Bhopal Kairva Nursery Controversy : हिंदू-मुस्लिम कपल की एंट्री रोकी, आधार जांच पर उठा बवाल
Bhopal Kairva Nursery Controversy : भोपाल के केरवा डैम स्थित केरवा नर्सरी में हिंदू-मुस्लिम कपल को एंट्री देने से इनकार का मामला सामने आया। कर्मचारी ने आधार कार्ड जांच और बजरंग दल के डर का हवाला दिया। पुलिस और वन विभाग ने ऐसे किसी आदेश से इनकार किया। पढ़ें पूरी जांच रिपोर्ट।
Bhopal Kairva Nursery Controversy : भोपाल में ‘लव जिहाद’ रोकने के नाम पर एंट्री टेस्ट?
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में स्थित केरवा डैम के पास बनी केरवा नर्सरी में एक नया विवाद सामने आया है। आरोप है कि यहां अलग-अलग धर्म के युवक-युवती को प्रवेश देने से मना किया गया। प्रवेश द्वार पर आधार कार्ड की जांच की जा रही है और कथित तौर पर ‘लव जिहाद’ रोकने के नाम पर एंट्री रोकी जा रही है।
यह मामला तब उजागर हुआ जब एक मीडिया टीम ने स्टिंग ऑपरेशन कर स्थिति की पड़ताल की।
केरवा नर्सरी, भोपाल


स्टिंग ऑपरेशन में क्या सामने आया?

रिपोर्ट के अनुसार, एक युवक (मुस्लिम) और युवती (हिंदू) के रूप में रिपोर्टर नर्सरी के गेट पर पहुंचे। वहां टेबल-कुर्सी लगाकर बैठा कर्मचारी टिकट दे रहा था।
1️⃣ टिकट से पहले आधार कार्ड की मांग
कर्मचारी ने टिकट देने से पहले आधार कार्ड दिखाने को कहा। मोबाइल में आधार दिखाने पर उसने कहा — “मोबाइल में दिखा दो… आधार ही लगता है।”
2️⃣ पहचान देखते ही एंट्री से इनकार
दोनों के आधार कार्ड देखने के बाद कर्मचारी ने कथित तौर पर कहा — “अलाउड नहीं है… आपको नहीं भेज सकेंगे।”
कारण पूछने पर उसने कहा — “बजरंग दल वाले आ जाएंगे, परेशान करेंगे आपको… वो रोज आते हैं।”
3️⃣ पुलिस और विभाग का हवाला
कर्मचारी ने दावा किया कि यह व्यवस्था पुलिस और वन विभाग के आदेश पर लागू है। उसने कहा — “ऊपर से आदेश है… वन विभाग से है, थाने से है।”
साथ ही जनवरी में हुए कथित हंगामे का भी जिक्र किया।
4️⃣ ‘1 जनवरी से नियम लागू’
कर्मचारी ने कहा कि 1 जनवरी से यह नियम लागू किया गया है और सभी के आधार कार्ड जांचे जाते हैं।
विश्व हिंदू परिषद का बयान
इस मामले में विश्व हिंदू परिषद के प्रांत मंत्री जितेंद्र चौहान ने कहा कि हाल ही में वहां कुछ नाबालिगों से जुड़ी घटनाएं हुई थीं। उनके अनुसार, “हमने विभाग और पुलिस से चर्चा कर आधार कार्ड जांच की मांग की थी ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।”
हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि इस संबंध में कोई आधिकारिक आदेश जारी हुआ है या नहीं।
पुलिस का स्पष्ट इनकार
मामले में रातीबड़ थाना प्रभारी रास बिहारी शर्मा ने साफ कहा कि पुलिस ने इस तरह का कोई आदेश जारी नहीं किया है।
उनके अनुसार, “पुलिस किसी पर्यटन स्थल पर धर्म के आधार पर एंट्री रोकने या आधार कार्ड जांच का निर्देश नहीं देती। यह जानकारी गलत है।”
वन विभाग ने क्या कहा?
मध्य प्रदेश वन विभाग के एपीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ एल कृष्ण मूर्ति ने कहा कि विभाग किसी प्रकार का भेदभाव नहीं करता। उन्हें इस मामले की जानकारी नहीं है और वे इसकी जांच करेंगे।
वर्तमान नियम क्या हैं?

फिलहाल केरवा नर्सरी में प्रवेश के लिए कोई विशेष प्रतिबंधित नियम लागू नहीं है। सामान्य तौर पर:
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प्रति व्यक्ति 20 रुपए प्रवेश शुल्क
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10 रुपए अतिरिक्त शुल्क (निर्धारित अवधि के अनुसार)
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3 से 5 घंटे तक प्रवेश मान्य
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फोटोग्राफी के लिए कैमरा शुल्क 500 रुपए
आधार कार्ड अनिवार्य होने या धर्म के आधार पर एंट्री रोकने संबंधी कोई आधिकारिक सार्वजनिक आदेश उपलब्ध नहीं है।
उठ रहे बड़े सवाल
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क्या बिना लिखित आदेश के पहचान पत्र जांच वैध है?
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क्या किसी पर्यटन स्थल पर धर्म के आधार पर प्रवेश रोका जा सकता है?
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कर्मचारी द्वारा पुलिस और विभाग का हवाला क्यों दिया गया?
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क्या किसी संगठन के दबाव में ऐसी व्यवस्था लागू की गई?
यह मामला न केवल प्रशासनिक पारदर्शिता बल्कि नागरिक अधिकारों से भी जुड़ा हुआ है।
निष्कर्ष
भोपाल के केरवा नर्सरी में सामने आया यह विवाद कई स्तरों पर जांच की मांग करता है। जहां एक ओर कर्मचारी आदेश का हवाला दे रहा है, वहीं पुलिस और वन विभाग ऐसे किसी निर्देश से इनकार कर रहे हैं।
अब देखना होगा कि प्रशासन इस पूरे मामले में क्या कार्रवाई करता है और क्या किसी प्रकार का आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी किया जाता है।
भोपाल जैसे शांत शहर में पर्यटन स्थल पर इस तरह का विवाद सामने आना निश्चित रूप से चिंता का विषय है।

