Airfare Hike : हवाई किराया बढ़ा तो सरकार सख्त, एयरलाइंस संग बैठक जल्द, यात्रियों को राहत संकेत
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Airfare Hike : एटीएफ की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद एयरलाइंस ने फ्यूल सरचार्ज बढ़ाया, जिससे हवाई किराया महंगा हुआ। केंद्र सरकार ने संकेत दिया है कि जरूरत पड़ने पर हस्तक्षेप किया जाएगा और एयरलाइंस के साथ जल्द बैठक होगी। यात्रियों को राहत देने के उपायों पर विचार जारी है।
Airfare Hike : हवाई किराया बढ़ा तो सरकार दखल देगी, एयरलाइंस के साथ जल्द बैठक
एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) यानी विमान ईंधन की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी के बाद हवाई यात्राएं महंगी होने लगी हैं। कई एयरलाइंस ने फ्यूल सरचार्ज बढ़ा दिया है, जिससे यात्रियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। इसी स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार अब इस मामले में हस्तक्षेप करने की तैयारी में है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सरकार जल्द ही एयरलाइंस कंपनियों के साथ बैठक कर सकती है, ताकि यात्रियों को बढ़ते किरायों से राहत मिल सके। सरकार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि एयरलाइंस अत्यधिक किराया न बढ़ाएं और आम लोगों की यात्रा प्रभावित न हो।
एटीएफ की कीमतों में बढ़ोतरी से बढ़ा हवाई किराया
हाल ही में एविएशन टर्बाइन फ्यूल की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। सरकार ने एविएशन सेक्टर को सपोर्ट देने के लिए कुल 25 प्रतिशत तक कीमत बढ़ाने की अनुमति दी थी। हालांकि, घरेलू उड़ानों पर यात्रियों का बोझ कम रखने के लिए प्रभावी बढ़ोतरी को लगभग 8.5 प्रतिशत तक सीमित रखा गया।
इसके बावजूद अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए एटीएफ की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिला है। इंटरनेशनल ऑपरेशंस और चार्टर्ड फ्लाइट्स के लिए ईंधन की कीमत लगभग दोगुनी हो गई है। इससे एयरलाइंस की परिचालन लागत में तेजी से वृद्धि हुई है, जिसका सीधा असर टिकट किरायों पर पड़ रहा है।
एटीएफ कीमतों में बदलाव का विवरण

कैटेगरी — पुरानी कीमत — नई कीमत — बदलाव
- इंटरनेशनल एटीएफ — ₹96,638 — ₹2,07,341 — +114%
- डोमेस्टिक एटीएफ — ₹96,638 — ₹1,04,927 — +8.5%
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर लागत का दबाव अधिक बढ़ा है, जबकि घरेलू उड़ानों में वृद्धि अपेक्षाकृत सीमित रखी गई है।
एयरलाइंस ने बढ़ाया फ्यूल सरचार्ज, यात्रियों पर असर
एटीएफ की कीमतों में वृद्धि के बाद एयरलाइंस कंपनियों ने अपने फ्यूल सरचार्ज में बदलाव किया है। देश की सबसे बड़ी एयरलाइन
IndiGo
ने पहले लागू 425 रुपये के फ्लैट सरचार्ज को हटाकर दूरी के आधार पर नया स्ट्रक्चर लागू किया है।
डोमेस्टिक रूट्स पर नया सरचार्ज
अब घरेलू उड़ानों के लिए दूरी के आधार पर 275 रुपये से लेकर 950 रुपये तक का फ्यूल सरचार्ज लिया जा रहा है। इससे कम दूरी की उड़ानों में कुछ राहत मिली है, लेकिन लंबी दूरी की घरेलू उड़ानें पहले की तुलना में महंगी हो गई हैं।
इंटरनेशनल रूट्स पर बड़ा असर

अंतरराष्ट्रीय रूट्स पर यात्रियों को सबसे ज्यादा असर देखने को मिला है। यूरोप जैसे लॉन्ग-हॉल रूट्स पर फ्यूल सरचार्ज में 10,000 रुपये तक की बढ़ोतरी की गई है। एयरलाइंस ने नई दरें 2 अप्रैल से लागू कर दी हैं, जिससे विदेश यात्रा करने वाले यात्रियों का खर्च काफी बढ़ गया है।
एयरलाइंस की लागत में 40 प्रतिशत हिस्सा होता है फ्यूल
एविएशन सेक्टर के विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी एयरलाइन की कुल परिचालन लागत में ईंधन का हिस्सा लगभग 40 प्रतिशत होता है। यही कारण है कि ईंधन की कीमतों में मामूली बदलाव भी एयरलाइंस के मुनाफे और संचालन पर बड़ा असर डालता है।
एयरलाइंस कंपनियों का तर्क है कि जब ईंधन की कीमतें बढ़ती हैं, तो उन्हें अपने खर्च को संतुलित करने के लिए किराया बढ़ाना पड़ता है। हालांकि, सरकार चाहती है कि इस अतिरिक्त बोझ को पूरी तरह यात्रियों पर न डाला जाए।
सरकार के हस्तक्षेप से क्या सस्ता होगा हवाई किराया?
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर सरकार एयरलाइंस के साथ बैठक कर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करती है, तो बढ़े हुए सरचार्ज में कुछ कमी देखने को मिल सकती है।
सरकार का उद्देश्य यह है कि एयरलाइंस किरायों में अचानक और अत्यधिक वृद्धि न करें, बल्कि लागत बढ़ने के बावजूद संतुलित दरें बनाए रखें। यदि बातचीत सफल रहती है, तो आने वाले समय में कुछ रूट्स पर किरायों में कटौती या सरचार्ज में आंशिक रोलबैक संभव है।
क्या होता है फ्यूल सरचार्ज और क्यों लगाया जाता है?
फ्यूल सरचार्ज वह अतिरिक्त शुल्क होता है, जिसे एयरलाइंस टिकट के मूल किराए के ऊपर जोड़ती हैं। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें तेजी से बढ़ती हैं, तो एयरलाइंस सीधे बेस फेयर बढ़ाने के बजाय फ्यूल सरचार्ज लागू करती हैं।
तेल की कीमतें कम होने पर यह शुल्क घटाया या समाप्त किया जा सकता है, जबकि बेस फेयर में बदलाव करना अधिक जटिल प्रक्रिया होती है।
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