Bharat Vikas Parishad का सेवा संगम कार्यक्रम, स्वामी विवेकानन्द जयंती पर राज्यपाल का प्रेरक संदेश
जयपुर में Bharat Vikas Parishad द्वारा आयोजित सेवा संगम कार्यक्रम में राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने स्वामी विवेकानन्द के विचारों को आज भी प्रासंगिक बताया। उन्होंने कहा कि गरीबों का कल्याण ही ईश्वर की सच्ची सेवा है और युवाओं को निडर होकर आगे बढ़ना चाहिए।
Bharat Vikas Parishad का सेवा संगम कार्यक्रम आयोजित
जयपुर/कोटा :
स्वामी विवेकानन्द जी की 163वीं जयंती के अवसर पर भारत विकास परिषद कोटा महानगर की ओर से सेवा संगम कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम शिव ज्योति कॉन्वेंट स्कूल सभागार में आयोजित हुआ, जिसमें राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का उद्देश्य स्वामी विवेकानन्द के विचारों को समाज और विशेष रूप से युवाओं तक पहुंचाना तथा सेवा, संस्कार और राष्ट्र निर्माण के संदेश को सशक्त करना रहा।
स्वामी विवेकानन्द के संदेश आज भी जीवन में उपयोगी – राज्यपाल
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे ने कहा कि स्वामी विवेकानन्द जी के उपदेश आज भी हमारे जीवन में पूरी तरह प्रासंगिक हैं। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानन्द ने व्यक्ति को दृढ़ संकल्प, आत्मविश्वास और निडरता के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।
राज्यपाल ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति अपने लक्ष्य के प्रति पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ आगे बढ़ता है, तो उसे जीवन में सफलता अवश्य प्राप्त होती है। स्वामी विवेकानन्द का संदेश केवल आध्यात्मिक नहीं, बल्कि व्यावहारिक जीवन के हर क्षेत्र में मार्गदर्शन करता है।
निडरता और आत्मविश्वास से ही मिलती है सफलता
श्री बागडे ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि स्वामी विवेकानन्द हमेशा युवाओं से आत्मविश्वास रखने और निर्भीक होकर जीवन में आगे बढ़ने का आह्वान करते थे। उन्होंने कहा कि आत्मविश्वास के साथ कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता।
राज्यपाल ने कहा कि आज के युवाओं को स्वामी विवेकानन्द के विचारों को अपनाकर न केवल अपने व्यक्तिगत जीवन में आगे बढ़ना चाहिए, बल्कि समाज और राष्ट्र के विकास में भी अपनी सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
गरीब और कमजोर वर्ग का कल्याण ही ईश्वर की सच्ची सेवा
अपने संबोधन में राज्यपाल श्री बागडे ने मानव सेवा को सर्वोच्च सेवा बताते हुए कहा कि गरीब और कमजोर लोगों के कल्याण के लिए कार्य करना ही ईश्वर की सच्ची सेवा है। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानन्द ने मानव सेवा को ही ईश्वर भक्ति का मार्ग बताया था।
उन्होंने स्पष्ट किया कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक सहायता पहुंचाना ही सच्चे अर्थों में राष्ट्र और समाज की सेवा है। भारत विकास परिषद जैसे संगठनों द्वारा किए जा रहे सेवा कार्य समाज को मजबूत आधार प्रदान करते हैं।
शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान नहीं, चरित्र निर्माण भी
राज्यपाल ने शिक्षा पर स्वामी विवेकानन्द के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल जानकारी प्राप्त करना नहीं है, बल्कि इससे चरित्र निर्माण, साहस, करुणा और एकाग्रता का विकास होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि शिक्षा के साथ संस्कार और नैतिक मूल्य नहीं जुड़ते, तो समाज का संतुलित विकास संभव नहीं है। स्वामी विवेकानन्द की शिक्षा संबंधी सोच आज भी उतनी ही प्रासंगिक है, जितनी उनके समय में थी।
सकारात्मक विचार ही भविष्य का निर्माण करते हैं
राज्यपाल श्री बागडे ने अपने वक्तव्य में सकारात्मक सोच पर जोर देते हुए कहा कि विचार ही भविष्य का निर्माण करते हैं। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को अपने जीवन में सदैव सकारात्मक विचार रखने चाहिए, क्योंकि नकारात्मक सोच व्यक्ति की प्रगति में बाधक बनती है।
उन्होंने स्वामी विवेकानन्द के उस विचार का उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि हमारी वाणी इतनी सकारात्मक होनी चाहिए कि उससे किसी की भावनाओं को ठेस न पहुंचे।
विश्व बंधुत्व का संदेश और शिकागो भाषण का ऐतिहासिक महत्व
राज्यपाल ने स्वामी विवेकानन्द के विश्व बंधुत्व के संदेश को याद करते हुए कहा कि 1893 में शिकागो में आयोजित विश्व धर्म परिषद में दिए गए उनके ऐतिहासिक भाषण ने भारत को वैश्विक पहचान दिलाई।
उन्होंने कहा कि उस भाषण में स्वामी विवेकानन्द ने भारत की संस्कृति, आध्यात्मिकता और गौरवशाली परंपराओं को विश्व के सामने प्रस्तुत किया। “मैं एक ऐसे धर्म से हूं जिसने विश्व को सार्वभौमिक सहनशीलता का पाठ पढ़ाया” — यह कथन आज भी भारत की पहचान का आधार है।
मानवता और सहनशीलता का संदेश
राज्यपाल ने कहा कि स्वामी विवेकानन्द ने मानव मात्र के बीच आपसी दुर्भावना को समाप्त करने और भाईचारे को बढ़ावा देने का संदेश दिया। उन्होंने बताया कि भारत की परंपरा हमेशा से सहनशीलता, करुणा और मानवता पर आधारित रही है, जिसे स्वामी विवेकानन्द ने विश्व पटल पर मजबूती से रखा।
भारत बनेगा विश्व में नंबर एक – राज्यपाल
अपने संबोधन में राज्यपाल श्री बागडे ने विश्वास जताया कि भारत अपनी बौद्धिक और शारीरिक क्षमता के बल पर विश्व में नंबर एक बनेगा। उन्होंने कहा कि इसके लिए प्रत्येक नागरिक को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी।
उन्होंने सभी से आह्वान किया कि देश की प्रतिष्ठा को विश्व स्तर पर स्थापित करना हम सभी का साझा लक्ष्य होना चाहिए और जब तक यह लक्ष्य हासिल नहीं हो जाता, तब तक निरंतर प्रयास करते रहना चाहिए।
31 सामाजिक संस्थाओं का सम्मान
इस अवसर पर राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे ने सामाजिक सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाली कोटा की 31 संस्थाओं को सम्मानित किया। यह सम्मान उन संस्थाओं को प्रदान किया गया, जो शिक्षा, स्वास्थ्य, सेवा और सामाजिक उत्थान के क्षेत्र में निरंतर कार्य कर रही हैं।
सम्मान समारोह ने कार्यक्रम को और अधिक प्रेरणादायी बना दिया तथा समाज सेवा से जुड़े लोगों का मनोबल बढ़ाया।
निष्कर्ष
भारत विकास परिषद द्वारा आयोजित सेवा संगम कार्यक्रम न केवल स्वामी विवेकानन्द जी को श्रद्धांजलि था, बल्कि उनके विचारों को आज के समाज से जोड़ने का सशक्त माध्यम भी बना। राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे के प्रेरक संबोधन ने यह संदेश स्पष्ट किया कि सेवा, सकारात्मक सोच और आत्मविश्वास ही व्यक्ति और राष्ट्र को आगे बढ़ाने का मार्ग है।
स्वामी विवेकानन्द के विचार आज भी युवाओं, समाज और राष्ट्र के लिए प्रकाशस्तंभ की तरह मार्गदर्शन कर रहे हैं।




