Afghanistan Attack On Pakistan : नूर खान एयरबेस पर हमले का दावा
अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने दावा किया है कि उसने पाकिस्तान के संवेदनशील नूर खान एयरबेस को निशाना बनाया है। यह एयरबेस रावलपिंडी में स्थित है और पाकिस्तान वायुसेना के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम माना जाता है।
डूरंड लाइन विवाद फिर चर्चा में
अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच विवादित सीमा डूरंड लाइन दशकों से तनाव का कारण रही है। तालिबान ने कहा कि पाकिस्तान द्वारा काबुल, बगराम और अन्य इलाकों में किए गए हवाई हमलों के जवाब में यह कार्रवाई की गई।
संघर्ष की शुरुआत 22 फरवरी को हुई थी, जब पाकिस्तान ने सीमावर्ती इलाकों में एयरस्ट्राइक की थी। इसके जवाब में 27 फरवरी को अफगानिस्तान ने पलटवार किया।
पाकिस्तान का दावा: 400 से ज्यादा लड़ाके मारे
पाकिस्तान सरकार का कहना है कि अब तक 400 से अधिक अफगान लड़ाके मारे जा चुके हैं और सैकड़ों घायल हुए हैं। पाकिस्तान ने अपने ऑपरेशन को ‘गजब लिल हक’ नाम दिया है, जिसका अर्थ है – अपने हक के लिए खड़े होना।
पाकिस्तानी सूचना मंत्री के मुताबिक:
पाकिस्तानी वायुसेना ने नंगरहार और कंधार में तालिबान के ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया है।
तालिबान का पलटवार
तालिबान का कहना है कि उसके केवल 8 से 13 लड़ाके मारे गए हैं। उसने दावा किया कि 55 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए और दो सैन्य मुख्यालयों सहित कई चौकियों पर कब्जा किया गया।
तालिबान ने चेतावनी दी है कि अगर पाकिस्तान ने आगे हमला किया, तो और कड़ा जवाब दिया जाएगा।
पाकिस्तान की सीनेट ने अफगानिस्तान के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित किया है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सेना मुख्यालय का दौरा कर ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति दोहराई।
विदेश मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि किसी भी उकसावे पर कड़ा और निर्णायक जवाब दिया जाएगा।
TTP बना बड़ा कारण
पाकिस्तान लंबे समय से आरोप लगाता रहा है कि तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) अफगानिस्तान की जमीन से ऑपरेट कर रहा है। हालांकि तालिबान सरकार इन आरोपों से इनकार करती रही है।
2021 में अफगानिस्तान में तालिबान के सत्ता में आने के बाद से दोनों देशों के रिश्तों में लगातार तनाव बना हुआ है।
जंग जैसे हालात
दोनों देशों के बीच हवाई हमले, गोलीबारी और सैन्य बयानबाजी से जंग जैसे हालात बन गए हैं। डूरंड लाइन पर बढ़ता तनाव पूरे दक्षिण एशिया की सुरक्षा स्थिति को प्रभावित कर सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कूटनीतिक स्तर पर जल्द समाधान नहीं निकला, तो यह संघर्ष बड़े क्षेत्रीय संकट में बदल सकता है।
निष्कर्ष
अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच मौजूदा संघर्ष ने सीमा विवाद, आतंकवाद और क्षेत्रीय राजनीति को फिर केंद्र में ला दिया है। दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग हैं, लेकिन स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है।
आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या दोनों देश बातचीत का रास्ता चुनते हैं या यह टकराव और गहराता है।