सिन्धी समाज ने डिजिटल हेरिटेज और 2047 तक विकसित भारत पर जोर दिया

विश्व सिन्धी हिन्दू फाउंडेशन ऑफ एसोसिएशन द्वारा विज्ञान भवन में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन “सशक्त समाज, समृद्ध भारत” में राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष और संगठन के संरक्षक श्री वासुदेव देवनानी ने सिन्धी समाज के योगदान और उसकी गौरवशाली परंपरा पर विशेष प्रकाश डाला। सम्मेलन का मुख्य आतिथ्य लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिडला ने किया, जबकि दूसरे सत्र में केंद्रीय रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह मुख्य अतिथि रहे। इस अवसर पर भारत सहित 35 देशों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।
श्री देवनानी ने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के 2047 तक विकसित भारत के सपने को साकार करने में सिन्धी समाज का योगदान महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक रहा है। उन्होंने समाज से अपील की कि वे अपनी प्रतिभा और संसाधनों से राष्ट्र निर्माण में सहयोग करें और अपनी सांस्कृतिक परंपरा को सशक्त बनाएं। उन्होंने वर्तमान डिजिटल युग में सिन्ध संस्कृति और भाषा को संरक्षित करने के लिए “डिजिटल सिन्धी हेरिटेज प्रोजेक्ट” बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष ने बताया कि आधुनिक भारत में सिन्धी समाज का योगदान उल्लेखनीय है। देश के कुल इनकम टैक्स देने वालों में सिन्धियों का योगदान लगभग 24 प्रतिशत है, जो समाज की आर्थिक और सामाजिक समृद्धि का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि सिन्ध संस्कृति विश्व की सबसे प्राचीनतम संस्कृतियों में से एक है और सिन्धी भाषा भी अत्यंत समृद्ध है, जिसकी लिपि में 52 अक्षर हैं। उन्होंने समाज से आग्रह किया कि वे अपनी मातृभाषा और सांस्कृतिक धरोहर पर गर्व करें और नई पीढ़ी को भी सिन्धी भाषा, कला और संस्कृति से परिचित कराएं।
सिन्धी विभाजन की पीड़ा और उसके बाद के संघर्ष को भी श्री देवनानी ने याद किया। उन्होंने कहा कि विभाजन के समय सिन्धी समुदाय ने करोड़ों और अरबों की संपत्ति छोड़ कर भारत में शरण ली, क्योंकि उन्हें अपनी मातृभूमि, जीवन मूल्य और सनातन धर्म संस्कृति से अपार स्नेह था। भारत आने के बाद भी सिन्धी समाज ने अपने पुरुषार्थ से जीवन को नया रूप दिया और समाज में योगदान देते हुए देश के विकास में सक्रिय भूमिका निभाई।
श्री देवनानी ने प्रधानमंत्री श्री मोदी का आभार व्यक्त किया, जिन्होंने विभाजन की विभीषिका को महसूस करते हुए हर वर्ष 14 अगस्त को विभीषिका दिवस घोषित किया। उन्होंने समाज के लोगों से अपील की कि वे अपने परिवारों में सिन्धी भाषा में संवाद करें और नई पीढ़ी को भी अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ें।
अपने शिक्षा मंत्री कार्यकाल का जिक्र करते हुए श्री देवनानी ने बताया कि उन्होंने राजस्थान के अजमेर और कोटा में सिंधु शोध पीठ की स्थापना कराई और महान क्रांतिकारी श्री हेमू कालानी, महाराजा दाहिर सेन तथा सिन्धी संतों सन्त तेऊ राम, सन्त चंद्र भगवान, सन्त कंवर राम आदि के जीवनियों को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल कराया। उन्होंने अपने भाषण का समापन “जिए सिंध, जिए हिन्द” के उद्घोष से किया।
सम्मेलन में मध्य प्रदेश के सांसद श्री शंकर लालवानी ने नई दिल्ली में “सिन्धु भवन” बनाने की मांग रखी। इस अवसर पर सिन्धी समाज के कई प्रतिनिधियों ने अपने विचार साझा किए। विश्व सिन्धी हिन्दू फाउंडेशन ऑफ एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. गुरूमुख जगवानी ने सम्मेलन में आए सभी प्रतिनिधियों का आभार व्यक्त किया।
सम्मेलन की शुरुआत में राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष श्री वासुदेव देवनानी की धर्मपत्नी स्वर्गीय श्रीमती इन्दिरा देवनानी को दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस अवसर पर देश-विदेश के 35 देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लेकर सिन्धी समाज की सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक उपलब्धियों को साझा किया।
सम्मेलन ने यह स्पष्ट किया कि सिन्धी समाज न केवल भारत की समृद्धि में योगदान दे रहा है, बल्कि अपनी प्राचीन सांस्कृतिक धरोहर और भाषा के संरक्षण में भी अग्रणी भूमिका निभा रहा है। डिजिटल हेरिटेज प्रोजेक्ट और शिक्षा में सिन्ध संस्कृति की शामिल करने जैसी पहलों के माध्यम से नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना और राष्ट्र निर्माण में योगदान देना अब सिन्धी समाज की प्राथमिक जिम्मेदारी बन चुकी है

