गुरू की कृपा और समर्पण का संदेश: श्री नागेश्वर तीर्थ में आचार्य श्री अभयसागरजी महाराज की 39वीं पुण्यतिथि पर विशाल धर्मसभ
गुरू की कृपा और समर्पण का संदेश: जीवन में यदि गुरू की कृपा का पात्र बनना है तो गुरू के समक्ष तर्क की भाषा नहीं अपितु समपर्ण का भाव होना चाहीए। ज्ञान एवं शिक्षा की पहली शर्त विनय एवं विवेक है। संस्कारों की धरा पर ही सद्विचार स्थापित हो सकते है, गुरू के प्रति आस्था है तो अंधेरों में भी रास्ता है।
श्री नागेश्वर तीर्थ तीर्थोद्धारक पन्यास प्रवर, गुरूदेव श्री अभयसागरजी महाराज की 39वीं पुण्यतिथि के आयोजन पर तीर्थ मार्गदर्शक प पू आचार्य श्री अशोकसागरसूरीश्वर जी म सा आदि ठाणा की निश्रा में पूज्य आचार्य श्री सागरचंद्रसागरसूरीश्वरजी म सा ने विशाल धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त हुए।
आचार्य श्री ने कहा कि गुरूदेव अभयसागरजी की कर्मभूमी मालव क्षेत्र रहा है, जहाॅ पर गुरूदेव ने घोर साधना से प्राप्त दैविक शक्तियों का प्रयोग इस संपूर्ण क्षेत्र में धर्म शासन की स्थापना में किया, इसी श्रंखला में विश्व प्रसिद्ध श्री नागेश्वर तीर्थ की गवेषणा कर इस के तीर्थ के पुर्नरूत्थान एवं विकास में गुरूदेव ने अपनी तपोबल से प्राप्त अध्यात्मिक शक्तियों को आहूत किया।
धर्मसभा में आचार्य श्री सहीत प पू आ.श्री सौम्यचंद्रसागरसूरीश्वरजी म सा, प पू आ. श्री विवेकचंद्रसागर सूरीश्वरजी म सा, प्रवर्तक मुनिराज श्री धैर्यचंद्रसागरजी म सा, गणिवर्य श्री तीर्थचंद्रसागरजी म सा, गणिवर्य श्री मोक्षचंद्रसागरजी म सा एवं डाक्टरेट से सम्मानित विद्वान मुनिराज श्री वैराग्यचंद्रसागरजी म सा एवं तीर्थ स्थल पर चातुर्मास दौरान विराजित प.पू. सा. श्री स्मितदर्षिताश्रीजी म.सा. आदि ठाणा ने भी अपनी पावन निश्रा प्रदान कर गुणानुवाद किया
आयोजन के पूर्व श्री नागेश्वर पार्श्वनाथ भगवान की प्रतिमा पर दीप प्रज्वलन का लाभ लक्ष्मीचंद माणकचंद लोढा परिवार भवानीमंडी एवं गुरूदेव को माल्यापर्ण एवं वासक्षेप पूजा का लाभ धींग परिवार ने लिया।
इस अवसर पर तीर्थ पेढी सचिव धर्मचंद जैन, कोषाध्यक्ष प्रसन्न लोढा, संचालक गौतमचंद धींग, बाबुलाल आंचलिया, गौतम जैन ओसवाल आदि ने भी गुरूदेव के प्रति अपने श्रद्धा सुमन अर्पित किये।
कुशल विचक्षण महिला मण्डल ने गुरूवंदना गीत प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम अवसर पर स्थानीय श्रीसंघ सहीत चौमहला, आलोट, महिदपुर, उज्जैन, भवानीमंडी, रामगंजमडी,कस्बा उन्हैल, मंदसौर आदि अनेक नगरों से आऐ सैकडो गुरू भक्त उपस्थित रहे
ज्ञात हो कि गुरू समपर्ण महोत्सव के अवसर पर आज के साधर्मिक वात्सल्य का लाभ स्व. भंवरलालजी स्व. पूनमचंदजी एवं स्व. विजयप्रकाशजी धींग की स्मृति में गौतमचंद, जम्बुकुमार, सिद्धार्थ एवं वंशवीर परिवार (डग वाला) ने लिया, जिनका तीर्थ पेढी की ओर से बहुमान किया गया।
आयोजन के तह्त यहाॅ तीर्थ मंदिर परिसर में स्थित श्री अभयसागरजी की चरणा पादुका के अष्टप्रकारी पूजा भी धींग परिवार द्वारा की गई। साथ ही गुरूदेव के चरणा पादुका के 3600 परिक्रमाए स्थानीय श्रीसंघ एवं उपस्थित महानुभावों द्वारा हुई। गुरूदेव के देवलोक गमन के समय 4 बजकर 32 मिनट पर गुरूदेव की देहरीं में आचार्य श्री वासक्षेप किया गया। प्रवचन में संचालन चांदमल जैन ने किया।
चरणा पादुका पूजा और परिक्रमा
तीर्थ मंदिर परिसर में श्री अभयसागरजी की चरणा पादुका की अष्टप्रकारी पूजा धींग परिवार द्वारा संपन्न की गई। इसके अलावा गुरूदेव के चरणा पादुका की 3600 परिक्रमा स्थानीय श्रीसंघ और उपस्थित श्रद्धालुओं द्वारा की गई।
गुरूदेव के देवलोक गमन के समय 4 बजकर 32 मिनट पर आचार्य श्री द्वारा वासक्षेप किया गया। प्रवचन का संचालन चांदमल जैन ने किया।
विभिन्न नगरों से उपस्थित श्रद्धालु
कार्यक्रम में जयपुर, चौमहला, आलोट, महिदपुर, उज्जैन, भवानीमंडी, रामगंजमडी, कस्बा उन्हैल और मंदसौर सहित अनेक नगरों से सैकड़ों गुरू भक्त उपस्थित रहे। इस अवसर पर गुरू समर्पण महोत्सव का लाभ स्व. भंवरलालजी, स्व. पूनमचंदजी एवं स्व. विजयप्रकाशजी धींग की स्मृति में गौतमचंद, जम्बुकुमार, सिद्धार्थ एवं वंशवीर परिवार (डग वाला) ने लिया, जिनका तीर्थ पेढी द्वारा बहुमान किया गया।