।
कुलदीप सिंह चांदपुरी के नेतृत्व में भारतीय जवानों ने सीमित संसाधनों के बावजूद मोर्चा संभाला।
हवलदार मुख्तियार सिंह का दावा
मोहाली के कुराली निवासी 81 वर्षीय हवलदार मुख्तियार सिंह का कहना है कि उस समय वे 26 वर्ष के थे और मोर्चे पर तैनात थे। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान के 45 टैंक भारतीय सीमा में दाखिल हुए थे और रात करीब डेढ़ बजे पहला गोला भारतीय पोस्ट के पास गिरा।
उनके अनुसार, पूरी लड़ाई में भारतीय सेना की सिर्फ तीन कैजुअल्टी हुईं। वे कहते हैं कि फिल्म में सभी जवानों को शहीद दिखाकर वास्तविक इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया, जिससे वे आहत हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि वे पिछले दो वर्षों से इस मामले में राजस्थान के मुख्यमंत्री, रक्षा मंत्री और प्रधानमंत्री को पत्र लिख चुके हैं।
‘बॉर्डर 2’ फिल्म और विवाद
सनी देओल अभिनीत ‘बॉर्डर’ फिल्म 1997 में रिलीज हुई थी और यह 1971 के युद्ध पर आधारित थी। फिल्म को दर्शकों ने खूब सराहा और यह देशभक्ति की प्रतीक फिल्मों में शामिल हो गई।
हाल ही में ‘बॉर्डर-2’ की चर्चा के बीच पुराना विवाद फिर से सामने आया है। पूर्व सैनिकों का कहना है कि फिल्म में भावनात्मक प्रभाव के लिए तथ्यों को बदला गया, जबकि वास्तविक घटनाओं को सही रूप में दिखाया जाना चाहिए था।
“हम असली हीरो हैं, हमें कोई नहीं पूछता”
मुख्तियार सिंह ने कहा कि वे और उनके साथी उस युद्ध के असली हीरो हैं, लेकिन उन्हें उचित पहचान नहीं मिली। उन्होंने कहा, “हम देश के सिपाही हैं, किसी पार्टी के नहीं। हमें किसी मेडल या इनाम का लालच नहीं, बस इतिहास को सही तरीके से दिखाया जाए।”
उन्होंने सनी देओल से अपील की कि वे जीवित बचे सैनिकों से मिलें और सार्वजनिक रूप से 23 पंजाब रेजिमेंट के जवानों की बहादुरी का उल्लेख करें।
इतिहास बनाम सिनेमाई प्रस्तुति
फिल्में अक्सर वास्तविक घटनाओं पर आधारित होती हैं, लेकिन उनमें नाटकीय प्रभाव के लिए कुछ बदलाव किए जाते हैं। हालांकि, जब मामला सैन्य इतिहास और शहीदों की शौर्यगाथा से जुड़ा हो, तो तथ्यों की सटीकता को लेकर संवेदनशीलता बढ़ जाती है।
लोंगेवाला युद्ध भारतीय सेना की बहादुरी का प्रतीक है। ऐसे में पूर्व सैनिकों की भावनाओं को भी गंभीरता से लेने की आवश्यकता है।
कुल मिलाकर, ‘बॉर्डर’ फिल्म पर उठा यह विवाद एक बार फिर इतिहास और सिनेमा के बीच संतुलन पर बहस छेड़ रहा है। अब देखना होगा कि इस मामले में संबंधित पक्ष क्या प्रतिक्रिया देते हैं।


