अशोक गहलोत : कांग्रेस की त्याग और कुर्बानी की विरासत को भुलाना चाहते हैं RSS और भाजपा

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि आरएसएस और भाजपा कांग्रेस की त्याग, तपस्या और कुर्बानी की विरासत को भुलाना चाहते हैं। वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ पर उन्होंने इसके राजनीतिकरण पर चिंता जताई और सभी धर्मों की भागीदारी से इसे राष्ट्रीय उत्सव के रूप में मनाने की अपील की।
कांग्रेस की विरासत को भुलाना चाहती है भाजपा और आरएसएस: अशोक गहलोत

जयपुर :
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि आरएसएस और भाजपा स्वतंत्रता आंदोलन में कांग्रेस की त्याग, तपस्या और कुर्बानी की विरासत को भुलाना चाहते हैं। उन्होंने “वंदे मातरम्” के 150 वर्ष पूरे होने पर शुभकामनाएँ देते हुए इसके राजनीतिकरण पर चिंता व्यक्त की और कहा कि इस ऐतिहासिक अवसर का उपयोग आजादी की विरासत को कमजोर करने के लिए किया जा रहा है।
“कांग्रेस की विरासत, स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत है”
जयपुर स्थित अपने आवास पर आयोजित प्रेस वार्ता में गहलोत ने कहा —
“मेरा आरोप है कि ये लोग आज़ादी की शानदार विरासत को समाप्त करना चाहते हैं। त्याग, तपस्या और कुर्बानी की परंपरा को भुलाने की कोशिश हो रही है। भाजपा को धर्म के नाम पर सत्ता मिली, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि वह कांग्रेस की विरासत को मिटा दें।”
“आरएसएस का स्वतंत्रता आंदोलन से कोई संबंध नहीं”
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि आरएसएस का आज़ादी की लड़ाई से कोई लेना-देना नहीं रहा।
“अंग्रेजों के शासन में वे उनके साथ रहे, तिरंगा नहीं फहराया, संविधान को नहीं माना, गांधीजी और डॉ. अंबेडकर के पुतले जलाए। सरदार पटेल ने स्वयं आरएसएस पर प्रतिबंध लगाया था, और अब वे उन्हीं पर अधिकार जताते हैं।”
गहलोत ने स्पष्ट कहा कि कांग्रेस की विरासत ही भारत के स्वतंत्रता आंदोलन की असली पहचान है और कोई इसे समाप्त नहीं कर सकता।
“हम यह नहीं होने देंगे कि आने वाली पीढ़ियाँ सिर्फ आरएसएस या भाजपा को ही इतिहास में याद रखें।”
“वंदे मातरम् कांग्रेस की परंपरा का हिस्सा रहा है”
गहलोत ने कहा कि “वंदे मातरम्” 1896 में स्वतंत्रता सेनानियों के लिए प्रेरणा गीत बना था और इसे गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में पहली बार गाया था।
“तब से यह गीत कांग्रेस की हर समिति और अधिवेशन में नियमित रूप से गाया जाता रहा है।”
उन्होंने आरएसएस पर सवाल उठाते हुए कहा —
“आपका गीत ‘नमस्ते सदा वत्सले’ है, कभी शाखाओं में ‘वंदे मातरम्’ गाया है क्या? कभी इसकी चर्चा भी की क्या?”
“जयंती उत्सव में सभी धर्मों की भागीदारी हो”
गहलोत ने कहा कि वे ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ मनाने के फैसले का स्वागत करते हैं, लेकिन यह कार्यक्रम किसी पार्टी विशेष का न बनकर सभी धर्मों और समुदायों की भागीदारी वाला होना चाहिए।
“हम चाहेंगे कि हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, पारसी और जैन — सभी इस उत्सव में शामिल हों। इसे भाजपा का कार्यक्रम नहीं, बल्कि राष्ट्र का उत्सव बनाया जाए।”

