
मुरादाबाद जनपद में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के अंतर्गत बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है। इस गंभीर प्रकरण को संज्ञान में लेते हुए जिलाधिकारी अनुज कुमार सिंह ने पूरे मामले की विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं। यह कार्रवाई कुंदरकी से रामवीर सिंह द्वारा की गई शिकायत के बाद की गई है, जिसमें सामूहिक विवाह के नाम पर भ्रष्टाचार, अपात्र लाभार्थियों को योजना का लाभ दिए जाने और सामान वितरण में गड़बड़ी जैसे गंभीर आरोप लगाए गए थे।
जिलाधिकारी अनुज कुमार सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के अंतर्गत मुरादाबाद जनपद में कुल लगभग 1636 जोड़ों का विवाह संपन्न कराया गया था। शिकायत मिलने के बाद प्रशासन ने मामले को हल्के में न लेते हुए जनपद स्तरीय अधिकारियों की एक समिति का गठन किया। इस समिति को निर्देश दिए गए कि वह योजना के अंतर्गत लाभान्वित सभी जोड़ों की दोबारा गहन जांच करे और पात्रता, दस्तावेजों तथा योजना के नियमों के अनुपालन की स्थिति स्पष्ट करे।

जांच समिति द्वारा की गई समीक्षा में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। सबसे अधिक गड़बड़ी मुंडापांडे ब्लॉक में पाई गई, जहां 34 अपात्र जोड़ों को योजना का लाभ दिए जाने की पुष्टि हुई। इसके अलावा शहर क्षेत्र और अन्य ग्रामीण ब्लॉकों में भी एक या दो अपात्र जोड़े पाए गए, जिससे कुल अपात्र लाभार्थियों की संख्या 37 तक पहुंच गई। जांच में यह भी सामने आया कि कुछ मामलों में लाभार्थियों के दस्तावेज अधूरे थे, तो कहीं पात्रता मानकों की अनदेखी कर दी गई।
केवल पात्रता ही नहीं, बल्कि योजना के तहत मिलने वाले सामान के वितरण में भी अनियमितताएं उजागर हुईं। जिलाधिकारी ने जानकारी दी कि कुछ नवविवाहित जोड़ों को योजना के अंतर्गत मिलने वाला पूरा सामान नहीं दिया गया था। इनमें घरेलू उपयोग की वस्तुएं और अन्य आवश्यक सामग्री शामिल है, जो योजना के नियमों के अनुसार प्रत्येक जोड़े को उपलब्ध कराई जानी चाहिए। प्रशासन ने इस लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए ऐसे सभी लाभार्थियों को चिन्हित कर लिया है, जिन्हें पूरा सामान नहीं मिल पाया था, और अब उन्हें शेष सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है।
जिलाधिकारी अनुज कुमार सिंह ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जिन अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा लाभार्थियों का सत्यापन किया गया था, यदि जांच में उनकी भूमिका संदिग्ध पाई जाती है तो उनके खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि योजना के तहत पात्र लाभार्थियों का सही चयन करना संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी है, और इस जिम्मेदारी में लापरवाही किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना सरकार की एक महत्वाकांक्षी और सामाजिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण योजना है, जिसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों की बेटियों का सम्मानजनक विवाह कराना है। इस तरह की योजनाओं में भ्रष्टाचार या अनियमितता न केवल सरकारी संसाधनों की बर्बादी है, बल्कि समाज के जरूरतमंद वर्गों के साथ अन्याय भी है।
प्रशासन की ओर से यह भरोसा दिलाया गया है कि पूरे मामले की विस्तृत और निष्पक्ष जांच की जा रही है। जांच रिपोर्ट आने के बाद जिन भी अधिकारियों, कर्मचारियों या अन्य व्यक्तियों की भूमिका दोषपूर्ण पाई जाएगी, उनके खिलाफ नियमों के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही भविष्य में इस प्रकार की गड़बड़ियों की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए सत्यापन प्रक्रिया को और अधिक सख्त एवं पारदर्शी बनाने के निर्देश भी दिए गए हैं।
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